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Dr Pradeep kushwaha | Brahm Homeopathy
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Author: Brahm Homeopathy | Dr Pradeep kushwaha
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© Brahm Homeopathy | Dr Pradeep kushwaha
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PANCREATITIS TREAETMENTS
WHAT IS PANCREATITIS?
Pancreatitis is a condition characterized by inflammation of the pancreas, a gland responsible for digestion and blood sugar regulation. There are two main types: acute and chronic. Acute pancreatitis, often severe but usually resolved with medical treatment, can be caused by factors like gallstones, alcohol consumption, infections,
trauma, or high triglycerides. Symptoms include abdominal pain, nausea, vomiting, fever, rapid pulse, and tender abdomen. Chronic pancreatitis, on the other hand, is a long-term inflammation that can cause permanent
WHAT IS PANCREATITIS?
Pancreatitis is a condition characterized by inflammation of the pancreas, a gland responsible for digestion and blood sugar regulation. There are two main types: acute and chronic. Acute pancreatitis, often severe but usually resolved with medical treatment, can be caused by factors like gallstones, alcohol consumption, infections,
trauma, or high triglycerides. Symptoms include abdominal pain, nausea, vomiting, fever, rapid pulse, and tender abdomen. Chronic pancreatitis, on the other hand, is a long-term inflammation that can cause permanent
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**गैस, एसिडिटी और अल्सर का इलाज**परिचय**आज के भागदौड़ ज़िंदगी, में गलत खानपान और तनाव ने पेट से जुड़ी बहुत सी बीमारियों को आम बना दिया है।- इनमें से सबसे ज़्यादा पाई जाने वाली तीन समस्याएँ हैं — **गैस **, **एसिडिटी ** और **अल्सर**।- ये ३ बीमारियाँ आपस में ही जुड़ी होती हैं। अगर समय पर सही इलाज न किया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकती हैं।1. गैस क्या है?पेट में गैस बनना यह पाचन तंत्र की प्रक्रिया है, पर जब यह ज़्यादा मात्रा में बनने लगे या बाहर नही निकल पाए, तो पेट में दर्द, और सूजन तथा असहजता महसूस होती है।- यह समस्या तब बढ़ती है, जब हम भोजन को पूरी तरह से पचा नहीं पाते और आंतों में गैस जमा हो जाती है।२) पेट में गैस बनने के क्या मुख्य कारण हो सकते है?पेट में गैस बनने के मुख्य कारण निचे अनुसार है - * जल्दी-जल्दी खाना को खाते जाना। * बहुत ही तला-भुना या ज्यादा मसालेदार भोजन को खाना * ज्यादा चाय, और कॉफी का सेवन करना * तनाव और रात में सही से नींद नहीं आना * कब्ज ३) गैस होने के क्या लक्षण होते है?* पेट में भारीपन जैसा लगना * खट्ठी डकार का आना या पेट में दर्द का होना। * भूख भी सही से नहीं लगना। * कभी-कभी सीने में जलन का होना४) एसिडिटी क्या है?जब पेट में बनने वाला हाइड्रोक्लोरिक एसिड ज़रूरत से भी ज़्यादा बनने लग जाता है, तो, वो ऊपर आता है, उसे **एसिडिटी** कहते हैं। - यह समस्या *(GERD)* का भी रूप ले सकती है। ##एसिडिटी के क्या कारण है?* ज्यादा मसालेदार और ज्यादा बाहर का भोजन करना। * भूखे पेट ज्यादा समय तक रह जाना * अत्यधिक चाय और कॉफी का सेवन करना * ज्यादा देर तक जागना या सही से नींद नहीं आना# एसिडिटी के क्या लक्षण होते है?* सीने में बहुत ही जोर से जलन का होना * छाती में दर्द का होना * डकार या उल्टी का होना##जीवनशैली में बदलाव करने से परिवर्तन ##* भोजन करने के तुरंत बाद में नही लेटें। * दिन में छोटे - छोटे अंतर में भोजन को लें।५) अल्सर क्या है?अल्सर का मतलब है, की — पेट, और छोटी आंत में छाला बन जाना। - सबसे आम प्रकार है **पेप्टिक अल्सर**। जब पेट में बहुत ही ज्यादा एसिड बनता है तब यह स्थिति होती है।## अल्सर का मुख्य कारण क्या होता है ?* ज्यादा लंबे समय से दर्द निवारक दवा का सेवन करना * ज्यादा शराब और धूम्रपान करना * लगातार एसिडिटी का होना * अनियमित खानपान होने से भी# अल्सर का मुख्य लक्षण क्या है?* सीने में जलन का होना * उल्टी का होना * वजन का कम हो जाना * भूख में कमी होना या नहीं लगना * पेट में छाले का होना#अल्सर से बचाव के लिए क्या करे ?1. नियमित अपने सही समय पर भोजन करना। 2. जंक फूड, और तली चीज़ें और कार्बोनेटेड ड्रिंक से दुरी बनाये रखना । 3. डेली 30 मिनट तक कसरत करना 4. धूम्रपान और शराब से दूरी रखें। 5. भोजन को चबाकर खाएँ। 6. तनाव को कम करें और ७-८ घंटे की नींद पूरी लें।
