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Padhaku Nitin
Padhaku Nitin
Author: Aaj Tak Radio
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Description
Padhaku Nitin is a casual and long conversation-based podcast where Aaj Tak Radio host Nitin talks to experts and discuss a wide range of topics like history, war, politics, policy, ideologies, cinema, travelling, sports, nature and everything that is interesting. A single episode of the show can be as enriching as reading four books. As we say in the podcast,Chaar kitaabe padhne jitna gyaan milega Padhaku Nitin mein.
कब कोई हक़ीक़त से मिथक बन जाता है? क्यों कोई कहानी सदियाँ पार करके हमारे सिरहाने आ बैठती है? कुछ नाम तो इंसानों की कलेक्टिव मेमोरी का हमेशा के लिए हिस्सा बन जाते हैं लेकिन पूरी की पूरी सभ्यता चुपचाप कैसे मिट जाती है?
भाषा के ग्रामर से मिले कब, क्यों, कैसे, कहां, किसने ऐसे शब्द हैं जो सेंटेंस में जुड़ जाएँ तो सवाल पैदा करते हैं और सवालों के बारे में आइंस्टीन ने कहा था- The important thing is not to stop questioning. पढ़ाकू नितिन ऐसा ही पॉडकास्ट है जिसमें किसी टॉपिक का रेशा रेशा खुलने तक हम सवाल पूछने से थकते नहीं.
कब कोई हक़ीक़त से मिथक बन जाता है? क्यों कोई कहानी सदियाँ पार करके हमारे सिरहाने आ बैठती है? कुछ नाम तो इंसानों की कलेक्टिव मेमोरी का हमेशा के लिए हिस्सा बन जाते हैं लेकिन पूरी की पूरी सभ्यता चुपचाप कैसे मिट जाती है?
भाषा के ग्रामर से मिले कब, क्यों, कैसे, कहां, किसने ऐसे शब्द हैं जो सेंटेंस में जुड़ जाएँ तो सवाल पैदा करते हैं और सवालों के बारे में आइंस्टीन ने कहा था- The important thing is not to stop questioning. पढ़ाकू नितिन ऐसा ही पॉडकास्ट है जिसमें किसी टॉपिक का रेशा रेशा खुलने तक हम सवाल पूछने से थकते नहीं.
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फरवरी 2026 आ चुका है. साथ ही आ चुका है इस साल का बजट भी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कल लोकसभा में Union Budget 2026 पेश किया. 83 मिनट का भाषण दिया. कई ऐलान किए. और अब हर साल की तरह बजट पर प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं. सरकार बजट के फायदे गिना रही है. विपक्ष नुकसान. प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि इस साल बजट हमारे युवाओं के सपनों का बिंब है और नेता प्रतिपक्ष कह रहे हैं कि युवा और किसान परेशान है और बजट ज़रूरी मुद्दों को एड्रेस नहीं कर रहा. Experts समझाने में जुटे हैं कि भारी Economic Terms में लबरेज़ बजट. आपके हमारे लिए क्या समेटे हुए है? तो चलिए हम भी एक ऐसे ही Expert की शरण लेते हैं जो हमको समझाएं कि क्या वाकई इस साल का बजट थोड़ा बोरिंग है, जैसा कि सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं हैं. या फिर कुछ ऐसे Undertones समेटे हुए है जो फिलहाल हमें समझ नहीं आ रहे लेकिन समझना ज़रूरी है. हमारे साथ है हमारे पुराने मेहमान Economist Arun Kumar जी. Yale, Columbia University जैसी Universities में Lectures दे चुके हैं. दुनियाभर में बुलाए जाते हैं. JNU में 30 साल इकॉनमिक्स पढ़ा चुके हैं. खासियत ये है इनकी कि आसान भाषा में सब समझाकर चौंका देते हैं. गुरुवार आने वाला पढ़ाकू नितिन का एपिसोड इस बार आपके लिए सोमवार ही ले आए हैं. पूरा देखिएगा और प्यार दीजिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: सूरज सिंह
पढ़ाकू नितिन में ऐसा कम होता है जब हम स्टूडियो से बाहर निकलते हों. लेकिन इस बार हम सिर्फ़ स्टूडियो से ही नहीं शहर, यहां तक की राज्य से भी बाहर आ गए हैं. पढ़ाकू नितिन की टीम पहुंच गई है पंजाब के जालंधर. इस एपिसोड में हम घूमे जालंधर की मशहूर Lovely Professional University में. 150 से ज़्यादा कोर्सेज़, 35 हज़ार से ज़्यादा स्टूडेंट्स—Agriculture, Robotics, Management, Technology, Liberal Arts, Law और न जाने कितने ऐसे कोर्सेज़। दिमाग में सवाल आया कि आख़िर इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी चलती कैसे है? स्कूली शिक्षा की खामियों की बात तो हम अक्सर सुनते रहते हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी लेवल पर ये मामला कैसा है? यूनिवर्सिटीज़ करोड़ों के प्लेसमेंट्स कैसे करवाती हैं? एक वर्ल्ड-क्लास यूनिवर्सिटी कैसी होती है? क्या भारत में कोई वर्ल्ड-क्लास यूनिवर्सिटी है? और ये भी कि जब एक ही कैंपस में 40 से ज़्यादा देशों के स्टूडेंट्स पढ़ते हों, अलग-अलग राज्यों से, अलग-अलग पृष्ठभूमि से लोग आते हों—तो इतना सब कुछ मैनेज कैसे होता है? ये सारे सवाल हमने पूछे अपनी LPU की Pro-VC, Mrs. Rashmi Mittal से। प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: रोहन भारती
