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Padhaku Nitin
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Padhaku Nitin

Author: Aaj Tak Radio

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Description

Padhaku Nitin is a casual and long conversation-based podcast where Aaj Tak Radio host Nitin talks to experts and discuss a wide range of topics like history, war, politics, policy, ideologies, cinema, travelling, sports, nature and everything that is interesting. A single episode of the show can be as enriching as reading four books. As we say in the podcast,Chaar kitaabe padhne jitna gyaan milega Padhaku Nitin mein.

कब कोई हक़ीक़त से मिथक बन जाता है? क्यों कोई कहानी सदियाँ पार करके हमारे सिरहाने आ बैठती है? कुछ नाम तो इंसानों की कलेक्टिव मेमोरी का हमेशा के लिए हिस्सा बन जाते हैं लेकिन पूरी की पूरी सभ्यता चुपचाप कैसे मिट जाती है?

भाषा के ग्रामर से मिले कब, क्यों, कैसे, कहां, किसने ऐसे शब्द हैं जो सेंटेंस में जुड़ जाएँ तो सवाल पैदा करते हैं और सवालों के बारे में आइंस्टीन ने कहा था- The important thing is not to stop questioning. पढ़ाकू नितिन ऐसा ही पॉडकास्ट है जिसमें किसी टॉपिक का रेशा रेशा खुलने तक हम सवाल पूछने से थकते नहीं.
311 Episodes
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इंसान का Time और Space से एक अजीब रिश्ता है। कभी हम भविष्य में झाँकना चाहते हैं, तो कभी अतीत की उन कहानियों को जानना चाहते हैं, जो वक़्त की परतों में कहीं दफ़्न हो गईं। आसमान में हम भविष्य की संभावनाएँ तलाशते हैं, और ज़मीन के नीचे अपने अतीत के सुराग़!Padhaku Nitin के इस एपिसोड में हम खोलेंगे ज़मीन की परतें और तलाशेंगे भारत के प्राचीन इतिहास से जुड़े कुछ ऐसे सवालों के जवाब, जिन पर आज भी बहस जारी है।हमारे साथ हैं Dr. Sanjay Kumar Manjul, Additional Director General (Archaeology), Archaeological Survey of India (ASI), जिनका दशकों का अनुभव भारत की अलग-अलग Archaeological Sites की खुदाई और प्राचीन सभ्यताओं के अध्ययन से जुड़ा रहा है।करीब तीन साल पहले भी हमारी संजय जी से बातचीत हुई थी। तब चर्चा थी सिनौली की खुदाई की, जहाँ मिले रथों और हथियारों ने प्राचीन भारत के इतिहास को लेकर कई नई बहसों को जन्म दिया था। उस बातचीत में हमने वादा किया था कि अगली बार भारत की दूसरी पुरातात्विक साइट्स पर भी बात करेंगे, जहाँ से इतिहास के कई अनसुलझे सवालों के जवाब मिल सकते हैं।इस बार हम उसी वादे को पूरा करने लौटे हैं!🔎 इस एपिसोड में जानिए:🔸 Harappan Civilization: हड़प्पा सभ्यता की प्रमुख Sites से अब तक क्या मिला है और कौन-से सवाल अभी भी अनसुलझे हैं?🔸 Rakhigarhi: राखीगढ़ी की खुदाई से प्राचीन भारत के इतिहास के बारे में क्या पता चला है? यहाँ अभी क्या खोजा जाना बाकी है?🔸 Dwarka: द्वारका में हुई Archaeological Explorations से क्या संकेत मिले हैं? क्या समुद्र के नीचे छिपे साक्ष्य प्राचीन इतिहास की नई परतें खोल सकते हैं?🔸 Elephanta Caves: एलिफ़ेंटा की गुफ़ाओं का इतिहास क्या है और इनकी कला व वास्तुकला हमें उस दौर के बारे में क्या बताती है?🔸 Golconda: गोलकुंडा के इतिहास और वहाँ मौजूद पुरातात्विक साक्ष्यों से हम क्या जान सकते हैं?🔸 Sinauli Excavation: सिनौली में मिले रथों और हथियारों ने प्राचीन भारत को समझने के हमारे नज़रिये पर क्या असर डाला?🔸 Future of Indian Archaeology: भारत में आने वाले समय में कौन-सी खुदाइयाँ हमारे अतीत को समझने का नज़रिया बदल सकती हैं?