१) पैंक्रियाटाइटिस (Pancreatitis) का इलाज और पूरी जानकारी?**परिचय:**अग्नाशय हमारे शरीर के पाचन तंत्र का एक महत्वपूर्ण भाग है, जो की ,पेट के पीछे स्थित होता है। और पाचन एंजाइम तथा इंसुलिन जैसे हार्मोन को बनाता है।पैंक्रियाटाइटिस को अग्नाशय सूजन भी कहते हैं।- जब भी किसी कारण से यह भाग में सूजन हो जाता है. या इसके कोशिका क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो यह खुद ही अपने एंजाइम से पचने लगता है। यही स्थिति *पैंक्रियाटाइटिस* कहलाती है।- यह रोग तीव्र और दीर्घकालिक दोनों के रूप में हो सकता है।२) पैंक्रियाटाइटिस के कितने प्रकार होते है?पैंक्रियाटाइटिस के २ प्रकार होते है- 1. एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस - यह अचानक से शुरू होने वाला रोग है, जो की, कुछ दिनों तक रहता है। अगर सही तरह से इलाज किया जाये तो ,यह सही हो सकता है. - एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस के प्रमुख कारण :: – शराब का बहुत ही अधिक सेवन करना , पित्त की पथरी , वायरल संक्रमण या कुछ दवा का साइड इफेक्ट का होना । 2. क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस - यह दीर्घकालिक समय तक चलने वाली स्थिति है, जिस में अग्नाशय धीरे-धीरे कार्य करने की क्षमता को खो देता है। - इसका मुख्य कारण है ::- ज्यादा लंबे समय तक शराब को पीना, पारीवारिक कारक, या बार-बार एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस का हो जाना ।३) पैंक्रियाटाइटिस बीमारी के क्या लक्षण दिखाई देते है?पैंक्रियाटाइटिस बीमारी के लक्षण निचे अनुसार होते है. जैसे की,- * ऊपरी पेट में तेज दर्द का होना। जो की, पीठ तक फैल सकता है. * उल्टी और मिचली * पेट में सूजन का हो जाना * भूख नहीं लगना या तो कम लगना * वज़न का अचानक से घट जाना * पीलिया४) पैंक्रियाटाइटिस बीमारी के **मुख्य कारण** क्या होते है?पैंक्रियाटाइटिस बीमारी के **मुख्य कारण** निचे बताये अनुसार है, * ज्यादा शराब का सेवन करना। * पित्त की पथरी * खून में ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ जाना * धूम्रपान का सेवन * कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव से भी * हाई कैल्शियम का स्तर##पैंक्रियाटाइटिस का इलाज##- 1. **अस्पताल में शुरुआती इलाज **भोजन से आराम** कुछ समय के लिए मरीज को खाना नहीं दिया जाता है, ताकि अग्नाशय को आराम मिल सके. **इंट्रावेनस फ्लूइड (IV Fluids)** शरीर में पानी की कमी और इलेक्ट्रोलाइट कमी को पूरा करने के लिए ड्रिप लगाई जाती है। **दर्द निवारक दवाएं** पेट के दर्द को कण्ट्रोल करने के लिए दर्द को कम करने वाली दवा दी जाती हैं। - 2. **मूल कारण का इलाज *अगर **पित्त की पथरी** का कारण है, तो *गॉलब्लैडर सर्जरी * को किया जाता है. *शराब से पूर्ण परहेज करना अनिवार्य है। *ट्राइग्लिसराइड्स ज्यादा हो जाने पर दवा दी जाती हैं, ताकि स्तर को कण्ट्रोल में कर सके. -3. **क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस का उपचार *एंजाइम सप्लीमेंट्स - जब अग्नाशय सही तरह से एंजाइम नहीं बना पाता है, तो डॉक्टर कैप्सूल के रूप में देते हैं। जिस से की , भोजन ठीक से पच सके। *इंसुलिन थेरेपी - अगर इंसुलिन का उत्पादन प्रभावित हो गया है, तो मधुमेह की तरह इंसुलिन दिया जाता है। *पोषण संबंधी सपोर्ट - हाई-प्रोटीन, और लो-फैट डाइट को दिया जाता है। और कभी-कभी विटामिन A, D, E, K खुराक को भी देते है. *सर्जरी - यदि नलिका में रुकावट हो तो सर्जरी से ब्लॉकेज को हटाया जाता है।