जीने का हक़ सभी को है, ये तो हमारा संविधान भी कहता है. लेकिन बार-बार इसका उल्लंघन होना हमें सवाल पूछने मजबूर करता है. कुछ ही दिन पहले, नोएडा के सोफ़्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता एक हादसे का शिकार हो गए, ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में उनकी कार पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी. और ये सिर्फ़ एक घटना नहीं, रिकॉर्ड्स बताते हैं कि 2004 से 2015 के बीच क़रीब ऐसे 40 लाख मामले देखने को मिले हैं. ये आंकड़े हालात का अंदाज़ा तो देते हैं, लेकिन असलियत इससे कहीं ज़्यादा गहरी है. ‘पढ़ाकू नितिन’ के इस एपिसोड में हमारे मेहमान हैं केटी रवींद्रन, School of Planning and Architecture में Urban Design Department के डीन. उनसे हमने पूछा कि क्या हम अपने शहरों को अब तक Flawless क्यों नहीं बना पाए? क्यों Bangalore का Traffic अब भी बदनाम है? क्यों Monsoon आते ही बार बार ये डर सताता है कि पार्किंग में खड़ी गाड़ी डूब न जाए? पिछले साल Old Rajinder Nagar के Basement का मामला भी आपको याद होगा. तो सोचा क्यों न एक Expert से समझा जाए कि आखिर ये शहर बसाए कैसे जाते हैं? क्या इन्हें बसाते वक्त ऐसे Sustainable Methods के बारे में नहीं सोचा जाता कि Traffic न लगे. जानेंगे Noida, Gurugram, Delhi, Chandigarh, Bangalore, London, New York, Paris किस तरह से Urban Planning के लिहाज़ से शानदार या Flawed हैं. सुनिए पूरा पॉडकास्ट और हां, लाइक शेयर Subscribe करना न भूलिए प्रड्यूस: मानव और माज़ साउंड मिक्सिंग: अमन पाल
न जाने कितनी ही बॉलीवुड फिल्मों के क्लाइमेक्स सीन और न जाने कितने ही भारतीयों के आम जीवन का हिस्सा रही है यह रेल. भारतीय मिडिल क्लास की यादों का एक बड़ा हिस्सा रेलवे से जुड़ा है. लेकिन रेलवे की यात्राओं को रोमांटिसाइज़ करना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी यह समझना भी है कि रेलवे, कई दूसरी सरकारी संस्थाओं की तरह, अव्यवस्था से अछूता नहीं रहा है. रेलवे के मुताबिक, पिछले पांच सालों में खाने से जुड़ी 19,000 से ज़्यादा शिकायतें दर्ज हुई हैं. 2021–22 में शिकायतें करीब 1,000 थीं, 2023–24 में यह संख्या 7,000 के पार पहुंच गई और 2024–25 में 6,000 से ज्यादा हो गई. ये आंकड़े हालात का अंदाज़ा तो देते हैं, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज़्यादा गहरी है. ‘पढ़ाकू नितिन’ के इस एपिसोड में हमारे साथ एक ऐसे व्लॉगर हैं, जो इसी हकीकत को लगातार सामने लाते रहते हैं. वे ट्रेनों में सफर करते हैं, छोटी हो या लंबी दूरी, हर यात्रा में. जहां 14 रुपये की पानी की बोतल 20 में बेची जाती है, वहां सवाल उठाते हैं. महंगा खाना बेचा जाता है, तो शिकायत दर्ज कराते हैं. इस दौरान होने वाली झड़पों को भी वे बेहद सहजता से संभालते हैं. इनका नाम है शाहनवाज़. सोशल मीडिया पर ये “पीटर क्लिप्स” के नाम से मशहूर हैं. आपने इनकी रील्स और वीडियो ज़रूर देखी होंगी. आज देखिए इनका पहला पॉडकास्ट, जहां हमने रेलवे में भ्रष्टाचार, यात्रियों की परेशानियों और उनकी आंखों देखी अव्यवस्थाओं पर खुलकर बातचीत की है. प्रड्यूसर : मानव देव रावत साउंड मिक्सिंग: अमन पाल