संजय जी से बातचीत के दौरान हम यह भी समझने की कोशिश करेंगे कि Archaeologists किसी Site के इतिहास का पता कैसे लगाते हैं, खुदाई में मिले साक्ष्यों की व्याख्या कैसे की जाती है और किन सवालों के जवाब पाने के लिए अभी और Research की ज़रूरत है।संजय जी जल्द ही राखीगढ़ी की Site पर खुदाई के लिए रवाना होने वाले हैं। ऐसे में यह बातचीत और भी दिलचस्प हो जाती है!तो अंत तक बने रहिएगा। पूरा एपिसोड सुनिएगा, क्योंकि भारत के अतीत से जुड़ी कुछ ऐसी बातें सामने आएँगी, जो शायद आपको भी चौंका दें!देखिए, सुनिए और जानिए भारत के प्राचीन इतिहास की अनकही कहानियाँ, सिर्फ़ Padhaku Nitin पर।
इंसान हमेशा से अपने अतीत को जानने के लिए उत्सुक रहा है। हमारी सभ्यताएँ कैसे विकसित हुईं? हमारे पूर्वज कैसे रहते थे? और ज़मीन की परतों में दफ़्न कौन-से ऐसे राज़ हैं, जो भारत के इतिहास को देखने का हमारा नज़रिया बदल सकते हैं?इस बार Padhaku Nitin Podcast में हमारे साथ हैं Archaeological Survey of India (ASI) के Additional Director General (Archaeology), Dr. Sanjay Kumar Manjul। करीब तीन साल पहले संजय जी से हमारी बातचीत सिनौली की खुदाई और वहाँ मिले रथों व हथियारों पर हुई थी। इस बार हम भारत की दूसरी महत्वपूर्ण पुरातात्विक साइट्स की पड़ताल कर रहे हैं।इस एपिसोड में जानिए:🔸 राखीगढ़ी (Rakhigarhi): हड़प्पा सभ्यता की इस महत्वपूर्ण साइट पर अब तक क्या मिला है? कौन-से रहस्य अब भी अनसुलझे हैं?🔸 सिनौली (Sinauli): यहाँ मिले रथों और हथियारों ने प्राचीन भारत के इतिहास को लेकर क्या नई बहसें छेड़ीं?🔸 द्वारका (Dwarka): समुद्र के भीतर और आसपास मिले पुरातात्विक साक्ष्य हमें क्या बताते हैं?🔸 एलिफ़ेंटा की गुफ़ाएँ (Elephanta Caves): इन प्राचीन गुफ़ाओं का इतिहास और इनके निर्माण से जुड़े सवाल क्या हैं?🔸 गोलकुंडा (Golconda): इस ऐतिहासिक क्षेत्र की पुरातात्विक अहमियत क्या है?🔸 ASI की खुदाइयाँ: हाल के वर्षों में भारतीय पुरातत्व में क्या नई खोजें हुई हैं और भविष्य में कौन-सी खुदाइयाँ इतिहास की हमारी समझ को बदल सकती हैं?दशकों के अनुभव और देश की अलग-अलग पुरातात्विक साइट्स पर काम करने वाले डॉ. संजय कुमार मंजुल के साथ इस बातचीत में समझेंगे कि Archaeology यानी पुरातत्व का विज्ञान कैसे काम करता है, किसी खोज से इतिहास के बारे में हमारी धारणाएँ कैसे बदलती हैं और किसी ऐतिहासिक दावे को प्रमाणित करने के लिए किस तरह के साक्ष्यों की ज़रूरत होती है।📌 Padhaku Nitin को Subscribe करें ऐसी ही दिलचस्प बातचीत, इतिहास की अनसुनी कहानियों और दुनिया को समझने वाले नए नज़रियों के लिए।
क्या इंसान को जीने के लिए सिर्फ़ खाना और पानी चाहिए? अगर ऐसा होता, तो न्याय की माँग करते हुए लोग अनशन क्यों करते? भारत में जब भी किसी ने अपने हक़ और इंसाफ़ के लिए आवाज़ उठाई, तो दिल्ली के एक ठिकाने का नाम बार-बार सामने आया — जंतर-मंतर।पिछले तीन दशकों में किसान आंदोलन से लेकर पहलवानों के प्रदर्शन, बेरोज़गार युवाओं की माँगों से लेकर निर्भया को इंसाफ़ दिलाने की लड़ाई तक, जंतर-मंतर ने कई आंदोलनों को आवाज़ दी है। लेकिन आज यही जगह एक नई बहस के केंद्र में है। चर्चा है कि यहाँ प्रदर्शनों की इजाज़त पर रोक लग सकती है।मगर जिस जंतर-मंतर को हम आज विरोध और प्रतिरोध की जगह के तौर पर जानते हैं, उसकी अपनी कहानी क्या है? इसे किसने बनवाया? इसका नाम जंतर-मंतर क्यों पड़ा? और आख़िर यह है क्या — मंदिर, किला या कोई ऐसी इमारत, जिसका असली मक़सद हम भूल चुके हैं?इस एपिसोड में समझेंगे जंतर-मंतर का इतिहास, विज्ञान से उसका हैरतअंगेज़ रिश्ता और उन इमारतों की कहानी, जो इससे प्रेरित होकर बनाई गईं। जानेंगे कि सदियों पहले बने इन विशाल उपकरणों का इस्तेमाल खगोलीय घटनाओं को समझने और समय मापने के लिए कैसे किया जाता था।इस ऐतिहासिक सफ़र में हमारे साथ हैं इतिहासकार और वास्तुकार अनीशा मुखर्जी, जो Jantar Mantar, Maharaja Sawai Jai Singh’s Observatory in Delhi की लेखिका हैं।देखिए पढ़ाकू नितिन का यह ख़ास एपिसोड और जानिए उस जंतर-मंतर की कहानी, जिसे आज हम विरोध प्रदर्शनों के लिए जानते हैं, लेकिन जिसकी पहचान कभी विज्ञान और खगोलशास्त्र से जुड़ी थी।
