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यूएन समाचार - वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

यूएन समाचार - वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

Author: United Nations

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वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां
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इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:यूक्रेन में रूसी सैन्य हमलों और भीषण सर्दी की दोहरी मार, बुनियादी ज़रूरतों के लिए जूझ रहे हैं आम लोग.ईरान में चिन्ताजनक स्थिति पर, संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से किया - अधिकतम संयम बरतने का आग्रह.ग़ाज़ा में सर्द मौसम में तूफ़ान का क़हर, बाढ़ के गम्भीर ख़तरे वाले क्षेत्रों में रहने के लिए विवश 8 लाख लोग.यूएन एंतोनियो गुटेरेश ने, दरारों, असमानताओं व संघर्षों के दौर में, पारस्परिक सहयोग को बताया - इस वर्ष के लिए अपनी प्राथमिकता.वायु प्रदूषण से जूझते दक्षिण एशिया में, स्वच्छ हवा के लिए समाधानों से उपजी उम्मीद.
इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:सूडान में हिंसक युद्ध के 1000 दिन, आम नागरिकों के लिए नारकीय स्थितियूक्रेन के अनेक शहरों पर व्यापक हमलों में लोगों की परेशानियाँ बढ़ीं, वहीं ईरान में महंगाई के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान अनेक लोग हताहत.अन्तरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका के पीछे हटने की घोषणा,  यूएन ने जताया विश्व समुदाय की सेवा जारी रखने का संकल्प. म्याँमार में हो रहे चुनावों की वैधता और स्वतंत्रता पर सवाल, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने की कोशिश का आरोप.भारत के ओडिशा में यूनीसेफ़ के प्रयासों से कैसे आ रहा है स्कूली लड़कियों के जीवन में बदलाव.
इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:ग़ाज़ा में बारिश, ठंड, जलभराव की वजह से फ़लस्तीनी आबादी के लिए गम्भीर हालात, उधर सूडान में हिंसक टकराव से प्रभावित आबादी की पीड़ा पर गहरी चिन्ता.अफ़ग़ानिस्तान में, 2026 में भी गम्भीर मानवीय संकट बने रहने की आशंका, आर्थिक बदहाली और प्राकृतिक आपदाओं से हालात बदतर.कोविड-19 अब भी बन सकता है गम्भीर संक्रमण की वजह, मगर वैक्सीन है बचाव का एक असरदार उपाय.संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका के बीच समझौता, 17 देशों में मानवीय राहत के लिए 2 अरब डॉलर की मदद.यूएन प्रमुख का नए वर्ष पर सन्देश, वैश्विक शान्ति, न्याय और युद्धों के बजाय निर्धनता के विरुद्ध लड़ाई पर बल.
इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:श्रीलंका में क़रीब एक महीना पहले आए चक्रवाती तूफ़ान दित्वाह से प्रभावित 10 लाख से अधिक लोग अब भी सहायता पर निर्भर.म्याँमार में चुनाव से पहले, हिंसा और दमन के मामलों में तेज़ी पर चिन्ता, उधर मध्य अफ़्रीकी गणराज्य - CAR में भी चुनावों को बताया गया अहम.ईरान के परमाणु कार्यक्रम व अप्रसार के मुद्दे पर सुरक्षा परिषद में नहीं बनी सहमति, आपसी वार्ता के ज़रिए समाधान पर बल.अफ़ग़ानिस्तान के पहाड़ी इलाक़ों में कठोर सर्दियों का प्रकोप, यूएन खाद्य एजेंसी WFP बनी सहारा.यूएन पर्यावरण कार्यक्रम के ‘पृथ्वी चैम्पियन’ पुरस्कार से सम्मानित, भारत की सुप्रिया साहू के साथ एक विशेष बातचीत.
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा वर्ष 2025 के ‘Champions of the Earth’ पुरस्कार के लिए दुनिया भर से चुने गए पाँच लोगों में भारत की सुप्रिया साहू भी शामिल हैं. तमिलनाडु सरकार में सहायक मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत सुप्रिया साहू को, हाल ही में यूनेप ने, ‘प्रेरणा और कार्रवाई’ की श्रेणी में सम्मानित किया है. सुप्रिया अत्यधिक गर्मी से निपटने के लिए व्यावहारिक उपायों पर काम कर रही हैं. इनमें स्कूलों में ‘ठंडी छत’ पहल, प्रकृति की बहाली, और जलवायु जोखिमों को ध्यान में रखकर, ढाँचा विकास को आगे बढ़ाना शामिल है. यूएन न्यूज़ की अंशु शर्मा के साथ एक ख़ास बातचीत में उन्होंने बताया कि तमिलनाडु जैसे प्रदेश के लिए जलवायु परिवर्तन के असर कम करने और अनुकूलन के लिए अभी से तैयार होना क्यों अहम है...
इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:ग़ाज़ा में फ़िलहाल अकाल टला, मगर लाखों लोग अब भी भूख व कुपोषण की चपेट में.सूडान में कोर्दोफ़ान के अल-ओबेद इलाक़े पर हमले की आशंका, नए सिरे से विस्थापन का जोखिम.पारम्परिक चिकित्सा पद्यति पर दूसरा शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में सम्पन्न, दिल्ली घोषणापत्र के साथ, सामने आया वैश्विक स्वास्थ्य रोडमैप.दुनिया भर में बढ़ते मतभेदों, संघर्षों, टकरावों, अनिश्चितताओं और चुनौतियों के हालात में, यूएन मुख्यालय में 'विश्व ध्यान दिवस' की महत्ता पर चर्चा.फ़रवरी 2026 में भारत में होगा एआई शिखर सम्मेलन. इस सिलसिले में यूएन मुख्यालय में हुई प्रारम्भिक चर्चा.
पारम्परिक चिकित्सा पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का दूसरा वैश्विक शिखर सम्मेलन, नई दिल्ली में 17 से 19 दिसम्बर 2025 तक आयोजित किया गया. WHO और भारत सरकार के आयुष मंत्रालय की साझेदारी में हुए इस सम्मेलन में दुनिया भर से नीति - निर्माता, वैज्ञानिक, चिकित्सक और आदिवासी ज्ञान-धारक शामिल हुए. चर्चा का केन्द्र, पारम्परिक चिकित्सा को विज्ञान, साक्ष्य और ज़िम्मेदार व्यवहार के आधार पर स्वास्थ्य प्रणालियों में सुरक्षित और नैतिक तरीक़े से जोड़ने पर रहा.यूएन न्यूज़ की अंशु शर्मा ने, शिखर सम्मेलन के दौरान, आयुष मंत्रालय के जामनगर स्थित आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसन्धान संस्थान की निदेशक डॉक्टर तनुजा मनोज नेसारी के साथ ख़ास बातचीत की, जिसमें उन्होंने शिखर सम्मेलन की प्रमुख प्राथमिकताओं, उभरते साक्ष्यों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवाचारों व आगे की दिशा पर विस्तृत जानकारी दी.
इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:सूडान और ग़ाज़ा में हिंसा के कारण, आम लोगों की पीड़ाएँ हैं जारी, यूएन एजेंसियों के यथासम्भव सहायता प्रयास भीबच्चों पर सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए, कुछ ऑस्ट्रेलिया में लगी पाबन्दियाँप्रकाश उत्सव दीपावली बना अब वैश्विक त्यौहार, यूनेस्को की जीवन्त विरासत सूची में मिली जगहमहिलाओं का स्वास्थ्य केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवारों के लिए है अहम, भारत में WHO की जागरुकता मुहिमदुनिया के अनेक देशों में बढ़ रहा है, पारम्परिक चिकित्सा पद्यति का प्रयोग. अगले सप्ताह नई दिल्ली में WHO सम्मेलन
इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:दक्षिणपूर्व एशिया के अनेक देशों में बाढ़ का क़हर, 1 करोड़ से अधिक लोगों पर गाज.सूडान में हिंसक युद्ध की आग फिर भड़की, और ग़ाज़ा में लोगों के लिए चिकित्सा सुविधा बनी दूर की कौड़ी.मलेरिया पर नियंत्रण में हुई है प्रगति, मगर दवा प्रतिरोध से उपज रहा है एक नया जोखिम.एक भारतीय किशोर - देव करन को मिला यूएन सम्मान, तालाब साफ़ करने की उनकी मुहिम ला रही है रंग.समाज में, विकलांगजन के वास्तविक समावेशन से ही होती है समाज की असल प्रगति.