##घरेलू और जीवनशैली के संबंधी उपाय**** शराब और धूम्रपान को तो, पूरी तरह से छोड़ें। ** कम चर्बी वाला आहार को लें। ** छोटे अंतराल में और बार-बार भोजन को करें। **सही मात्रा में पानी को पिएँ। ** ज्यादा मसालेदार, और तला-भुना तथा जंक फूड को नहीं खाएँ। **डॉक्टर के द्वारा दी गई दवा को सही और नियमित रूप से लें। **तनाव को कम करने के लिए कसरत करें।५)इसके क्या जटिलताएँ होती है?अगर सही समय पर और सही इलाज न किया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकता है: *अग्नाशय में सिस्ट का होना * संक्रमण हो जाना * सांस लेने में भी बहुत ही कठिनाई का होना * मधुमेह * पोषणतत्व की कमी
IBS का होमियोपैथी में सही इलाज ?**परिचय** IBS पाचन के संबंधित विकार है, जिस में व्यक्ति को बार-बार पेट में दर्द का होना , गैस, और कब्ज या दस्त जैसी समस्याएँ होती रहती हैं।- यह बीमारी कोई जानलेवा तो, नहीं है, पर मरीज के व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता को बहुत ही ज्यादा असर कर सकती है। - IBS का मुख्य कारण पाचन तंत्र की संवेदनशीलता और मस्तिष्क के बीच खराब संचार, आंत्र की मांसपेशियों का असामान्य कार्य के बीच असंतुलन को माना जाता है।१) IBS होने के मुख्य क्या लक्षण दिखाई देते है?IBS के लक्षण अलग -अलग व्यक्ति में अलग हो सकते हैं, पर कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार से है- **बार-बार पेट में तेज दर्द या ऐंठन का होना। **कब्ज और दस्त **पेट में गैस का बनना या पेट का फूल जाना या भारीपन जैसा महसूस होना **मल त्याग के बाद राहत जैसा महसूस होना **थकान और कमजोरी जैसा लगना२) IBS के कितने प्रकार के होते हैं?IBS के तीन तरह के होते हैं.- A. IBS-C :: कब्ज ज़्यादा होता है. B. IBS-D :: दस्त ज़्यादा होता है. C. IBS-M :: इसमें कभी दस्त तो कभी कब्ज दोनों ही होता है।३) IBS होने के क्या मुख्य कारण होते है?IBS के पीछे कई मुख्य कारण हैं: जैसे की, **तनाव और चिंता :: मानसिक तनाव से आंतों की गति और संवेदनशीलता को असर करता है। **गलत खानपान :: ज्यादा तैलीय, और ज्यादा मसालेदार, इसके अलावा जंक फूड का सेवन करना । **हार्मोनल में बदलाव :: महिलाओं में मासिक धर्म के समय IBS के लक्षण को बढ़ा सकते हैं। **संक्रमण :: पेट में कोई भी तरह संक्रमण के बाद भी IBS के लक्षण उभर सकते हैं।## IBS का सही इलाज?IBS का कोई स्थायी इलाज नहीं है , पर जीवनशैली, और खानपान के अलावा कुछ दवा की मदद से पूरी तरह कण्ट्रोल किया जा सकता है। **1.आहार में सुधार** IBS के इलाज में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भोजन का ही होता है। जिस में - **फाइबर युक्त भोजन लें :: जैसे की - ओट्स, फल, और सब्जियाँ ,साबुत अनाज। ** ऐसे भोजन से दुरी बनाये रखे की ,जो गैस या जलन को बढ़ाते हैं। (जैसे की - प्याज, लहसुन,गेहूं)। **डेयरी उत्पाद को कम करें :: अगर लैक्टोज की समस्या है,तो दूध और चीज़ से पूरी तरह दूरी बनाये रखें। **ज्यादा पानी को पिएँ ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। **अल्कोहल को कम करें। **2. तनाव पर नियंत्रण** ** डेली कसरत करे। जिस से तनाव को कम करने में मदद मिलती है. ** 7–8 घंटे डेली पर्याप्त नींद ले। ** अपने काम और निजी जीवन में संतुलन को सही तरह से बनाये रखें। **3. घरेलू उपचार** **त्रिफला चूर्ण :: पाचन को मजबूत बनता है और कब्ज को दूर करता है। **जीरा, सौंफ और अजवाइन के सेवन से गैस और अपच में फायदेमंद है। ** रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाने के लिए आंवला और गिलोय का उपयोग करे। * * छाछ और हल्का भोजन पेट को राहत देता है।४) IBS में किन चीज़ों से दुरी बनाये रखे?* बहुत ही मसालेदार भोजन ,या तला-भुना खाना से दुरी। * चाय-कॉफी का सेवन न करे। * धूम्रपान और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। * ज्यादा तनाव५)IBS से बचने के लिए क्या उपाय है?- 1.नियमित सही समय पर भोजन करने का फिक्स करे. - 2. डेली कसरत करना भी अच्छा होता है. - 3. खाने को धीरे-धीरे से और अच्छी तरह से चबाकर खाना चाहिए. - 4. रात के समय में मोबाइल या लैपटॉप से दूरी बनाये रखे. -5. पानी और नींद दोनों को सही तरह से ले.
