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SUSHUMNA VANI HINDI (सुषुम्ना वाणी)
SUSHUMNA VANI HINDI (सुषुम्ना वाणी)
Author: DIVYA BABAJI SUSHUMNA KRIYA YOGA FOUNDATION
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© DIVYA BABAJI SUSHUMNA KRIYA YOGA FOUNDATION
Description
सुषुम्ना वाणी के हिंदी प्रकाशन में आपका स्वागत है! .... श्री श्री आत्मानंदमयी माताजी द्वारा विश्व को दिए गए सुषुम्ना क्रिया ध्यान के ज्ञान को हिंदी भाषी साधकों में फैलाने के लिए ये एक पॉडकास्ट श्रृंखला है।
हमारी गुरु माँ हमें बार-बार कहती हैं - हमें दिन की शुरुआत ध्यान से करनी चाहिए लेकिन इसे आत्मनिरीक्षण से ख़त्म करना चाहिए। और ध्यान और आत्मनिरीक्षण के बीच हम अपना जीवन कैसे जीते हैं, यह हमारे आध्यात्मिक विकास की गति और पथ को तय करता है। यह पॉडकास्ट श्रृंखला सुषुम्ना क्रिया योग में हमारे प्रयासों को सशक्त बनाने के लिए जीवन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेगी।
हमारी गुरु माँ हमें बार-बार कहती हैं - हमें दिन की शुरुआत ध्यान से करनी चाहिए लेकिन इसे आत्मनिरीक्षण से ख़त्म करना चाहिए। और ध्यान और आत्मनिरीक्षण के बीच हम अपना जीवन कैसे जीते हैं, यह हमारे आध्यात्मिक विकास की गति और पथ को तय करता है। यह पॉडकास्ट श्रृंखला सुषुम्ना क्रिया योग में हमारे प्रयासों को सशक्त बनाने के लिए जीवन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेगी।
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इस एपिसोड में क्रिसमस और बाइबिल के एक छोटे से श्लोक पर चर्चा की गई है, जैसा कि श्री युक्तेश्वर गिरि के कैवल्य दर्शन में समझाया गया है।यदि आपके कोई प्रश्न, सुझाव या टिप्पणियाँ हों, तो कृपया हमें लिखें – sushumnavani@divyababajikriyayoga.org
इस एपिसोड में भगवद गीता के दूसरे अध्याय में बताए गए पतन की सीढ़ी पर चर्चा की गई है, जो दो श्लोक 2.61 और 2.62 में वर्णित है।यदि आपके कोई प्रश्न, सुझाव या टिप्पणियाँ हों, तो कृपया हमें लिखें – sushumnavani@divyababajikriyayoga.org
यह एपिसोड भगवद गीता के श्लोक 6.5 पर चर्चा करता है, जिसमें भगवान कृष्ण कहते हैं कि हम अपने मित्र या शत्रु स्वयं हो सकते हैं और सुषुम्ना क्रिया योगियों के लिए इसका क्या अर्थ हैयदि आपके कोई प्रश्न, सुझाव या टिप्पणियाँ हों, तो कृपया हमें लिखें – sushumnavani@divyababajikriyayoga.org
इस एपिसोड में गीता जयंती के उत्सव और श्रीमद्भगवद्गीता के महात्म्य पर चर्चा की गई है।यदि आपके कोई प्रश्न, सुझाव या टिप्पणियाँ हों, तो कृपया हमें लिखें – sushumnavani@divyababajikriyayoga.org
यह प्रकरण भगवान दत्तात्रेय के पाँच गुरुओं के विषय में चर्चा करता है — यह हमें हमेशा अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखने की एक शक्तिशाली याद दिलाता है।यदि आपके कोई प्रश्न, सुझाव या टिप्पणियाँ हों, तो कृपया हमें लिखें – sushumnavani@divyababajikriyayoga.org
यह एपिसोड बताता है कि गुरु दत्तात्रेय ने वायु को अपना गुरु क्यों माना — और उसकी स्वतंत्रता तथा आसक्ति-रहित रहने की क्षमता से हम अपने जीवन को कैसे प्रेरित कर सकते हैं।यदि आपके कोई प्रश्न, सुझाव या टिप्पणियाँ हों, तो कृपया हमें लिखें –sushumnavani@divyababajikriyayoga.org
यह एपिसोड बताता है कि गुरु दत्तात्रेय ने पृथ्वी (प्रकृति) को अपना गुरु क्यों माना — और हम उसके गुणों से क्या सीख सकते हैं तथा उन्हें अपने जीवन में कैसे अपनाएँ।यदि आपके कोई प्रश्न, सुझाव या टिप्पणियाँ हों, तो कृपया हमें लिखें –sushumnavani@divyababajikriyayoga.org