Nostalgia किसी Time Machine की तरह होता है न? एक बार हिट किया नहीं कि आप पहुंच जाते हैं एक दूसरे Time-Space में. Music अक्सर इस तरह के Nostalgias के लिए Trigger साबित होता है. जो आपको 2026 में बैठे बैठे भी कई दशकों पहले की यात्रा मिनटों में करवा लाता है. तो चलिए आपको उस दौर में ले चलते हैं, Mid 1990s. जब Indie Pop किसी ठंडी हवा के झोंके की तरह Audience के कानों को कुछ शानदार Earworms दे रहा था. कुछ नए Bands, नए Sounds, नए Styles जो आज भी लोगों को याद हैं. आज हमारे साथ एक ऐसे ही Artist हैं जिन्होंने शुरूआत Popularity Indie Pop के दौर में पाई लेकिन फिर Bollywood में आकर भी खूब धूम मचाई. ये वही आर्टिस्ट हैं, जिन्होंने जो छुआ उसे सोना बना दिया. चाहे Silk Route के गाने हों, Rockstar की Album या Singles. इन्होंने कभी निराश नहीं किया. हमारे साथ हैं Playback Singer और Musician Mohit Chauhan. जिनका नया गाना सिर्फ़ सुरीला ही नहीं है, Social Cause के लिए Contributor भी है. पॉडकास्ट पूरा सुनिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
दिसंबर सुनते ही दिमाग में क्या आता है? साल का आखिरी महीना. मगर पिछले एक ऐसी किताब आई जिसे पढ़कर, दिसंबर एक और कारण से याद आएगा. कारण है राम जन्मभूमि विवाद का. जब आप इस विवाद की टाइमलाइन देखेंगे तो आपको पैटर्न नज़र आएगा कि इस विवाद से जुड़े लगभग सारे बड़े घटनाक्रम दिसंबर में ही घटे फिर चाहे इस मामले में पहला मुकदमा दर्ज होना हो… या बाबरी मस्जिद का गिरना. और इसी दिसंबर में हम बात करने जा रहे हैं रामजन्मभूमि विवाद पर. वो भी उनसे जो Literally ‘भगवान के वकील’ रहे हैं. हमारे साथ हैं आज दो वकील, अनिरुद्ध शर्मा और श्रीधर पोटराजू. आपको 2019 का रामजन्मभूमि केस याद है न? इस केस में राल लला विराजमान को रिप्रेज़ेंट करने वालों में ये दोनों शामिल थे. इन दोनों ने हाल ही में मिलकर एक किताब लिखी जिसका नाम है Case for Ram. ये किताब दरअसल उस मुकदमे के पीछे की कहानी है. ये किताब सुप्रीम कोर्ट में हुई बहसों को समेटे हुए है. ये किताब समेटे हुए है उन तैयारियों की तफसील जो सुप्रीम कोर्ट में एक केस लड़ने के लिए की जाती है. भयंकर डिटेलिंग के भरा हुई किताब है, उतना ही डीटेल्ड ये पॉडकास्ट भी है. पूरा सुनिएगा
बांग्लादेश. कभी ये नाम सुनकर ऐसा लगता था जैसे कोई ऐसा पड़ोसी है जिसके यहां से आदान प्रदान चलता रहता है. तभी आपके यहां खीर ज़्यादा बनी तो वहां पहुंचा दी, उधर से पराठे ज़्यादा बने तो इधर आ गए. ऐसा नज़दीकी रिश्ता. कारण था बांग्लादेश के बनने में जो सहायता भारत ने की थी. पिछले दो सालों में इसी पड़ोसी ने आंतरिक तौर पर काफ़ी उथल पुथल देखी. बांग्लादेश के राष्ट्रपिता कहे जाने वाले बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की मूर्तियां वहीं के लोगों ने गिराई. उनकी बेटी और बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को वहां से तुरंत भागना पड़ा. भारत ने उन्हें अपने यहां शरण भी दी. मगर भारत-बांग्लादेश का ऐसा रिश्ता आखिर बना कैसे? 1971 में हुआ क्या था? ईस्ट पाकिस्तान से बांग्लादेश तक का सफ़र तय करने में ऐसे कौन कौन से पड़ाव थे जिनके बारे में दुनिया को पता ही नहीं है? और जब ये हो रहा था तो दुनिया भर में क्या घट रहा था? इसी सवाल को Address करती है Iqbal Chand Malhotra और Subroto Chattopadhyay की क़िताब Bangladesh: Humiliation, Carnage, Liberation, Chaos. और किताब के दोनों लेखक हैं हमारे मेहमान. मिलेंगे सारे सवालों के जवाब. सुनिएगा पूरा एपिसोड प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: रोहन भारती
कश्मीर के इतिहास से आप और हम अनभिज्ञ तो नहीं हैं। हम उसकी ख़ूबसूरती, उसके कल्चर से जिस तरह वाक़िफ़ हैं, उसके सबसे बड़े दुर्भाग्य से भी उसी तरह वाक़िफ़ हैं। और उसका दुर्भाग्य यह है कि वह पाकिस्तान की शाह-रग है। उसका प्लेग्राउंड है। वह प्लेग्राउंड जहाँ पाकिस्तान अपनी उन ख़ुराफ़ातों को अंजाम देता है, जिससे भारत को प्रेशराइज़ किया जा सके। लिहाज़ा, कश्मीर से आने वाली छोटी-से-छोटी ख़बर भी एक प्रायोरिटी बन जाती है। हाल ही में हमारे हाथ एक किताब लगी. यह किताब कश्मीर की बिगड़ी हुई तहरीर की कहानी सुनाती है। कहानी सुनाती है उस जिहाद गेम की, जो पाकिस्तानी इंटेलिजेंस एजेंसी ISI कई सालों तक कश्मीर में खेलती रही है। यह किताब आपको ले चलती है पाकिस्तान के डार्क वॉर के बीचों-बीच। किताब का नाम है The Jihad Game और लेखक हैं Abhinav Pandya। अभिनव पांडेय कश्मीर में कई वर्षों तक रहकर काउंटर-इंसर्जेंसी पर ग्राउंड रिसर्च कर चुके हैं। जम्मू-कश्मीर में टेररिज़्म और काउंटर टेररिज़्म पर ही उनकी Ph.D. भी है। पढ़ाकू नितिन के एपिसोड में हम उनकी इसी किताब पर बात करेंगे। समझेंगे कि आखिर पाकिस्तान किस तरह लश्कर, जैश और हिज़्बुल जैसे संगठनों के ज़रिए सालों-साल कश्मीर में ऑपरेट करता रहा है? और सबसे अहम — यह भी समझेंगे कि किस तरह ये संगठन कश्मीर के यूथ को Radicalize करते हैं? प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