१) H. pylori Infection का इलाज?**परिचय:**हेलिकोबैक्टर पाइलोरी एक तरह का बैक्टीरिया है,जो की हमारे पेट के अंदरूनी पर्त यानी की गैस्ट्रिक म्यूकोसा में रहता है।- विकासशील देशों में यह संक्रमण बहुत आम है, ज्यादातर मामलों में यह संक्रमण बचपन में होता है, और सही समय पर सही इलाज नही किया जाए तो यह **पेप्टिक अल्सर , और गैस्ट्राइटिस ** का कारण भी बन सकता है।२) H. pylori संक्रमण होने के क्या कारण हो सकते है ?यह संक्रमण निम्न कारणों से फैलता है: जैसे की, 1. संक्रमित हुए व्यक्ति के लार, उल्टी के संपर्क के कारण। 2. दूषित भोजन या दूषित पानी पीने से। 3. एक ही बर्तन में खाये हुए भोजन या टूथब्रश को साझा करने से। 4. अपने आस - पास में साफ़ - सफाई नहीं हो। ३) H. pylori संक्रमण होने के क्या लक्षण हो सकते है?हर व्यक्ति में लक्षण अलग हो सकते हैं, पर आमतौर पर ये देखने को मिलते हैं: जैसे की, * पेट में जलन या दर्द का होना * उल्टी या मिचली का आना * भूख भी नही लगना या तो कम लगना * खट्टी डकार का आना या पेट में गैस बनना * वजन घट जाना या कम हो जाना और थकान जैसा लगना अगर संक्रमण ज्यादा लंबे समय तक बना रहे तो **गंभीर अल्सर या तो, गैस्ट्रिक ब्लीडिंग** भी हो सकता है।४) H. pylori Infection जांच के लिए डॉक्टर किस तरह के जाँच करते है? H. pylori संक्रमण का पता करने के लिए डॉ. कुछ खास तरह के जांचें करवाते हैं: जैसे की, 1. **यूरेज ब्रीथ टेस्ट** इसमें दर्दी विशेष तरल को पीता है, और सांस के नमूने से बैक्टीरिया के मौजूदगी का पता चलता है। 2. **स्टूल एंटीजन टेस्ट** मल के सैंपल से H. pylori की उपस्थिति के जाँच किया जाता है. 3. **ब्लड टेस्ट** शरीर में H. pylori के एंटीबॉडी की जांच होती है, पर पुराना संक्रमण भी दिखा सकता है। 4. **एंडोस्कोपी** अगर गंभीर लक्षणों में पेट के अंदर कैमरे द्वारा जांच कर ऊतक को लिया जाता है। #इलाज के दौरान ध्यान देने योग्य क्या बातें है?1. दवाएं को डॉ. के सलाह अनुसार पूरी अवधि तक लें — कभी भी बीच में बंद नही करें। 2. ज्यादा मसालेदार और तले भोजन से बचें। और सही समय पर भोजन करे। 3. धूम्रपान और शराब से पूरी तरह से परहेज करें, क्योंकि ये पेट की परत को हानि पहुंचाते हैं। 4. इलाज के बाद में भी डॉ दोबारा टेस्ट करवाने को कहते है, ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि, अब बैक्टीरिया पूरी तरह से खत्म हो गया है। ५) H. pylori Infection के लिए क्या घरेलू उपाय है?दवा के साथ में कुछ घरेलू उपाय भी संक्रमण को कम करने में मदद कर सकते हैं: जैसे की, - **ग्रीन टी** सूजन और संक्रमण को कम करती है। - **लहसुन** प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुण रखता है। - **शहद** संक्रमण को घटाने और पेट की परत की मरम्मत में मदद करता है। - **फाइबर युक्त भोजन** जैसे के फल, सब्जियाँ, ओट्स, दलिया — पाचन को सुधारते हैं। पर याद रखें, की यह सहायक उपाय हैं — **डॉक्टर के कहने पर ही ले**।६) H. pylori से **बचाव** के लिए क्या ध्यान देना चाहिए?H. pylori से बचाव के लिए स्वच्छता और खानपान पर खास करके ध्यान देना जरूरी है: जैसे की, 1. हमेशा से हल्का गर्म किया हुआ पानी या फिल्टर किया हुआ पानी को पीएँ। 2. दूषित भोजन को न खाएँ। 3. खाना को खाने से पहले और शौच करने के बाद में अपने हाथ को अच्छे से साबुन से धोएँ। 4. संक्रमित हुए मरीज के बर्तन, गिलास , टोवेल को साझा न करें। 5. सड़क किनारे लगाए हुए स्टॉल पर से पैकेट फ़ूड और बाहर का खाना को कम खाएँ, ।
