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Swami Siddhipradananda Maharaj
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Swami Siddhipradananda Maharaj

Author: Swami Siddhipradananda

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Stava, Veda Mantrah and Bhajans recording by Swami Siddhipradananda Maharaj, Monk of Ramakrishna Math and Ramakrishna Mission Belur Math.
538 Episodes
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श्रीगंगाधर महादेव की आरती रुद्राष्टाध्यायी से
शिवमहिम्नस्स्तोत्रम्
महादेवजी की पुष्पांजलि और प्रार्थना मंन्त्र
भगवान महादेव जी की आरती
महाभारत-सार स्वर्गारोहण पर्व से
युधिष्ठिर का शौनक जी से धर्म विषयक बातचीत
हाय मैं बसते हैं श्री राम, कविता श्री राम कथन कविता डा.ओमपकाश वर्मा
गीतातत्व चिंतन , रायपुर आश्रम में दिया गया प्रवचन, स्वामी आत्मानंद महाराज
राम गीता, पं.रामकिंकर उपाध्याय
गोपिकायुगलगीत । गोपियों के द्वारा श्री कृष्ण के वन में गौचारण के लिए चले जाने पर भगवान के लीला का स्मरण और गायन करना।
01. रामराज्य का स्वरूप। श्री रामकिंकर उपाध्याय जी द्वारा रामकृष्ण मिशन आश्रम रायपुर में किया गया प्रवचन। पाठक स्वामी सइद्धइप्रदआनन्द महाराज, बेलूर मठ मुख्यालय रामकृष्ण मठ एवं मिशन
श्रीजगन्नाथाष्टकम्। Chanted by Swami S on vocation of Sri Jagannath Snan Yatra।
भगवान शंकराचार्य का अनुसरण करना चाहिए -विवेकानन्द
२. मां सारदा देवी की संक्षिप्त जीवनी स्वामी अरूपानन्द। स्वामी सिद्धिप्रदानन्द द्वारा पाठ किया गया है।
गोस्वामी तुलसीदास जी की बाहुओं में बात व्याधि की गहरी पीड़ा उत्पन्न हुई थी और फोड़े फून्सियों के कारण सारा शरीर वेदना का स्थान बन गया था उसके निवारण हेतु हनुमान जी की वंदना आरंभ की। अंजनीकुमार की कृपा से उनकी सारी व्यथा दूर हो गई यह वही 44पद्यों का हनुमान बाहुक नामक प्रसिद्ध स्तोत्र है।
गोस्वामी तुलसीदास जी की बाहुओं में बात व्याधि की गहरी पीड़ा उत्पन्न हुई थी और फोड़े फून्सियों के कारण सारा शरीर वेदना का स्थान बन गया था उसके निवारण हेतु हनुमान जी की वंदना आरंभ की। अंजनीकुमार की कृपा से उनकी सारी व्यथा दूर हो गई यह वही 44पद्यों का हनुमान बाहुक नामक प्रसिद्ध स्तोत्र है।
गोस्वामी तुलसीदास जी की बाहुओं में बात व्याधि की गहरी पीड़ा उत्पन्न हुई थी और फोड़े फून्सियों के कारण सारा शरीर वेदना का स्थान बन गया था उसके निवारण हेतु हनुमान जी की वंदना आरंभ की। अंजनीकुमार की कृपा से उनकी सारी व्यथा दूर हो गई यह वही 44पद्यों का हनुमान बाहुक नामक प्रसिद्ध स्तोत्र है।
गोस्वामी तुलसीदास जी की बाहुओं में बात व्याधि की गहरी पीड़ा उत्पन्न हुई थी और फोड़े फून्सियों के कारण सारा शरीर वेदना का स्थान बन गया था उसके निवारण हेतु हनुमान जी की वंदना आरंभ की। अंजनीकुमार की कृपा से उनकी सारी व्यथा दूर हो गई यह वही 44पद्यों का हनुमान बाहुक नामक प्रसिद्ध स्तोत्र है।
हनुमान बाहुक, गोस्वामी तुलसीदास जी की बाहुओं में बात व्याधि की गहरी पीड़ा उत्पन्न हुई थी और फोड़े फून्सियों के कारण सारा शरीर वेदना का स्थान बन गया था उसके निवारण हेतु हनुमान जी की वंदना आरंभ की। अंजनीकुमार की कृपा से उनकी सारी व्यथा दूर हो गई यह वही 44पद्यों का हनुमान बाहुक नामक प्रसिद्ध स्तोत्र है।
6. भगवन्नाम की महिमा
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