बांग्लादेश. कभी ये नाम सुनकर ऐसा लगता था जैसे कोई ऐसा पड़ोसी है जिसके यहां से आदान प्रदान चलता रहता है. तभी आपके यहां खीर ज़्यादा बनी तो वहां पहुंचा दी, उधर से पराठे ज़्यादा बने तो इधर आ गए. ऐसा नज़दीकी रिश्ता. कारण था बांग्लादेश के बनने में जो सहायता भारत ने की थी. पिछले दो सालों में इसी पड़ोसी ने आंतरिक तौर पर काफ़ी उथल पुथल देखी. बांग्लादेश के राष्ट्रपिता कहे जाने वाले बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की मूर्तियां वहीं के लोगों ने गिराई. उनकी बेटी और बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को वहां से तुरंत भागना पड़ा. भारत ने उन्हें अपने यहां शरण भी दी. मगर भारत-बांग्लादेश का ऐसा रिश्ता आखिर बना कैसे? 1971 में हुआ क्या था? ईस्ट पाकिस्तान से बांग्लादेश तक का सफ़र तय करने में ऐसे कौन कौन से पड़ाव थे जिनके बारे में दुनिया को पता ही नहीं है? और जब ये हो रहा था तो दुनिया भर में क्या घट रहा था? इसी सवाल को Address करती है Iqbal Chand Malhotra और Subroto Chattopadhyay की क़िताब Bangladesh: Humiliation, Carnage, Liberation, Chaos. और किताब के दोनों लेखक हैं हमारे मेहमान. मिलेंगे सारे सवालों के जवाब. सुनिएगा पूरा एपिसोड. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
14 December 2025. Australia ने पिछले 3 दशकों का सबसे वीभत्स और सबसे बड़ा आतंकी हमला देखा. जब Sydney के Bondi Beach पर दो बंदूकधारी ताबड़तोड़ गोलीबारी करते दिखे. अफ़रा तफ़री मची 15 लोगों ने अपनी जान गंवाई. 30 से ज़्यादा लोग घायल हुए. 10 साल की छोटी बच्ची से लेकर 41 साल तक के Rabbi तक इसमें मारे गए. जब जांच हुई तो मालूम हुआ कि हमलावरों के तार IS से जुड़े थे. कयास लगाए गए कि उन्होंने हमला करने के लिए ये दिन इसलिए चुना. ताकि वो Hanukkah मना रहे Jewish परिवारों को मारकर एक Messaging दे सकें. कुछ लोगों ने इस हमले को Anti-Semitic कहा.. कुछ ने इसमें एक Geopolitical एंगल ढूंढते हुए कहा कि देखो अभी तो Australia Palestine को मान्यता देने वाला था. और अब उनके यहां यहूदियों पर इतना बड़ा हमला हुआ.. ट्रंप से लेकर नेतन्याहू तक ने इस हमले की निंदा की और इसे Australia में उठते Anti-Semitic Sentiment का Indicator बताया. लेकिन सवाल उठता है कि ये Anti Semitism है क्या? हम इसे सीधा Anti-Jew क्यों नहीं कह देते? आखिर Islamic State को Jews से क्या दिक्कत है? Jews दरअसल मुसलमानों और Christians से अलग होते हुए भी एक जैसे क्यों है? Jews के Origins से लेकर. Holocaust. फिर Israel का बनना और फिर World Order का बदलना सब समझेंगे आज. इस सबमें Jews का Direct Indirect Role क्या रहा ये भी समझेंगे ? Bondi Beach पर हुए इस हमले को तो समझेंगे ही मगर बात थोड़ी इतिहास पर ज़्यादा करेंगे. Padhaku Nitin World Affairs के इस एपिसोड में यही सब समझने के लिए हमने दावत दी है कलकत्ता की ऐतिहासिक Presidency यूनिवर्सिटी में Holocaust History पढ़ाने वाले, Anti Semitism के मुद्दे पर Expertise रखने वाले Professor नवरस आफ़रीदी को. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: रोहन भारती
एक दौर में मिडिल क्लास का ख़्वाब थी हवाई यात्रा. अक्सर एयरपोर्ट पर खींची गई तस्वीरें-वीडियोज़ अपने प्रियजनों को भेजने के लिए ली जाती थीं. ये बताने के लिए कि लीजिए हमने ये ज़मीन छोड़कर परवाज़ ले ली है. बॉलीवुड का भी इसमें बड़ा योगदान था. अक्सर हीरो हीरोइन को वस्ल का लम्हा एयरपोर्ट के आंगन में ही नसीब होता था. एयरपोर्ट पर खींचे गए फोटोज़ वीडियोज़ तो आजकल वायरल भी हो रहे हैं. लेकिन इन फोटोज़ में भाव सेलिब्रेशन का नहीं बल्कि असंतोष, नाराज़गी और मुख्यत: निराशा का है. वजह है देश की सबसे बड़ी Airlines में से एक, IndiGo का Crisis का होना. मुमकिन है आपने भी ख़बरें को देखी ही होंगी और ऐसी वीडियोज़ भी. लेकिन ये मेरा दावा है कि ऐसा पॉडकास्ट नहीं देखा होगा जिसमें इतनी सरल हिंदी में आपको इस Crisis से जुड़े जटिल सवालों के सरलतम जवाब मिले हों. तो सोच क्या रहे हैं, देख डालिए पढ़ाकू नितिन का ये एपिसोड जहां हमारे मेहमान हैं सिविल एविएशन एक्सपर्ट और एक्स पायलट हर्ष वर्धन. जिनसे हमने समझा अचानक इतनी बड़ी Airline इतनी बुरी तरह फेल क्यों होती दिखी? क्या Possible कारण हैं? DGCA की ओर से, Airline की ओर से? Infrastructural दिक्कत है या Operational? इसी बहाने झांकेगे कि Indian Civil Aviation की दुनिया अंदर से दिखती कैसी है? प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