इस एपिसोड में श्रोता गुरु दत्तात्रेय और उनके 24 गुरुओं से परिचित होंगे।यदि आपके कोई प्रश्न, सुझाव या टिप्पणियाँ हों, तो कृपया हमें लिखें – sushumnavani@divyababajikriyayoga.org
इस एपिसोड में दिवाली पर पूजा की विभिन्न विधियों पर चर्चा की गई है और गणेश-लक्ष्मी की एक साथ पूजा करने के महत्व पर भी चर्चा की गई है।आपके किसी भी प्रश्न, सुझाव या टिप्पणी के लिए, कृपया sushumnavani@divyababajikriyayoga.org पर लिखें।
इस एपिसोड में जानें कि कर्म ऋण हमारे रिश्तों, आकर्षणों और जीवन के स्वरूप को कैसे आकार देते हैं — और जागरूकता कैसे इन अदृश्य बंधनों को बदलने में हमारी मदद कर सकती है।आपके किसी भी प्रश्न, सुझाव या टिप्पणी के लिए, कृपया sushumnavani@divyababajikriyayoga.org पर लिखें।
यह एपिसोड मानव ऋण अर्थात समाज और परिवार के प्रति कर्तव्यों के ऋण और सेवा भाव से उसे निभाने की प्रक्रिया पर चर्चा करता है।यदि आपके कोई प्रश्न, सुझाव या विचार हों, तो कृपया हमें इस पते पर लिखें:sushumnavani@divyababajikriyayoga.org
यह एपिसोड भूत ऋण अर्थात प्राणिमात्र और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता के ऋण और करुणा से उसे संतुलित करने के महत्व पर चर्चा करता है।यदि आपके कोई प्रश्न, सुझाव या विचार हों, तो कृपया हमें इस पते पर लिखें:sushumnavani@divyababajikriyayoga.org
यह एपिसोड चर्चा करता है कि नौ संख्या और "रात्रि" का क्या महत्व है और साधक की यात्रा में इन नौ रातों का क्या उद्देश्य है।यदि आपके कोई प्रश्न, सुझाव या विचार हों, तो कृपया हमें इस पते पर लिखें:sushumnavani@divyababajikriyayoga.org
यह एपिसोड देव ऋण अर्थात देवताओं और प्रकृति से जुड़े ऋण तथा उपासना और संरक्षण से उसे संतुलित करने के मार्ग पर चर्चा करता है।यदि आपके कोई प्रश्न, सुझाव या विचार हों, तो कृपया हमें इस पते पर लिखें:sushumnavani@divyababajikriyayoga.org
यह एपिसोड ऋषि ऋण अर्थात गुरुओं और ऋषियों से प्राप्त ज्ञान के ऋण और उसे साधना व अध्ययन से निभाने के उपायों पर चर्चा करता है।यदि आपके कोई प्रश्न, सुझाव या विचार हों, तो कृपया हमें इस पते पर लिखें:sushumnavani@divyababajikriyayoga.org
यह एपिसोड पंच ऋण, यानी पाँच प्रकार के ऋणों की अवधारणा पर चर्चा करता है, जिन्हें हम सभी अपने जीवन में वहन करते हैं।यदि आपके कोई प्रश्न, सुझाव या विचार हों, तो कृपया हमें इस पते पर लिखें:sushumnavani@divyababajikriyayoga.org
यह एपिसोड पितृ ऋण अर्थात हमारे पूर्वजों से जुड़े ऋण और उन्हें स्मरण तथा कृतज्ञता से चुकाने के महत्व पर चर्चा करता है।यदि आपके कोई प्रश्न, सुझाव या विचार हों, तो कृपया हमें इस पते पर लिखें:sushumnavani@divyababajikriyayoga.org
गणेश जी के बड़े कान हमें यह सिखाते हैं कि केवल सुनना ही नहीं, बल्कि ध्यानपूर्वक, धैर्यपूर्वक और बिना निर्णय किए सुनना जीवन की आधी समस्याओं का समाधान है।यदि आपके कोई प्रश्न, सुझाव या विचार हों, तो कृपया हमें इस पते पर लिखें:sushumnavani@divyababajikriyayoga.org
क्या हम स्वतंत्र हैं? इसी विषय पर चर्चा की गयी है इस एपिसोड मे। यदि आपके कोई प्रश्न, सुझाव या विचार हों, तो कृपया हमें इस पते पर लिखें:sushumnavani@divyababajikriyayoga.org
इस एपिसोड में श्रीकृष्ण के जन्म की कथा को साझा किया गया है, जो सभी सुषुम्ना क्रिया योग साधकों के लिए अत्यंत गहरा आध्यात्मिक अर्थ रखती है।यदि आपके कोई प्रश्न, सुझाव या विचार हों, तो कृपया हमें इस पते पर लिखें:sushumnavani@divyababajikriyayoga.org























