Discover
Padhaku Nitin - World Affairs Podcast
Padhaku Nitin - World Affairs Podcast
Author: Aaj Tak Radio
Subscribed: 1Played: 16Subscribe
Share
Copyright © 2026 Living Media India Limited
Description
From power struggles between nations to behind-the-scenes diplomacy, from global conflicts to secret alliances – Padhaku Nitin is now diving deep into the world of International Relations. In this new avatar, we decode the biggest geopolitical events, foreign policy strategies, war rooms, summits, and silent standoffs - all in simple, relatable language with historical context and sharp analysis. Whether it’s the US-China rivalry, India’s global position, West Asia conflicts, nuclear diplomacy, or the politics of the UN - we bring you insights that go beyond the headlines.
देशों के बीच सत्ता की खींचतान से लेकर पर्दे के पीछे होने वाली डिप्लोमसी तक, ग्लोबल टकराव से लेकर गुप्त गठबंधनों तक - पढ़ाकू नितिन ने बदला है रूप और इतिहास के साथ उतर आया है अंतरराष्ट्रीय संबंधों की दुनिया में.
इस नए अवतार में हम दुनिया की सबसे बड़ी जियोपॉलिटिकल घटनाओं, विदेश नीति की रणनीतियों, वॉर रूम की चर्चाओं, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और देशों के बीच चलने वाली नोंक-झोंक को आसान भाषा में समझाते हैं.
चाहे बात हो अमेरिका-चीन की टक्कर की, दुनिया में भारत की भूमिका की, पश्चिम एशिया के संघर्षों की, परमाणु कूटनीति की या फिर संयुक्त राष्ट्र की राजनीति की. यहां आपको सिर्फ खबर नहीं, बल्कि खबर के पीछे की असली कहानी मिलेगी.
देशों के बीच सत्ता की खींचतान से लेकर पर्दे के पीछे होने वाली डिप्लोमसी तक, ग्लोबल टकराव से लेकर गुप्त गठबंधनों तक - पढ़ाकू नितिन ने बदला है रूप और इतिहास के साथ उतर आया है अंतरराष्ट्रीय संबंधों की दुनिया में.
इस नए अवतार में हम दुनिया की सबसे बड़ी जियोपॉलिटिकल घटनाओं, विदेश नीति की रणनीतियों, वॉर रूम की चर्चाओं, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और देशों के बीच चलने वाली नोंक-झोंक को आसान भाषा में समझाते हैं.
चाहे बात हो अमेरिका-चीन की टक्कर की, दुनिया में भारत की भूमिका की, पश्चिम एशिया के संघर्षों की, परमाणु कूटनीति की या फिर संयुक्त राष्ट्र की राजनीति की. यहां आपको सिर्फ खबर नहीं, बल्कि खबर के पीछे की असली कहानी मिलेगी.
14 Episodes
Reverse
रजत कपूर की एक फिल्म है आंखों देखी. बड़ी सुंदर फिल्म है. इसमें मुख्य किरदार है संजय मिश्रा का. जो एक बात कहता है- जब तक मैं खुद अपनी आंखों से नहीं देख लेता, मानूंगा नहीं. वो कहता है कही-सुनी नहीं मानूंगा. आंखों देखी मानूंगा. वेस्ट एशिया में जंग छिड़ी हुई है.. पिछले 4-5 हफ़्तों से तो हम हर एपिसोड पर इसी बारे में बात कह सुन रहे ही हैं. लेकिन आज हमारे साथ एक ऐसी मेहमान हैं, जिनके लिए ये युद्ध आंखों देखी है. पढ़ाकू नितिन World Affairs के इस एपिसोड में हमारी मेहमान हैं. न्यूज़ एंकर और जर्नलिस्ट श्वेता सिंह. श्वेता जी हाल ही में इस युद्ध के दौरान ही Israel गईं. हम जिन जिन इलाकों के नाम सुनते हैं. जैसे टेल अवीव. Israel Lebanon Border. बेत शेमैश. Jordan Israel Border. ये उन सब जगह खुद गईं. वो भी तब जब मिसाइलें लगातार गिर रहीं थीं. इनकी ग्राउंड रिपोर्ट्स में आपको पीछे मलबे का ढेर आसानी से दिख जाएगा. Background में Bomb Sirens, धमाकों की आवाज़ें भी सुनाई पड़ जाएंगी. इस एपिसोड में सुनिए वहां का आंखों देखा हाल.