कल्पना कीजिए, साल 1970 का दशक। इमरजेंसी का दौर। एक निडर पत्रकार बेखौफ होकर सरकार के खिलाफ आग उगलते लेख लिख रहा है। जब ऊपर से दबाव इतना बढ़ गया कि नौकरी छोड़नी पड़ी, तो उसने हार नहीं मानी। सीधे पहुंच गया जयप्रकाश नारायण के पास, जिन्होंने उस वक्त इंदिरा गांधी की कुर्सी हिला रखी थी। जेपी ने उसे सलाह दी, “कुछ ऐसा करो कि रिटायर हो रहे हमारे सैनिकों को सम्मान के साथ रोजगार मिले।” बस इसी एक सलाह से 1974 में जन्म हुआ एक छोटी-सी सिक्योरिटी कंपनी का, नाम रखा SIS, यानी Security and Intelligence Services (India)। आज, 50 साल बाद वही SIS: - भारत और ऑस्ट्रेलिया की नंबर-1 सिक्योरिटी सर्विसेज कंपनी - न्यूज़ीलैंड में तीसरे और सिंगापुर में पांचवें नंबर पर - NSE में लिस्टेड - 3 लाख से ज्यादा कर्मचारी, यानी TCS, Infosys और Reliance के ठीक बाद चौथे नंबर पर - भारत की सबसे बड़ी एम्प्लॉयर आपने कभी न कभी किसी मॉल, सोसाइटी या ऑफिस के गेट पर “SIS” का बैज लगाए गार्ड को जरूर देखा होगा। लेकिन हैरानी की बात ये है कि TCS, Infosys, Reliance तो हर कोई जानता है, पर SIS के बारे में हममें से ज्यादातर लोग आज भी अनजान हैं। इस गुमनाम दिग्गज की पूरी कहानी अब एक किताब में आ गई है, किताब का नाम है The SIS Story और लेखक हैं प्रिंस मैथ्यू थॉमस. यही प्रिंस थॉमस, पढ़ाकू नितिन के इस एपिसोड में हमारे मेहमान हैं. सुनिए पूरा पॉडकास्ट प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
जब भी मैं कोई फिल्म देखता हूँ, तो एक्टिंग के बारे में एक बात बार-बार समझ में आती है, कि असल खेल तो सही तरीके से रिएक्ट करने का होता है। हैरानी की बात है कि जियोपॉलिटिक्स को फॉलो करते वक्त भी बिलकुल वैसा ही लगता है, सब कुछ इसी पर टिका है कि आप सामने वाली स्थिति पर सही ढंग से रिएक्ट करें। एक देश दूसरे पर टैरिफ थोपकर दबाव बनाता है, दूसरा देश उसी हालत में डिप्लोमैटिकली रिएक्ट करता है, कुछ डील्स फाइनल करता है, बस यही जियोपॉलिटिक्स है। इस हफ्ते जियोपॉलिटिक्स के मैदान में दो बड़े-बड़े इवेंट हुए। पहला, 30 नवंबर को फ्लोरिडा में यूक्रेन पीस डील को लेकर अमेरिका और यूक्रेन के प्रतिनिधि आपस में मिले। दूसरा बड़ा इवेंट है राष्ट्रपति पुतिन का भारत दौरा। 2022 में यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद से यह पुतिन की पहली भारत यात्रा है। इसका महत्व तो अपने आप में बहुत बड़ा है। लेकिन सवाल यह है कि यह महत्व कितना बड़ा है? किस स्तर का है? यूक्रेन की शांति वार्ता को लेकर इस वक्त क्या-क्या बातें चल रही हैं? क्या भारत इस मुलाकात के जरिए दुनिया को और खास तौर पर अमेरिका को कोई खास संदेश देना चाहता है? इन सारे एंग्ल्स को हम डीकोड करेंगे, एक-एक करके सारे सवाल पूछेंगे प्रोफेसर राजन कुमार से। रूस और सेंट्रल एशियन स्टडीज के बड़े जानकार हैं, जेएनयू में पढ़ाते हैं। पहले भी हमारे शो पर आ चुके हैं और पिछली बार जब आए थे तो आप लोगों ने उस एपिसोड को खूब सारा प्यार दिया था। प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
21 नवंबर 2025 की दोपहर दुबई के मकतूम एयरपोर्ट से कुछ ख़बरें-विज़ुअल्स आए जिन्होंने भारतीयों का ध्यान ख़ींचा. ख़बर थी दुबई के एयरशो के दौरान हुए एक भारतीय फाइटर प्लेन तेजस के क्रैश होने की. तुरंत उभरी चिंता, दुख में तब बदली जब ये मालूम हुआ कि पायलट विंग कमांडर नमांश स्याल ने इस क्रैश में अपनी जान भी गंवाई. लेकिन बात सिर्फ़ दुख की नहीं थी, चिंता के विषय और भी हैं. क्योंकि न सिर्फ़ तेजस Indian Air Force का Indispensable हिस्सा है, बल्कि हम इस प्लेन को Export करने की दिशा में भी तेज़ी से काम कर रहे थे. तो Padhaku Nitin World Affairs के इस एपिसोड में हमने बात शुरू की इसी Crash से. समझा कि आखिर भारत दुबई के इस एयरशो में करने क्या गया था? समझा कि तेजस क्रैश की जांच किस तरह से आगे बढ़ रही है? कौन जांच करेगा? कैसे करेगा? और ये भी कि आखिर कोई प्लेन क्रैश क्यों होता है? और ये भी कि भारतीय जेट के क्रैश होने पर पाकिस्तान में मीम्स क्यों बन रहे हैं? हमारे मेहमान हैं सीनियर डिफेंस जर्नलिस्ट संदीप उन्नीथन. इन्हें आप जानते ही हैं. एपिसोड पूरा सुनिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावतसाउंड मिक्स: रोहन भारती