**Acute Pancreatitis का इलाज – कारण, लक्षण और उपचार****परिचय**एक्यूट अग्नाशयशोथ गंभीर पाचन के संबंधी बीमारी है, जिस में **अग्न्याशय** में अचानक से सूज जाता है। यह सूजन हल्की हो सकती है, या तो, गंभीर हो सकती है, , जो की जीवन के लिए खतरा बन सकता है।- पैंक्रियास हमारे शरीर का महत्वपूर्ण भाग है, जो की, **पाचक एंजाइम** और **इंसुलिन** जैसे हार्मोन को बनाता है।- जब भी किसी कारण से पैंक्रियास में सूजन आ जाता है, तो अपने ही एंजाइम से खुद को हानि पहुँचाने लग जाता है।१) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस होने के क्या मुख्य कारण है?एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस के कारण निचे बताये अनुसार होते है, जैसे की, 1. **पित्त की पथरी**यह तो सबसे आम कारणों में से एक है। जब भी पित्त की पथरी पित्त नलिका को अवरुद्ध करता है, जिस से अग्न्याशय का रस रुक जाता है, और सूजन हो जाती है। 2. **अत्यधिक शराब सेवन** लंबे समय तक और अधिक मात्रा में शराब पीने से पैंक्रियास की कोशिका क्षतिग्रस्त होने लग जाती है, जिस से की, तीव्र सूजन हो सकती है। 3. **ट्राइग्लिसराइड का बढ़ना** खून में ट्राइग्लिसराइड का लेवल बहुत ही ज्यादा हो जाने पर पैंक्रियास पर दबाव बढ़ जाता है। 4. **दवाओं का असर** कुछ एंटीबायोटिक्स, या डाययूरेटिक दवाएँ भी इस स्थिति को ट्रिगर कर सकती हैं। 5. **पेट की सर्जरी** अग्न्याशय के आस-पास की चोट या तो,ऑपरेशन भी सूजन का कारण बनते है। 6. **आनुवांशिक कारण:** पारिवारिक इतिहास होने के कारण से भी इसका जोखिम और भी बढ़ जाता है.२) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस होने पर क्या लक्षण दिखाई देते है ?एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस बीमारी के शुरुआत अचानक से होती है, और इसके लक्षण तेजी से बढ़ते हैं। जैसे की, **ऊपरी पेट में तेज दर्द**, जो की, पीठ तक फ़ैल सकता है। **मतली और उल्टी होना।** **पेट में कोमलता का हो जाना ** **भूख कम लगना या तो नहीं लगना।** * गंभीर मामलों में **सांस लेने में परेशानी **, और **लो ब्लड प्रेशर** का हो जाना। - यदि सही समय पर और सही इलाज न हो, तो यह स्थिति **(ऊतक मृत्यु)** तक बढ़ सकती है।३) डॉक्टर एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस का निदान कैसे करते है?डॉक्टर रोग का पता लगाने के लिए कुछ जाँचें करते हैं, जैसे की– 1. **ब्लड टेस्ट** सीरम एमाइलेज और लाइपेज स्तर के जांच किया जाता है, जो की, इस रोग में काफी बढ़ जाते हैं। 2. **अल्ट्रासाउंड** अग्न्याशय में सूजन की पहचान के लिए किया जाता है। 3. **CT Scan या MRI:** सूजन की गंभीरता ,अंगों के स्थिति को जानने के लिए सटीक जांच माना जाता है. 4. **ERCP** पित्त की नली में पथरी है, तो उसे निकालने के लिए प्रक्रिया को किया जाता है.४) एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस का घरेलू देखभाल और जीवनशैली पर क्या असर होता है?**घरेलू देखभाल और जीवनशैली सुधार**हॉस्पिटल से छुट्टी लेने के बाद में मरीज को कुछ सावधानी हमेशा रखनी चाहिए: जैसे की, - शराब और धूम्रपान को पुरे तरीके से दुरी बनाए रखना। - **फैट रहित भोजन** खाएँ — जैसे की : सब्ज़ी, फल, सूप आदि। - धूम्रपान का सेवन बंद करें। - दिन में छोटे-छोटे अंतर में भोजन को कई बार लें। - सही मात्रा में पानी को पिए **, ताकि शरीर में डिहाइड्रेशन नही हो। - कसरत को धीरे-धीरे शुरू करें।५)संभावित जटिलताएँ?यदि सही समय पर और सही इलाज नहीं किया जाए, तो एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस गंभीर जटिलताएँ पैदा कर सकता है –जैसे की, **ऊतक का नष्ट होना **मधुमेह का विकास** ** किडनी फेलियर या फेफड़ों की विफलता**
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क्या खाने की चीजों से फैटी लिवर का खतरा ज्यादा है? | फैटी लिवर का खतरा बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ #fattyliver #liverhealth #liverdisease #liver #health #fattyliverdisease #cirrhosis #nafld #hepatitis #diabetes #weightloss#brahmhomeo
