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Panno se Parde tak , Popcorn / Pages by Prachi
Panno se Parde tak , Popcorn / Pages by Prachi
Author: Prachi
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© Prachi
Description
अलार्म सुने हैं, बस...ये वही है। लालटेन की तरह आप मेरे इस पॉडकास्ट को कभी भी जलाएं ,आपको यहां पर मिलेगा बहुत कुछ। यह कुछ भी हो सकता है। किस्सा,कहानी,किताब और सिनेमा के साथ कलाकार। सिर्फ 2 मिनट में सुनो.. थोड़ा सुन तो लो....😊
21 Episodes
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क्यों नहीं चलने देते तुम मुझे? मैं चलते-चलते जैसे चीखने लगती हूं, क्यों इतना मुश्किल है एक लड़की का अकेले घर से निकल कर चल पाना? मैं ये आजादी लिए बिना नहीं जाऊंगी। ये सारे सवाल हर उस लड़की के जीवन का हिस्सा है, जो समाज की घुटन से आजाद होने का प्रयास कर रही है। उन सभी की आवाज को अपनी लेखनी के जरिए बयां किया है अनुराधा बेनीवाल अपनी किताब आजादी मेरा ब्रांड के जरिए। अनुराधा बेनीवाल ने अपनी इस किताब में सिर्फ अकेली लड़की के यूरोप के 13 देशों की घूमने की कहानी बयां नहीं की है, बल्कि वो ये बता रही हैं कि एक लड़की धरती पर नहीं रहती, बल्कि समाज में रहती हैं। ऐसा समाज जो शहर हो या गांव एक लड़की का अकेले सड़क पर चलना बर्दाश्त नहीं सकता। यूरोप घूमते हुए जिस तरह अनुराधा ने महिलाओं को आजादी और सम्मान का आईना दिखाया है, वह उनकी सरल लिखावट और सोच में साफ झलकता है। अपनी किताब के जरिए लेखिका समाज को बदलने की चिंगारी नहीं जला रही हैं, बल्कि हर महिला को घुमक्कड़ी करना सीखा रही हैं। वो बता रही हैं कि अगर तुम लड़की हो, तो अपने गांव में घूमो, गांव में घूम नहीं पा रही, तो शहर में घूमो, इस समाज में नहीं घूम पा रही हो, तो अपनी सोच की दुनिया में घूमो, लेकिन घूमो जरूर, क्योंकि यही असली आजादी है, विचारों की आजादी, खुद से मिलने की आजादी, बेपरवाह होने की आजादी। आजादी आजाद होने की। खुल कर चलने की। खुली हवा में सांस लेने की आजादी। अब आप इतना, तो समझ गए होंगे कि ये किताब सिर्फ एक ट्रैवल गाइड नहीं है, बल्कि ये किताब असल मायने में बताती है कि तू छोरी नहीं है, तू आजाद है और उड़ सकती है। फिलहाल, इस किताब को पढ़ने के लिए यही सबसे बड़ी वजह है कि ये किताब नहीं एक खत है, आजाद देश की आजाद लड़कियों के लिए।
ट्रेन हो या बस, जब भी वो रास्ते पर होती हैं, अपने पंख खोलकर वो उड़ रही होती हैं। अपने बैग से हेड फोन निकाल कर इंस्टाग्राम पर रील घुमाकर, चिप्स की पैकेट की कर्कश आवाज के साथ मुस्कुराती हुई। खिड़की वाली सीट..
गीतांजलि की किताब रेत समाधि
हाथ में पकड़ी हुई रेत मुट्ठी बंद करने पर हाथ से फिसल जाती है, लेकिन गीतांजलि श्री का पांचवां उपन्यास 'रेत समाधि', केवल कुछ पन्ने पलटने के बाद से आपको अंदरूनी तौर पर जकड़ लेती है। 80 साल की चंद्रप्रभा के चंद्रा बनने के सफर की गाड़ी इस उपन्यास में न केवल बॉर्डर पार करती है, बल्कि आपके मन को भी एक ऐसे सफर पर ले जाती है, जहां हर पन्ने के साथ नई कहानी जन्म देती है, जहां पर दीवारें, पेड़, तितलियां, दरवाजा और यहां तक रेत और हवा भी जीवित होकर संवाद करने लगते हैं। आप इस उपन्यास की अहमियत इसी बात से समझ सकते हैं कि इसके अंग्रेजी ट्रांसलेशन ' टूम ऑफ सेंड को वर्ष 2022 में बुकर प्राइज से सम्मानित किया जा चुका है। इस उपन्यास का हर वाक्य शब्दों के भावों के साथ आपको विभाजन की त्रासदी, परिवार और अलगाव के साथ एक चंद्रप्रभा के जीवन के पथरीले रास्तों की चुभन महसूस कराता है। बड़ी खूबसूरती से इसमें बताया गया है कि प्यार अधूरा होता है, लेकिन पुराना नहीं। रेत समाधि यह बताती है कि बढ़ती उम्र फिर से जीने की ललक को छीन नहीं सकती है। कहते हैं कि कोई भी उपन्यास अपने अंत के साथ पाठक के लिए एक ऐसी दुनिया का भी अंत कर देता है, जहां पर वह प्रेम, विरोध और जीवन के सारे भावों से होते हुए खुद को पाने की उड़ान तक पहुंचता है और रेत समाधि इस यात्रा को सफल बनाती है।
हिंदी को करीब से तो कुछ अहसास जाग जाते हैं कि
हिंदी वाली वाइब अंग्रेजी में कहां
हैलो जब आदर से बन जाता है नमस्कार और प्रणाम
अंकल हिंदी में चाचा और मामा से बांधते हैं रिश्तों की डोर
ड्रीम के आगे सपने भी अपने लगते हैं
कुछ पाने की ख्वाहिश अचीवमेंट में कहां झलतकते हैं
इसलिए तो हम कहते हैं कि हिंदी वाली वाइब अंग्रेजी में कहां
!