‘पढ़ाकू नितिन’ के इस एपिसोड में हम किताबी कीड़ों से हटकर एक असली घुमक्कड़ से मिल रहे हैं, जो खुद को टूरिस्ट नहीं, यात्री कहते हैं. इस एपिसोड में हमारे साथ हैं साइक्लिस्ट और घुमक्कड़ भरत चंद ठाकुर. इन्होंने साइकिल से श्रीलंका को नाप डाला, दिल्ली से मुंबई तक सैर की, दुनिया के सबसे ऊंचे हाईवे में से एक पामीर हाईवे होते हुए ताजिकिस्तान को पार किया, भूटान को साइकिल पर घूम डाला और मनाली-लेह-लद्दाख भी हो आए. और सबसे मज़े की बात ये है कि अपनी साइक्लिंग की शुरुआत इन्होंने अपने बेटे की साइकिल से की थी, वो साइकिल जो विराट कोहली ने अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने पर उनके बेटे उन्मुक्त चंद को गिफ्ट की थी! जी हां, ये सज्जन न सिर्फ़ यात्री और टीचर हैं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के युवा सितारे उन्मुक्त चंद के पिता भी हैं. बस पॉडकास्ट पूरा देखिएगा और Aajtak Radio को Subscribe करना न भूलिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्सिंग: सूरज सिंह
इस बिहार चुनाव ने न जाने कितनों को चौंकाया! हुआ यूं कि Exit Polls के रुझानों में जो हवा, महागठबंधन के पक्ष में बन रही थी. वो असली नतीज़ों से आते ही हवा हो गई. जीत हुई NDA की और बिहार के नए सीएम बने, बिहार के पुराने सीएम नीतीश कुमार. लेकिन Exit Polls के आने से भी पहले से एक आवाज़ थी, जिसने नतीजों की सटीक भविष्यवाणी कर दी थी. ये आवाज़ थी 1988 से चुनावों को देख समझ और ओढ़-बिछा रहे सीनियर जर्नलिस्ट राजदीप सरदेसाई की. आपने उन्हें टीवी और सोशल मीडिया पर खूब देखा होगा, लेकिन इस बात का वादा है कि इस पॉडकास्ट में आपको वो एक नए अंदाज़ में ही बात करते नज़र आएंगे. पढ़ाकू नितिन में हमने उनसे पूछा कि जब वो बिहार चुनाव की रिपोर्टिंग के लिए ग्राउंड पर उतरे तो क्या चुन कर लाए? उनसे समझा कि आखिर ऐसा क्या है कि पिछले कुछ सालों से नीतीश कुमार जिसकी गाड़ी में बैठते हैं, वही फर्स्ट आती है? ये भी समझा कि नीतीश के अलावा NDA में मौजूद BJP और LJP का प्रदर्शन किस हद तक चौंकाने वाला रहा? बात सिर्फ़ जीतने वालों पर ही नहीं हुई समझा महागठबंधन के मुखिया तेजस्वी यादव इस बार के चुनाव में क्यों चूके? और ये भी पूछा कि आख़िर Prashant Kishor का भविष्य बिहार की राजनीति में राजदीप को कैसा दिखता है? बहुत मज़ा आएगा. गारंटी है. बस पॉडकास्ट पूरा सुनिएगा प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
भारत ने हाल ही में अपनी राजधानी दिल्ली में एक भयानक विस्फोट देखा। आप सभी ने इसकी खबरें जरूर सुनी-पढ़ी होंगी। इसके मात्र एक-दो दिन बाद पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में भी एक घातक बम धमाका हुआ जिसमें 12 लोग मारे गए और 20 घायल हो गए। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस हमले का जिम्मेदार सीधे काबुल को ठहराया और कहा कि अब अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच जंग सिर्फ डूरंड लाइन तक सीमित नहीं रही। इस हमले का समय भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि ठीक कुछ दिन पहले ही इस्तांबुल में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच शांति वार्ता असफल हो चुकी थी। याद कीजिए, जब अफगान तालिबान के कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी भारत आए थे, उसी दौरान भी खबरें थीं कि पाकिस्तान अफगानिस्तान पर बम बरसा रहा है। तो आज के पढ़ाकू नितिन World Affairs में हमारा पूरा फोकस पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव पर रहेगा। हम समझेंगे कि दोनों इस्लामिक देशों के बीच बॉर्डर पर हालात इतने बिगड़े क्यों हैं? असल विवाद क्या है? हाल ही में अफगानिस्तान ने ईरान के साथ जिस तरह की ट्रेड डील की है, उससे भी पाकिस्तान काफी बौखलाया हुआ है। हम साउथ एशिया में इन दोनों पड़ोसियों के बीच बदलते समीकरण को भी डीकोड करेंगे। और ये भी जानेंगे कि आखिर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस धमाके को भारत से क्यों जोड़ा? चूंकि पूरा मसला बॉर्डर का है, इसलिए हमारे साथ हैं साउथ एशियन यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशंस और खासतौर पर बॉर्डर स्टडीज पढ़ाने वाले प्रोफेसर धनंजय त्रिपाठी। एपिसोड को अंत तक सुनिए और Aajtak Radio को सब्सक्राइब करना न भूलें। प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