Deadline! ये शब्द सुनते ही पैनिक सा मचने लगता है न? मन में Anxiety? कईयों के तो हाथ ही कांपने लगते हैं. आज 6 अप्रैल 2026 जो जब हम Padhaku Nitin World Affairs का ये एपिसोड रिकॉर्ड कर रहे हैं. तब भी हम एक डेडलाइन पर ही खड़े हैं. ये डेडलाइन है ट्रंप की. उन्होंने ईरान से कहा था कि 6 अप्रैल तक एक डील कर लें. वरना वो Iran के Infrastructure पर हमले शुरू करेंगे. उधर ईरान ने ऐसा कोई मन बनाया ही नहीं है. Iran के Foreign Minister Araghchi कह रहे हैं कि Trust level is at zero. तो फिलहाल कोई डील होती तो नहीं दिख रही है. लेकिन दरअसल ये डील क्यों नहीं हो रही है? आजकल इसपर बात करेंगे. US और Iran दोनों पक्षों की तरफ़ से कौन है जो इसमें अड़ंगा डाल रहा है. और ये भी कि अगर बाई चांस डील हो भी गई जंग रुक भी गई. तो आने वाले दिनों में ईरान का हाल क्या होने वाला है? खामेनेई सीनियर तो जा चुके. खामेनेई जूनियर अपना चेहरा तक नहीं दिखा रहे हैं. सामने आ रहे हैं तो बस IRGC के नए नए कमांडर्स. तो भी जानेंगे कि कहीं Iran Guard state बनने की तरफ़ तो नहीं जा रहा है. कहीं पाकिस्तान के बगल में एक और पाकिस्तान तो नहीं बनने जा रहा है? पूछेंगे सब कुछ Vishwajeet singh Akhawat से. VIF में रिसर्चर हैं आप इन्हें पिछले एपिसोड में भी सुन चुके हैं. West Asia में IRGC पर इनकी MPhil है. तो इनसे अच्छा कौन समझाएंगा. क्योंकि ये है Padhaku Nitin जहां हम कहते हैं एक लाइफ़ है… जानना सब है प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: रोहन भारती
फरवरी 2026 के आखिरी दिन, ट्रंप ने वेस्ट एशिया में जंग की शुरूआत कर दी थी. वही ट्रंप जो कि खुद को No war President कहते थे और सफ़ाई दी कि परेशान मत होइए आप लोग, बस यूं जाएंगे और 4 हफ़्तों में रिजीम चेंज करके जंग ख़त्म कर देंगे. सिंपल! लेकिन हालात आज ऐसे हो गए हैं कि न तो 4 हफ़्तों में जंग ख़त्म हुई है, न ढंग से रिजीम चेंज. ऊपर से जिस ईरान को ट्रंप से हिसाब से अब तक टूट जाना चाहिए था. वही ईरान स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर कब्ज़ा किए बैठा है. तेल भी अटका रखा और अमेरिका इज़रायल समेत वेस्ट एशिया के कई देशों की जान भी. उधर अब तक जिस जंग को ट्रंप मिसाइलों के ज़रिए लड़ रहे थे. उसी जंग में ट्रंप अब अमेरिकी सैनिक उतार रहे हैं. ट्रंप ने 4 हज़ार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक(US Marines) और 82nd Airborne Division भेज दी है. Boots on Ground आ चुके हैं. उधर ईरान के अंग्रेज़ी अख़बार ने उनका स्वागत किया है अपने अख़बार के पहले पेज पर लिखा है “Welcome to Hell”. तो लगातार बदलते हालातों के बीच, बात ज़रूरी है. इसलिए Padhaku Nitin World Affairs के इस एपिसोड में बात Iran War पर ही करेंगे. जानेंगे कि पिछले चार हफ़्तों में किसने क्या खोया? क्या पाया? जानेंगे कि जंग का पांचवा हफ़्ता क्या किसी ख़तरे का निशान है? इस पांचवे हफ़्ते में क्या नया होने को है? रणनीतियां कैसे बदल रही हैं? और क्या इस सबके बीच ट्रंप की कुर्सी को ख़तरा तो नहीं है? पूछे ये सारे सवाल हमारे नए मेहमान से. Dr. Vishwajeet Singh Akhawat हमारे साथ हैं. Vivekananda International Foundation में Research Associate के तौर पर काम करते हैं. West Asia और स्पेशली Iran के संदर्भ में सालों से पढ़ लिख रहे हैं. इनकी MPhil की रिसर्च का टॉपिक था Role of IRGC in Iranian Politics. और इनका कोर सब्जेक्ट है, Iranian Security और Foreign Policy.