IBS का इलाज : – कारण, लक्षण और सही उपचार**परिचय**IBS सामान्य फिर भी परेशान करने वाली पाचन के समस्या है। इसमें व्यक्ति को बार-बार पेट में दर्द, गैस का बनना ,पेट का फूलना, दस्त या कब्ज जैसी शिकायतें होती हैं।- यह बीमारी जानलेवा नहीं है, पर व्यक्ति की दिनचर्या, और मानसिक स्वास्थ्य खानपान को असर करते है.१) IBS के मुख्य कारण क्या है?IBS का कोई एक निश्चित कारण तो नहीं होता है, पर कई वजह से मिलकर विकसित होता है। कुछ प्रमुख कारण निचे बताये अनुसार हो सकते हैं.1. आंतों की मांसपेशियों की असामान्य गति जब भी आंतों की मांसपेशियाँ बहुत ही तेज़ या बहुत धीमी गति से सिकुड़ने लगती हैं, तो या दस्त या कब्ज की स्थिति हो सकती है. 2.आंतों की तंत्रिकाओं में गड़बड़ी कुछ लोगों में आंतों की नसें बहुत ही संवेदनशील हो जाती हैं, जिस से भी हल्का गैस का कारण बनता है। 3.मानसिक तनाव और चिंता IBS को “माइंड-गट डिसऑर्डर” भी कहा जाता है, क्योंकि यह तनाव, चिंता इसके लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। 4.संक्रमण या फूड पॉइजनिंग किसी संक्रमण के बाद भी आंतों के कार्यप्रणाली असंतुलित हो सकता है, जिस से IBS के लक्षण शुरू हो जाते हैं। 5. खानपान में असंतुलन बहुत ज्यादा मसालेदार खाना ,तली-भुनी चीजें, या तो, डेयरी प्रोडक्ट, फाइबर की कमी भी IBS को ट्रिगर कर सकती है।२) IBS के सामान्य लक्षण क्या हो सकते है?IBS के लक्षण अलग - अलग व्यक्ति में अलग हो सकते हैं, पर आमतौर पर इनमें शामिल हैं – जैसे की, - बार-बार **पेट में तेज दर्द का होना या ऐंठन का होना ** **कब्ज या दस्त **, या तो दोनों का बारी-बारी से होना - पेट में गैस बनना और पेट का फूल जाना - कभी-कभी **मल में (चिकनाहट)** दिखाई देना३) IBS का निदान(Diagnosis) क्या है ?IBS का पता करने के लिए कोई विशेष टेस्ट नहीं होता है। डॉ. मरीज के लक्षण, और खानपान , जीवनशैली के आधार पर इसका निदान करते हैं। - कभी-कभी अन्य गंभीर बीमारियों को बाहर करने के लिए **खून का टेस्ट, एंडोस्कोपी** किया जाता है।**IBS का इलाज (Treatment)**IBS का कोई स्थायी इलाज नहीं है, पर सही **जीवनशैली, आहार और दवाओं** का सेवन करने से लक्षणों को पूरी तरह से कण्ट्रोल किया जा सकता है। A ) **आहार** * फाइबर युक्त भोजन** को ले. जैसे की, फल, सब्जियाँ, ओट्स और साबुत अनाज। * मसालेदार भोजन , और तली-भुनी और जंक फूड** से पूरी तरह दूरी रखें। * चाय या कॉफ़ी , शराब, सोडा** और **डेयरी उत्पाद** के सेवन को कम करें। * दिन में **थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खाना** खाएँ, एक साथ में बहुत भारी भोजन नही लें। B ) **तनाव नियंत्रण** * *योग** डेली करने से तनाव कम होता है। * उचित मात्रा में **नींद** लें। C ) **घरेलू उपाय** * सुबह खाली पेट **गुनगुना पानी** को पिएँ। * रोजाना **व्यायाम** करें। जैसे - सुबह टहलना। **अजवाइन,और हिंग** गैस और पेट दर्द में बहुत फायदेमंद होता हैं। ** पुदीने की चाय** पिने से पाचन शांत होता है. D) **जीवनशैली में सुधार** * हर दिन फिक्स टाइम पर ही भोजन को करें। * भोजन को अच्छे से और धीरे-धीरे से चबाकर खाएँ। * टीवी या मोबाइल को देखते हुए खाना नही खाएँ। * दिनभर में उचित मात्रा में पानी पिएँ। * धूम्रपान और शराब को पुरे तरह से बंद कर देना ही सही होता है.