दिल्ली से सटे नोएडा के 17 वर्षीय देव करन ने ग्रामीण इलाक़ों में तालाबों की अनदेखी को नज़रअन्दाज़ करने के बजाय, कुछ ऐसा करने का बीड़ा उठाया, जिसने अनेक तालाबों की सफ़ाई के लिए, लोगों नई ऊर्जा भर दी है. देव करन ने इस काम के लिए वर्ष, 2024 में Pondora नामक संस्था शुरू की - एक ऐसी पहल जो सामुदायिक भागेदारी और किफ़ायती तकनीक की मदद से भारत के तालाबों का मानचित्रण, पुनर्स्थापन और संरक्षण करती है. उनकी परियोजना, अहम जल-स्रोतों को बचाने व टिकाऊ जल प्रबन्धन के बारे में युवजन व समुदायों को जागरूक एवं सक्रिय बनाती है.देव करन को, जिनीवा स्थित यूएन मुख्यालय में आयोजित युवा कार्यकर्ता सम्मेलन (YAS25) में सम्मानित दुनिया के पाँच चुनिन्दा युवा परिवर्तनकारियों में स्थान मिला है. यह सम्मेलन तकनीक के ज़रिए सामाजिक एवं पर्यावरणीय बदलाव ला रहे युवाओं को पहचान देता है.इस वर्ष सम्मेलन का विषय था “From Hashtag to Action”, यानि ऑनलाइन आवाज़ों को वास्तविक ज़मीनी बदलाव में बदलना.यूएन न्यूज़ हिन्दी की अंशु शर्मा ने, जिनीवा से हाल ही में भारत वापिस लौटे देव करन के साथ, नई दिल्ली स्थित यूएन कार्यलय में ख़ास बातचीत की और उनकी परियोजना के बारे में जानकारी हासिल की.
इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल है:दुनिया भर में, हज़ारों महिलाएँ, अपनों के ही हाथों होती हैं हिंसा की शिकार, इस माहौल में बड़े हो रहे, करोड़ों बच्चे भी संकट में.करोड़ों बच्चे, ख़सरा से बचाने वाली वैक्सीन से हैं वंचित, नतीजतन, 95 हज़ार लोगों की मौतें.दिल्ली की हवा में घुल रहा है विषैला प्रदूषण, स्वास्थ्य आपदा जैसे बने हालात.17 साल की उम्र में एचआईवी से संक्रमित हुईं पूजा मिश्रा. मगर, डर और कलंक को पीछे छोड़कर, कैसे बनीं युवाओं की आवाज़.रियाद में आयोजित वैश्विक सम्मेलन UNIDO) में, मानवता व पृथ्वी की भलाई पर केन्द्रित औद्योगिक विकास पर ज़ोर.
पटना की पूजा मिश्रा का विवाह, 15 वर्ष की आयु में करा दिया गया था और 17 साल की छोटी सी उम्र में उन्हें मालूम हुआ कि वो एचआईवी से संक्रमित हो गई थीं. तब से अब तक अनगिनत चुनौतियों का सामना करते हुए, आज पूजा का संक्रमण पूरी तरह दबा हुआ है, और वो देशभर के युवाओं की मज़बूत आवाज़ बन चुकी हैं. पूजा अब, भारत में एचआईवी के साथ जी रहे लोगों का राष्ट्रीय गठबन्धन (NCPI+) की राष्ट्रीय युवा समन्वयक के रूप में, युवाओं के अधिकार, मानसिक स्वास्थ्य और इलाज जारी रखने की अहमियत पर काम करती हैं और अपने यूट्यूब चैनल “Youth Speak Now” से हज़ारों युवाओं तक भरोसेमन्द जानकारी पहुँचाती हैं.पूजा मिश्रा ने, विश्व एड्स दिवस (1 दिसम्बर) के अवसर पर यूएन न्यूज़ हिन्दी की सहयोगी अंशु शर्मा के साथ एक ख़ास बातचीत में बताया कि किस तरह वह डर और कलंक से निकलकर, नेतृत्व करने और युवाओं को प्रोत्साहित करने के मुक़ाम तक पहुँचीं; और क्यों वह चाहती हैं कि सभी युवा अपनी दवा, अपने हक़ और अपनी आवाज़ के साथ मज़बूती से खड़े हों.
इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...कॉप30 अपने अन्तिम चरण में, जलवायु संकल्पों को ठोस वास्तविकता में बदलने का इम्तेहान.42 करोड़ बच्चे अत्यधिक निर्धनता में जीवन बिताने को विवश, अफ़्रीका और एशिया में है अधिक संख्या.डिजिटल जगत में बढ़ती हिंसा की शिकार बनती महिलाएँ, क़ानूनी सुरक्षा क्यों है ज़रूरी...दुनिया भर में क़रीब साढ़े 3 अरब लोग, आज भी सुरक्षित शौचालय से वंचित, पर्याप्त धन व पक्के इरादे की ज़रूरत.सुरक्षा परिषद में वीटो शक्ति से उत्पन्न होता गतिरोध एक बड़ी समस्या, बहुपक्षीय संस्थाओं में कमज़ोर पड़ता भरोसा.
इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...ब्राज़ील के बेलेम में, यूएन जलवायु शिखर सम्मेलन – COP30 में वैश्विक सरगर्मियाँ, स्वास्थ्य, खाद्य असुरक्षा और प्रवासन जैसे मुद्दों को भी जलवायु कार्रवाई में शामिल किए जाने पर ज़ोर.यूएन मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने, सूडान के अल फ़शर में हुए अत्याचारों को बताया - अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के रिकॉर्ड पर धब्बा.ग़ाज़ा में यूएन सहायता प्रयास जारी, इस बीच 90 प्रतिशत बच्चे मानसिक रोगों की चपेट में.धन की कमी से डगमगा रही है टीबी यानि तपैदिक का अन्त करने की मुहिम, हालाँकि उपचार में सफलता भी.एशिया प्रशान्त के अनेक देशों में, अतिरिक्त पोषण से युक्त गेहूँ और चावल की आपूर्ति से, बच्चों व महिलाओं को अनेक लाभ.
इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...हिंसक टकराव से जूझ रहे सूडान के अल फ़शर शहर में आम लोगों पर भयावह अत्याचारों को अंजाम दिए जाने की ख़बरें, यूएन ने हिंसा पर विराम लगाने का किया आग्रहब्राज़ील के बेलेम में जलवायु सम्मेलन कॉप30 से पहले, महासचिव का आग्रह, बढ़ते तापमान की रफ़्तार को थामना होगासामाजिक विकास के लिए संकल्पों को वास्तविक बदलाव में तब्दील करने के आहवान के साथ दोहा में शिखर बैठक का समापनअफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम पोस्त की खेती पर प्रतिबन्ध के बाद उसमें गिरावट का रुझान जारीक़ानून व्यवस्था की पुनर्बहाली से होकर जाती है, लोकतंत्र की राह, सुनिएगा एक बातचीत
हिंसक टकराव से गुज़र रहे या फिर शान्ति समझौते के बाद लोकतंत्र की दिशा में आगे बढ़ने के लिए इच्छुक देशों में कोर्ट-कचहरी, जेल, क़ानून व्यवस्था अक्सर ध्वस्त हो चुकी होती है, और इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि वहाँ क़ानून के शासन को फिर से बहाल किया जाए. दक्षिण सूडान में यूएन शान्तिरक्षा मिशन (UNMISS) में ‘क़ानून का शासन व सुरक्षा क्षेत्र में सुधार’ विभाग के निदेशक अनीस अहमद ने, यूएन न्यूज़ हिन्दी के सचिन गौड़ के साथ बातचीत में बताया कि देश में ढह चुकी क़ानून व न्यायिक व्यवस्था को फिर से खड़ा करने के लिए सचल न्यायालयों समेत अन्य दीर्घकालिक उपायों का सहारा लिया जाता है ताकि आमजन की समस्याओं का निपटारा हो और संस्थाओं में लोगों का भरोसा बहाल हो सके.कृत्रिम बुद्धिमता (एआई), टैक्नॉलॉजी, भ्रामक व जानबूझकर फैलाई जाने वाली ग़लत जानकारी जैसी समस्याओं से, न्यायिक व क़ानून व्यवस्था की पुनर्बहाली में चुनौतियाँ और गहरी हुई हैं. उन्होंने कहा कि हर देश, हर समाज की तस्वीर अलग होती हैं, और इसलिए वहाँ स्थानीय सन्दर्भ के अनुरूप ही समाधान विकसित किए जाते हैं.  
इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़ियाँ...सूडान के अल फ़शर में, हाल के दिनों में RSF की भयावह हिंसा में साढ़े चार सौ से अधिक लोगों का जनसंहार. भारी संख्या में लोगों का पलायन.पूरे ग़ाज़ा पट्टी में, हाल के इसराइली हवाई हमलों के बावजूद, यूएन एजेंसियाँ सहायता प्रयासों में सक्रिय, इसराइली हमलों में 100 से अधिक लोगों की मारे जाने की ख़बरें.यूक्रेन में ऊर्जा ठिकानों पर रूस के सिलसिलेवार हमलों पर गहरी चिन्ता, युद्ध ले रहा है - टैक्नोलॉजी टकराव का रूप.संयुक्त राष्ट्र के युवा मामलों के सहायक महासचिव डॉक्टर फ़ेलिपे पाउलियर ने अपनी भारत यात्रा के दौरान, देशभर के अनेक युवा परिवर्तनकारियों से की मुलाक़ात.क्या ऐसा सम्भव है कि सामाजिक विकास के मार्ग में कोई भी पीछे नहीं छूटे. कुछ ऐसे ही मुद्दों पर प्रगति का जायज़ा लेने के लिए, 4-6 नवम्बर को, दोहा में हो रहा है – दूसरा विश्व सामाजिक विकास सम्मेलन.
इस साप्ताहिक बुलेटिन की सुर्ख़िया...संयुक्त राष्ट्र हुआ 80 वर्ष का, 24 अक्टूबर को यूएन दिवस के अवसर पर, इस विश्व संगठन के उद्देश्यों के लिए फिर से वैश्विक एकजुटता की अपील.ग़ाज़ा युद्धविराम, व्यापक इसराइल-फ़लस्तीन टकराव के सबसे विनाशकारी चरणों में से एक को समाप्त करने का एक दुर्लभ अवसर, कहा मध्य पूर्व के लिए एक वरिष्ठ यूएन दूत ने.हरे-भरे वन हैं पृथ्वी के फेफड़े और इनसानों की आजीविका का सहारा, मगर फिर भी विशाल पैमाने पर क्यों हो रही वनों की कटाई.साइबर अपराध पर क़ाबू पाने के लिए, एक यूएन कन्वेंशन की जा रही है हस्ताक्षर के लिए प्रस्तुत. दुनिया भर में लोगों को मिल सकेगी धोखाधड़ी से सुरक्षा.विकलांग जन के समावेशन के मुद्दे पर, हाल ही में भारत के गोआ में सम्पन्न हुए - पर्पल फ़ेस्टिवल में हुआ, WeCare नामक फ़िल्म महोत्सव भी.
इस साप्ताहिक बुलेटिन में शामिल हैं...विश्व भर में कुल निर्धन आबादी का 80 फ़ीसदी हिस्सा, सूखा, बाढ़, गर्मी और वायु प्रदूषणों जैसे जलवायु जोखिमों की चपेट में भीग़ाज़ा में नाज़ुक हालात में लागू युद्धविराम के बीच, ज़रूरतमन्द फ़लस्तीनी आबादी तक मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए प्रयास67 करोड़ लोग आज भी भूखे पेट सोने के लिए मजबूर, विश्व खाद्य दिवस पर इस चुनौती पर पार पाने का आहवानयूएन शान्तिरक्षा अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने, व नई उभरती चुनौतियों से निपटने पर चर्चा के लिए नई दिल्ली में बैठकऔर, अपना असर खो रही हैं एंटीबायोटिक दवाएं, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने फिर किया आगाह 
भारत के गोवा राज्य में आयोजित होने वाला 'पर्पल फ़ेस्ट' विकलांग व्यक्तियों के लिए समर्पित एक अनोखा उत्सव है, जो समावेशन, सुलभता और समान अवसरों की भावना को उजागर करता है. इस वर्ष, इस महोत्सव में देश और दुनिया भर से लोग एकत्र हुए. सन्देश स्पष्ट था - सच्चा विकास तभी सम्भव है जब हर व्यक्ति की भागेदारी सुनिश्चित हो.इस अवसर पर यूएन न्यूज़ हिन्दी की अंशु शर्मा ने गोवा के सामाजिक कल्याण मंत्री सुभाष फलदेसाई से बातचीत में यह समझने की कोशिश की कि इस पहल के पीछे राज्य सरकार की क्या सोच और दृष्टिकोण है.
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