Iran War का असर अब बड़ी बड़ी कंपनियों के शेयर्स से लेकर फुटपाथों तक दिखने लगा है. चाय वाले तक चाय के दाम बढ़ा रहे हैं. उधर ट्रंप भी Confused नज़र आ रहे हैं. उन्होंने कहा था कि जंग 4 हफ़्तों में ख़त्म होगी. चौथा हफ़्ता ख़त्म होने को ही है. ज़रा देख समझ लेते हैं कि इस Deadline में ट्रंप ने क्या खोया क्या पाया? क्या वो वादा निभा पाएंगे? या Deadline Cross होने ही वाली है? कोई रास्ता निकल पाया है क्या? या दुनिया अब भी इस जंग में लंबे समय के लिए फंसने वाली है? पूछेंगे ये सारे सवाल हमारे नए मेहमान से. Prof. जजति पटनायक से. JNU के Centre of West Asian Studies में पढ़ाते हैं. पिछले 28 सालों से West Asia रीजन पर इनकी पकड़ रही है. एपिसोड पूरा सुनिएगा प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
Geopolitics में भी पिछले महीने कुछ ऐसा घटा है जिसका असर स्क्रीन और सोशल मीडिया छोड़ कर सीधा भारतीयों की रसोई और वाहनों की टंकियों पर दिखने लगा है. और अब लगभग पूरी दुनिया Iran का नाम भी जानती है. America भी. उन्हें ये भी पता है कि LPG की किल्लत की ख़बरें आ रही हैं. पेट्रोल भी महंगा होने की संभावना है. और उनका इंट्रेस्ट इस बात में भी बढ़ने लगा है कि जाना जाए… क्यों हो रहा है ये सब? Padhaku Nitin World Affairs का ये एपिसोड इसी पर. जानिए कि West Asia में ऐसा क्या चल रहा है कि पूरी दुनिया वहां देख रही है? पिछले हफ़्तों में अब क्या बदला है? कब तक बदलेगा? ट्रंप की दिक्कतें-मजबूरियां. Iran में नए लीडर की मजबूरियां. Europe और West Asia के अलग देशों की मजबूरियां.. ये सब समझिए Professor Mohsin Raza से. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: सूरज सिंह
West Asia में जंग भड़क चुकी है और आप भी इसे महसूस कर रहे होंगे। सोशल मीडिया की बहसों से लेकर टीवी डिबेट्स तक… अख़बारों की सुर्खियों से लेकर गली–नुक्कड़ की चर्चाओं तक, हर जगह इसी टकराव की गूंज है. पिछले एपिसोड में हमने Padhaku Nitin World Affairs पर Ambassador Anil Trigunayat जी के साथ एक बेहद अहम और गहरी बातचीत की। अगर आपने वो एपिसोड नहीं देखा है, तो ज़रूर देखिएगा — क्योंकि उसमें War के इर्द-गिर्द चल रही Diplomacy पर कई ऐसी Exclusive बातें सामने आईं, जो आपको कहीं और सुनने को नहीं मिलेंगी। इस एपिसोड में आज बात हुई है War के Military पक्ष की. मेहमान हैं Defence Expert Sandeep Unnithan. आप इन्हें Padhaku Nitin पर पहले भी देख चुके हैं. लेकिन आज इनकी मौजूदगी सिर्फ़ एक चर्चा नहीं, बल्कि एक ज़रूरत है. क्योंकि इस वक्त ज़रूरी है कि शोर से अलग हटकर War का ठंडे दिमाग़ से Strategic Analysis किया जाए. आख़िर तक सुनिएगा प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: रोहन भारती
जिस जंग के बारे में हम लगभग हर दूसरे हफ्ते Padhaku Nitin World Affairs में बात करते थे, वह पिछले दो दिनों में इतनी तेज़ी से escalate हुआ है कि यकीन करना मुश्किल है. आज से ठीक एक हफ्ते पहले तक डोनाल्ड ट्रंप जिन खामेनेई के साथ नेगोशिएशन टेबल पर थे, वही खामेनेई अब 40 शीर्ष कमांडरों समेत US–Israel की स्ट्राइक्स में मारे जा चुके हैं. ईरान ने जहां-जहां अमेरिका के बेस थे, वहां-वहां जवाबी हमले किए हैं। पूरा वेस्ट एशिया अब इस युद्ध की गिरफ़्त में आता दिख रहा है। इसीलिए इस एपिसोड में चर्चा सिर्फ इसी मुद्दे पर होगी. हमारे मेहमान आपके जाने-पहचाने हैं.. एंबेसडर अनिल त्रिगुणायत। पिछले तीन दशकों में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व दुनिया के अलग-अलग देशों में किया है. जॉर्डन, लीबिया और माल्टा में वे राजदूत रह चुके हैं. यानी वेस्ट एशिया और उसकी जटिलताओं को वे गहराई से समझते हैं. अंत तक बने रहिए, पूरा एपिसोड सुनिएगा और शेयर ज़रूर कीजिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: सूरज सिंह