**अर्टिकेरिया(Urticaria) का इलाज – कारण, लक्षण और उपचार***परिचय*अर्टिकेरिया जिसे आमतौर पर *हाइव्स* कहा जाता है, यह त्वचा के संबंधी समस्या है. जिस में शरीर पर लाल रंग के दाने, या सूजन और खुजली होती है।- इस तरह के स्थिति कुछ मिनटों से लेकर कई दिनों तक रह सकती है। कई बार अपने आप ही ठीक हो जाती है, पर कुछ मामलों में बार-बार वापस से आती है, जिसे *क्रोनिक अर्टिकेरिया* भी कहा जाता है।- इस तरह के समस्या एलर्जिक प्रतिक्रिया, और तनाव, या तो, दवाओं के कारण भी हो सकता है।१) अर्टिकेरिया के मुख्य कारण क्या होता है?अर्टिकेरिया के मुख्य कारण निचे बताये अनुसार हो सकता है. ,जैसे की, - अर्टिकेरिया *एलर्जिक* के कारण से भी होती है, जिस में शरीर की रोग-प्रतिरोधक प्रणाली हिस्टामिन नामक रसायन को छोड़ती है। इस से त्वचा के छोटी रक्त वाहिकाएँ फैल जाती हैं और सूजन के साथ खुजली आना शुरू हो जाती है। इसके प्रमुख कारण हैं –**खाद्य पदार्थों से एलर्जी ** ::– अंडा, नट्स, दूध, सोया, स्ट्रॉबेरी, और चॉकलेट आदि। **दवाइयों का प्रभाव** ::पेनकिलर, एंटीबायोटिक्स या दर्द निवारक जैसे दवाएँ। **संक्रमण** :: वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण से भी । **कीट के काटने से** :: मच्छर, या अन्य कीटों के डंक से भी स्किन में प्रतिक्रिया होती है। **तापमान में परिवर्तन** :: ठंडी या गर्म हवा के संपर्क में आने से भी कुछ लोगों में अर्टिकेरिया हो जाता है। **मानसिक तनाव** :: ज्यादा चिंता या मानसिक दबाव से भी ट्रिगर बन सकता है। २)अर्टिकेरिया के लक्षण किस तरह के हो सकते है?अर्टिकेरिया के लक्षण निचे अनुसार हो सकते है, जैसे की, - त्वचा पर लाल रंग के छोटे-छोटे दाने या चकते का होना । * खुजली और जलन जैसा एहसास। * असरकारक वाले भाग पर सूजन का आ जाना। * दाने एक जगह से गायब होकर दूसरे जगह पर आ जाना।३) डॉक्टर अर्टिकेरिया का निदान कैसे करते है?डॉ. आमतौर त्वचा की जांच और मरीज के लक्षण के आधार पर निदान करते हैं। कुछ मामलों में डॉ. नीचे दिए गए कुछ जाँच करने को कहते है – **एलर्जी टेस्ट ** :: किस पदार्थ से एलर्जी हो रही है। उसका पता करने के लिए. **ब्लड टेस्ट** :: संक्रमण या इम्यून सिस्टम की स्थिति को जानने के लिए. **थायरॉइड के जांच** :: कभी-कभी थायरॉइड भी असंतुलन का कारण बनता है।४) अर्टिकेरिया का घरेलू और प्राकृतिक उपचार?**ठंडी सिकाई ** :: खुजली और सूजन वाले जगह पर बर्फ घिसने से तुरंत ही राहत मिलती है। **एलोवेरा जेल** :: यह स्किन को ठंडक देता है और सूजन को कम करता है। **नीम और हल्दी** :: इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी का गुण होता है, जो की, संक्रमण को कम करते हैं। **तुलसी के चाय** :: इसमें एंटीऑक्सीडेंट होने से सूजन को कम करने में सहायक हैं।५) अर्टिकेरिया से बचाव के लिए क्या उपाय है?*जिन खाद्य पदार्थों के खाने से एलर्जीक है, उन से पूरी तरह से दूर रहे। * कॉटन के कपड़े को पहनें जिस से की त्वचा को सांस लेने की जगह मिले। * बहुत ही ज्यादा गर्म या तो, ठंडे वातावरण से बचें। * तनाव से बचें — और डेली कसरत करना अच्छा होता है. * उचित मात्रा में पानी पिएँ, ताकि शरीर से टॉक्सिन बाहर निकल सकें।