महाभारत की कहानी को अगर स्त्रियों की नज़र से देखा जाए, तो क्या कुछ बदल जाएगा? क्या द्रौपदी, गांधारी, कुंती और सत्यवती की नज़र से महाभारत की नई परतें खुलती हैं? क्या इस महागाथा की स्त्रियां महज़ निमित्त मात्र थीं, या उनके बिना महाभारत की कहानी अधूरी है?इतिहास हो, कोई घटना या कोई किरदार—उसे समझने के लिए अलग-अलग नज़रियों से देखना ज़रूरी है। आचार्य चतुरसेन ने अपने उपन्यास ‘वयं रक्षामः’ में रामायण की कहानी को रावण के नज़रिए से देखा, तो मैथिलीशरण गुप्त ने अपनी कृति ‘यशोधरा’ में बुद्ध की कहानी को उनकी पत्नी यशोधरा की नज़र से प्रस्तुत किया।तो फिर महाभारत को उसकी स्त्रियों की नज़र से पढ़ने पर क्या दिखाई देता है? इस महागाथा में द्रौपदी, गांधारी, कुंती, गंगा, अंबा, अंबालिका, सत्यवती, माद्री और उत्तरा जैसी स्त्रियों की अपनी इच्छाएं, संघर्ष, दर्शन और सवाल क्या थे? क्या वे केवल पुरुषों के फैसलों और युद्धों के बीच मौजूद पात्र थीं, या महाभारत की पूरी कहानी को दिशा देने में उनकी भी निर्णायक भूमिका थी?पढ़ाकू नितिन के इस एपिसोड में बात महाभारत की स्त्रियों की। उनके मन, उनके दर्शन, उनकी पीड़ा, उनके संघर्ष और उनके किरदारों की उन परतों को समझने की कोशिश, जिन पर अक्सर पर्याप्त चर्चा नहीं होती।हमारे साथ हैं सुमन केशरी जी, जो पिछले तीन दशकों से महाभारत की स्त्रियों पर लेखन और चिंतन कर रही हैं। उन्होंने इन स्त्रियों पर कविताएं लिखी हैं, नाटक रचे हैं और उनके जीवन-दर्शन को समझने की कोशिश की है। उनके नाटकों में गांधारी, हिडिंबा और सावित्री जैसे पात्रों की दुनिया खुलती है, जबकि उनके कविता-संग्रह ‘निमित्त नहीं’ की कविताएं इन स्त्रियों के अनुभवों और अस्तित्व को समर्पित हैं।क्या महाभारत की स्त्रियां सचमुच निमित्त मात्र थीं? या फिर उनकी कहानियों को समझे बिना हम महाभारत को पूरी तरह समझ ही नहीं सकते?सुनिए पढ़ाकू नितिन का यह विशेष एपिसोड।
Gandhi पर इतनी किताबें लिखी जा चुकी हैं कि लगता है अब उनके बारे में कुछ नया कहने को बचा ही नहीं। फिर भी आज गांधी या तो बिना सवाल के ‘महात्मा’ हैं, या सोशल मीडिया पर गाली देने के लिए आसान निशाना।प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल की किताब ‘मजबूती का नाम महात्मा गांधी’ इन दोनों आसान रास्तों से अलग गांधी को समझने की कोशिश करती है।इस बातचीत में 1947 की वही पुरानी बहस नहीं, बल्कि गांधी के दिमाग, अंतर्विरोध, ज़िद और दर्शन को समझने की कोशिश है।क्या गांधी की अहिंसा आम इंसान के बस की थी? क्या उनका आधुनिकता-विरोध एक खूबसूरत भ्रम था? खुद को गर्व से हिंदू कहने वाले गांधी पर मुस्लिम तुष्टिकरण और हिंदू-विरोधी होने के आरोप क्यों लगे? और गांधी की ‘मजबूती’ उनकी ताकत थी या हठधर्मिता?इन्हीं असहज सवालों के जवाब देने के लिए हमारे साथ हैं प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल—पूर्व JNU प्रोफेसर, लेखक, कबीर और भारतीय साहित्य के गहरे अध्येता और UPSC के पूर्व सदस्य।आइए, गांधी को न भक्त की तरह, न विरोधी की तरह बल्कि सवाल पूछने वाले की तरह समझने की कोशिश करते हैं।
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