असमिया सिंगर और म्यूज़िशियन ज़ुबिन गर्ग की मौत को लेकर जनता के दिल में सिर्फ़ शोक नहीं, क्षोभ भी है. कारण है वो रहस्यमयी हालात जिनमें उनकी मृत्यु हुई और वो Questionable तरीका जिस तरह से उनकी मृत्यु की Investigation की गई. 19 सितंबर 2025 में हुई ज़ुबिन की मौत जहां पहले हादसा लगी, फिर साज़िश और अब इस साज़िश में शामिल हो चुकी हैं कई और परतें. इन्हीं परतों को आज खोलेंगे. समझेंगे कि आखिर Zubeen Garg असम के लिए कौन थे, 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में Exactly हुआ क्या था? क्या कुछ लोग हैं जो इस केस के सॉल्व होने में बाधा बन रहे हैं? वहीं ज़ुबिन जिन्होंने गाया पॉलिटिक्स नोकोरिबा बोन्धू…. उन्हीं की मौत पर राजनीति क्यों हो रही है? इस एपिसोड में हमारे साथ हैं India Today NE को संभालने वाले… साथ ही India Today Magazine के Managing Editor Kaushik Deka.. जिन्होंने न सिर्फ़ अपनी ज़िंदगी के कई साल ज़ुबिन गर्ग के साथ बिताए.. बल्कि वो उन चंद लोगों में से हैं जो ज़ुबिन के जाने के बाद भी लगातार उनके केस पर लिख रहे हैं. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: रोहन भारती
New York City.. अगर आप अमेरिकी Sitcoms के शौकीन रहे हैं तो इस नाम और इसकी लंबी लंबी इमारतों से वाकिफ़ होंगे. इस बड़े से शहर में Times Square से लेकर Wall Street भी है, लेकिन पिछले हफ़्ते ये शहर अपने Mayoral Elections के लिए चर्चाओं में रहा. इसी Election में जीत दर्ज की Indian Filmmaker Mira Nair के बेटे ज़ोहरान ममदानी ने. अब इंडियन जड़ों वाले ममदानी ने न सिर्फ़ अपनी विनिंग स्पीच में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को कोट किया, आखिर में धूम मचाले धूम के संगीत पर झूमे. बल्कि उसी मंच से उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी ललकारा. भारत में उनकी वीडियोज़ खूब वायरल हो रही हैं. उन पर एक एपिसोड हम पहले भी कर चुके हैं. लेकिन इस पॉडकास्ट में बात करेंगे कि जिन मुद्दों पर ज़ोहरान जीत पाए, उन्हें अंजाम तक पहुंचाना कितना Practical है? ट्रंप, ज़ोहरान ममदानी से चिढ़ते क्यों है? और आखिर New York City में पिछले 100 सालों में एक भी Republican क्यों नहीं जीत पाया? हमने पूछे ये सभी सवाल Washington DC में रहने वाले Journalist Rohit Sharma के साथ. पूरा पॉडकास्ट सुनिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: सूरज सिंह
Padhaku Nitin के इस एपिसोड में हमने खोला Bihar Election 2025 की परतों को … समझा कि आखिर बिहार चुनाव 2025 में कौन से मुद्दे सबसे ज़्यादा अहम साबित हो सकते हैं ग्राउंड पर? जनता के लिए क्या है Non-negotiable? आपसी गठबंधन में अंदरखाने क्या Insecurities हैं? तीन बड़े फोर्सेज़ जो नज़र आ रहे हैं, वो कहां कहां मात खा रहे हैं? बात की बिहार के Socio Economic Structure की भी, ताकि मुद्दों को बेहतरी से समझ पाएं और बात की जंगलराज और बाहुबल की राजनीति की भी. बिहार से जोड़े गए दो लोग. पहले, Political Economist Pushpendra और दूसरे India Today Magazine के लिए लिखने वाले और बिहार की राजनीति पर पकड़ रखने वाले Pushyamitra. दोनों ही ग्राउंड पर हैं. लगातार लोगों से मिल रहे हैं, रैलियां देखकर रहे हैं. तो बिहार चुनाव में हमारे संजय तो यहीं हैं. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: सूरज सिंह
























professor तू कितना मादरचोद है रे । मोदी है न अगले 500 साल के vision के साथ, लेकिन तुम गंदी नाली के कीड़े कभी appriciate नहीं करोगे ।
anti Modi podcast. सलाम खतरे में है 😭😭😭😭
साले जिहादियों के दलाल, तेरा भी मकान ले लेंगे और तुझे जेहादियों के साथ रवाना करेंगे अपने देश से ।
propaganda podcast funded by jehadis.