# डॉक्टर से कब संपर्क करें?यदि अर्टिकेरिया के साथ कुछ इस तरह के लक्षण दिखें तो तुरंत ही डॉक्टर से मिलें। * साँस लेने में कभी -कभी परेशानी का होना। * गले में सूजन का आ जाना। * तेज बुखार रहना। * लगातार अर्टिकेरिया का होना
गैस्ट्रिक क्या है और इसका सही इलाज?*परिचय*भारत में इस तरह की प्रॉब्लम अब बहुत ही ज्यादा देखने को मिलता है। गैस की समस्या ,आज के समय में बहुत ही आम बात हो गयी है।-यह समस्या तब होती है, जब पेट में गैस का ज्यादा उत्पादन होता है. या तो सही तरह से गैस बाहर नहीं निकल पाती है ।- यह एक सामान्य प्रॉब्लम है, पर इसका सही इलाज और ध्यान नही दिया जाए, तो यह *एसिडिटी, पेट में तेज दर्द, या अल्सर* जैसी गंभीर बीमारियों हो सकती है. १ ) गैस्ट्रिक समस्या क्या है?गैस्ट्रिक को हम दूसरे शब्दो में “पेट में गैस बनना” भी कहा जाता है। - जब भोजन सही ढंग से नहीं पचता है, तो उसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट और फैट्स आंतों में किण्वित होकर गैस उत्पन्न करते हैं। - इस गैस से छाती या पेट के ऊपरी भाग में तेज दर्द या सीने में जलन , और भारीपन का कारण बनती है। २) गैस्ट्रिक की मुख्य वजह क्या है?- 1. **ख़राब तरह का खानपान** : – बहुत ही ज्यादा तला-भुना, और मसालेदार भोजन , या बाहर का खाना बहुत ही ज्यादा मात्रा में खाना या तो,देर से खाना खाना। - 2. **खाने की अनियमित दिनचर्या** :– बहुत ही लंबे समय तक रहना या बार-बार खाना। - 3. मानसिक तनाव से पाचन को बहुत ही ज्यादा असर होता है। - 4. शरीर में से पानी की कमी का होना। - 5. ज्यादा कैफीन और शराब का सेवन करने से पेट की अम्लता को बढ़ाता हैं। - 6. **धूम्रपान करने से पेट के म्यूकोसा को नुकसान होता है।३) गैस्ट्रिक के क्या लक्षण हो सकते है?गैस्ट्रिक के लक्षण निचे बताये अनुसार हो सकते है , जैसे की, - पेट में गैस बन जाना और सीने में बहुत ही तेज दर्द का होना - मुँह में से खट्टी डकारें का आना - सही तरह से भूख न लगना * सिर में तेज दर्द और चिड़चिड़ापन लगना यदि इस तरह की स्थिति बार-बार हो, जाये तो *GERD** का संकेत हो सकता है। ४ ) गैस्ट्रिक होने पर क्या खाएँ और क्या नहीं खाएँ?#क्या खाएँ# * हल्का और कम मसाले वाला भोजन को खाना * केला, पपीता और सेब बहुत ही लाभदायक है * दही और छाछका सेवन करना * उचित मात्रा में पानी को पीना # क्या न खाएँ#* ज्यादा तले-भुने और मसालेदार वाला भोजन नहीं करना * फास्ट फूड, और कोल्ड ड्रिंक से दुरी बनाये रखना * चाय और कॉफ़ी को कम पीना * देर रात में खाना को नहीं खाना # दैनिक आदतें# * खाना को अच्छे से चबाकर और धीरे-धीरे खाएँ। * भोजन करने के बाद में तुरंत न लेटें। * डेली कसरत या मॉर्निंग में टहलना५) गैस्ट्रिक से बचाव के प्रभावी उपाय क्या है?निचे कुछ उपाय को बताया गया है, जैसे की, - 1. दिन में ३ बार हल्का - हल्का करके भोजन करें, - 2. कम से कम 7 घंटे तक नींद लें। - 3. भोजन करने के बाद में तुरंत नहीं सोना चाहिए। - 4. धूम्रपान और शराब से पूरी तरह से दूरी को बनाएँ - 5. तनाव को कम करने के लिए मॉर्निंग में योग करें। - 6. ज्यादा मसालेदार, तैलीय और जंक फूड से परहेज़ करें।
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