Amitabh ne Jaya se Bola kaam nhi kerna, akhir is per Jaya ne kya Dia jawab?
हम महिलाओं की जिंदगी ऐसी ही होती है, जिसे हम सभी पकड़ कर रखना चाहते हैं। कभी अपनी चोटी की उलझनों में, तो कभी अपने बैग के कई खानों के बीच की जगह में ठुस कर। हम उड़ना चो चाहते हैं लेकिन हाथ में घड़ी बांधकर वक्त पर वक्त देखते रहते हैं और कहते हैं कि वक्त ही नहीं है हमारे पास। एक तरऱ हाथों की उगलियां लैपटॅाप पर टिप टिप करती हैं, तो दूसरे ही पल कलाई कढ़ाई में स्वाद की लड़ाई लढ़ती रहती है। क्या आपको नहीं लगता कि कुछ देर ठहर कर सोचा जाए, जीवन की घुटन, दर्द,मान-अपनान के साथ सारे सुख और दुखों को पलके झपका कर जाने दिया जाए। जब भी कोई उलझन हो या मन उदास हो, या फिर दिमाग में टेंशन का पारा परवान पर हो, तो आंख बंद करके लंबी सांस लेकर खुद से ये बोला जाए...ये वक्त गुजर गया, अब इसकी सिलवटों से माथे को आजाद किया जाए...जाने दिया जाए...
इसके बदले क्यों न खुद को खुश रखने के लिए किसी दूसरे शहर से बेहतर घर के पास वाले गार्डन में जाकर घास के बीच बैठा जाए। क्यों न बस पकड़ कर किसी बीच पर जाकर लहरों के शोर में सुकून खोजा जाए। जहां पर चटाई वाले भैया को 100 रुपए देकर बीच के पास चटाई पर बैठ मूंगफली की गर्माहट का मजा लिया जाए। क्यों न आंख बंद करके सुकून से रेत की गोद में सोया जाए।जब आंख खुले तो आसमान के खाली पन में खुद के सपनों को पिरोया जाए। वो कहते हैं न खुद को खुश रखने के लिए किसी योजना नहीं सुकून जरूर है, जो कि आपके भीतर मुफ्त में छिपी होती है। बस,इसकी खोज कीजिए और खुद को पैम्पर के लिए एक प्याली चाय के साथ पुराने गानों की महफिल सजा दीजिए।
Dear तकनीक,कैसे तकनीकी हर उस मां-बेटी के लिए चमत्कार बन कर आयीं है, जो किसी न किसी वजह से एक दूसरे से दूर हैं। जो कभी मां की दुआ बन कर बेटी को दुलार देती है, तो कभी एक बेटी के लिए मां की दवा बन जाती है। तकनीकी दुनिया के हर उस माध्यम को मां-बेटी की तरफ से ढेर सारा धन्यवाद।
कोरोना महामारी में ये गाना देगा हौसला। रुक जाना नहीं तू कहीं हार के।
Bachpan ki holi ka kissa
किशोर कुमार स्पेशल। दा की याद में उनका दिलचस्प किस्सा।
लता मंगेशकर परिवार के लिए कर चुकी हैं 8 फिल्मों में एक्टिंग। जन्मदिन पर सुनिये ये खास किस्सा।
लोकप्रिय खलनायक गुलशन ग्रोवर के जन्मदिन पर सुनते हैं दिलचस्प किस्सा। बैड मैन का निराला अंदाज।
हिंदी दिवस के मौके पर सुनिए गूगल की ज्ञान की पोटली से लोकप्रिय कविताओं की फेहरिस्त।
कौन थी हिंदी सिनेमा की पहली सुपरहिट एक्ट्रेस?किसने मचा दी थी एड की दुनिया में हलचल? अशोक कुमार की हीरोइन से सिनेमा की पहली लोकप्रिय मां तक। यहां सुनिए 2 मिनट में ये दिलचस्प किस्सा।
उत्तर प्रदेश, बिहार,झारखंड और पश्चिम बंगाल में बेटों की लंबी आयु के लिए किया जाता है जितिया व्रत। इस व्रत का जन्म हुआ है, महाभारत और कृष्ण से। 2 मिनट में सुनिए।
क्या आप जानते हैं कि गिलहरी के शरीर पर दिखने वाली दो लंबी लाइन,भगवान राम के उंगलियों के निशान हैं। कैसे ? सुनिए ये दिलचस्प किस्सा।
2 मिनट साहित्य की यात्रा में इस बार क्रांतिकारी साहित्यकार कृष्णा सोबती के साहित्य की खनक सुनेंगे.
hindi book review / Diwar me ek khidki rehti hai/ Vinod kumar shukla
Popcorn with Actor Fahmaan khan ( एक्टर फ़हमान के साथ करियर, निजी जिंदगी और करियर ग्राफ पर बातचीत)