इसमें कोई शक नहीं की हिंदुस्तान हिंदुओ की धरती है ये हिंदू राष्ट्र ही कहलाएगा । तुम खालिस्तानी आतंकवादियो का खालिस्तान या तो canada में बनेगा और या फिर झानूम में ।
अपनी मां को सामने बिठा के उसका nude sketch बना, तब हम मानेंगे तू असली कलाकार है ।🤬
सईद अंसारी एक सच्चे मुसलमान नही बल्कि एक अच्छे इंसान है ।
Modi like challenges, तुम लोग जितना बोलोगे UCC आ नही सकता, UCC उतना ही जल्दी आएगा । मोदी है तो मुमकिन है ।
गुजरात के दंगों पे जितना रोना है रो लो । तुम लोग शुरुआत करोगे तो जवाब तो मिलेगा ही । गजवा ए हिंद का सपना देखोगे तो तुम लोगों को हिंदू मिट्टी में मिला देंगे ।
सूअर के बच्चे आ गया अपनी औकात पर, राहुल गांधी के disqualify होने पे बड़ा दुःख हो रहा है तुझे । कट्टर कटुआ है ना तू इसीलिए ।
JNU की गंदी पैदाइश सारे पॉडकास्ट मुसल्लो पे ही करता रहेगा क्या ।
जो कल फर्श पर था आज वो अर्श पर, जो कल अर्श पर था आज फर्श पर । समय का चक्कर सबसे बलवान । अगले मिनट, अगले घंटे, अगले दिन, अगले साल, अगले दशक और अगली सदी सबका समय बदलता है । नियति का न्याय ।
नीच इंसान तूने गरबा में मुसलमानो की linching की एक तरफा बात करके अपनी घटिया सोच का उदहारण दिया है । भारत माता की जय बोलने में मुसलमानो की जीभ को लकवा मार जाता है । और गरबा में हिन्दू लड़कियों को छेड़ने और फसाने की कुकृति की बात पे पर्दा डाल गया । वाह रे पाखंडी secular वादी ।
कितना घटिया और पाखंडी है तू "देवदत पटनायक" । मुस्लिम, जो की सबसे कट्टर और आतंकी है तूने उसके मजहब को लेके कोई बात नही की अपने podcast में । अगर भय, आतंक और कट्टरता ही तुझ जैसों को अपनी आस्था पर टिपनी करने से रोकने का एक मात्र रास्ता है तो, तो आज के युग में वही बहेतर है ।
कटुओ हरामजादो तुम्हे काटने और मरने के आलावा दूसरा कोई काम नही आता । i wish someday, somebody will hunt you. sooner than later. मेरा दिली तमन्ना है तुम मुसलमानों की गर्दन धड़ से अलग करने की ।
मक्कारो को मक्कारी से मारा जाता है । अगर मैं होता शिवाजी की जगह तो सारे मुसलमानों को नमाज पढ़ते वक्त मारता, क्योंकि मुसलमानों का नमाज का वक्त एक ही होता है और सारे एक ही वक्त पे पड़ते है । हैवानों को खत्म करने के लिए शैतान बनना पड़ता है । शैतान जिंदाबाद ।
i had to marked it listen.
don't make useless podcasts on topic like Nobel winners or so. don't waste one hour of listeners. nobody interested in Nobel prize winners biography.
लोगो को कोई तकलीफ नहीं है, सारी तकलीफ इस भड़वे प्रोफेसर को ही है CAA & NRC की । मुसल्ला है ना, सारी भड़ास यही निकालेगा । This asshole don't make sense at all. can't see what India did for World in corona vaccination, supplies and free food for Afghanistan? and a lot more. his problem is he is a extremest mind Muslim and don't like Modi and current Indian govt.
ये भड़वा (प्यूश बबेले) सिर्फ नेहरू की पैरवी करने आया है । अय्याश नेहरू के सारे पापो पे पानी डाल रहा है अपनी किताब के जरिए । जो की कभी सफल नहीं होगी इसकी कोशिश ।