पाकिस्तान का बॉर्डर जिससे मिल जाए, उससे उसका दिल मिलना अक्सर नामुमकिन सा ही होता है. ये बात हाल ही में तालिबान को फिर याद आई. क्योंकि 22 फरवरी, 2026 को पाकिस्तान ने अफ़गानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में AirStrikes कीं. पाकिस्तान ने कहा कि ये सब उसने TTP और IS-K जैसे आतंकी संगठनों को टार्गेट करने के लिए किया. जबकि अफ़गानिस्तान ने खुलासा किया कि इन एयरस्ट्राइक्स में दरअसल बच्चे और सिविलियंस मारे गए. तालिबान सरकार ने साफ़ कर दिया है कि अब पाकिस्तान को करारा जवाब मिलेगा. उधर, ईरान की घेराबंदी करने वाले ट्रंप न जाने क्या चाहते हैं? डरा तो रहे हैं, मगर करेंगे क्या? फिर से कोई डील? या वेनेज़ुएला वाला हाल? दोनों मुद्दों पर चर्चा ज़रूरी थी तो सोच ऐसे मेहमान को बुलाया जाए जिनकी महारथ दोनों ही विषयों पर बराबर हो. Padhaku Nitin World Affairs के इस एपिसोड में देखिए-सुनिए Prof. Mohsin Raza Khan को. जो हमारे पुराने मेहमान हैं, International Studies के प्रोफेसर हैं. आजकल यूट्यूब पर Prof. K Show नाम का यूट्यूब चैनल भी चला रहे हैं. तो पहले ये सुनिए, फिर वो देखिएगा प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: सूरज सिंह
अभी साल के सिर्फ़ दो महीने बीते हैं और geopolitics न जाने क्या-क्या रंग दिखा रही है। दुनिया के अलग-अलग कोनों में इस दौरान काफ़ी कुछ घट चुका है। कुछ देशों पर indirect कब्ज़ा हो चुका है, और कुछ देशों की arm-twisting की जा रही है। भारत के संदर्भ में कहें तो इन दो महीनों में दो बड़ी deals हो चुकी हैं — mother of all deals। पिछले महीने के आख़िरी हफ़्ते में उस पर मोहर लगी, और उसके अगले ही हफ़्ते US-India की भी एक deal हुई। हमने दोनों पर ही बात की है। एक बार Professor Mohsin Raza वाला एपिसोड भी देखिएगा, और दूसरा Professor Ummu Salma Bava के साथ। Professor Bava आज भी हमारी मेहमान हैं। वे Germany के highest civil honour से सम्मानित हैं, Ministry of External Affairs के Foreign Service Institute में guest faculty हैं, और UGC Europe Area Studies Programme की director रह चुकी हैं। मुद्दा फिर से इनके expertise का है — Europe। कुछ दिन पहले Germany के Munich में Munich Security Conference हुई। Europe के कई देशों के नेता और US सरकार के कई representatives वहां आए। कई बड़े, defining बयान दिए गए, जिन्होंने यह तस्वीर और साफ़ कर दी कि Europe और US के बीच का मनमुटाव अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है। तो इस एपिसोड में उस पर ही बात की। साथ ही France के President Macron भी अपने भारत दौरे पर हैं — आज मुंबई में PM Modi से मिले हैं। इसलिए Macron की इस visit के मायने भी समझिए, एपिसोड पूरा सुनिएगा। प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: सूरज सिंह
मॉडर्न प्रजातंत्र के संदर्भ में अक्सर कहा जाता है कि चुनाव किसी त्योहार से कम नहीं होते। लाइन घिसी-पिटी लग सकती है, लेकिन बात सच है। अगर चुनाव को लेकर भाव त्योहार जैसा न भी हो, तो भी उसका तामझाम और तैयारियाँ किसी उत्सव से कम नहीं होतीं। अभी हमारे पड़ोस में, बांग्लादेश में, चुनाव होने जा रहे हैं। 12 फ़रवरी को बांग्लादेश में 300 सीटों के लिए 12.7 करोड़ मतदाता मतदान करने वाले हैं। यूँ तो यह किसी आम चुनाव जैसा लग सकता है, लेकिन 2024 में बांग्लादेश में जो हुआ, उसके बाद ये चुनाव देश के लिए वाकई make-or-break साबित हो सकते हैं। Padhaku Nitin World Affairs के इस एपिसोड में चर्चा बांग्लादेश पर ही है। इस बार के बांग्लादेश चुनाव इतने खास क्यों हैं? शेख हसीना के बिना हो रहा यह पहला चुनाव किस तरह का है? उनके प्रति जो असंतोष था, क्या वह उनके जाने के बाद भी कायम है? बांग्लादेश का Gen Z अब किस ओर देख रहा है? इन्हीं सवालों पर हमने बात की ढाका में मौजूद अपने पत्रकार मित्र सलाहुद्दीन शोएब चौधरी से, जो बांग्लादेश के Blitz अख़बार के एडिटर हैं। वह पहले भी हमारे मेहमान रह चुके हैं—वह एपिसोड भी देखिए-सुनिए, और इस एपिसोड को भी अंत तक ज़रूर देखिए। प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: अमन पाल
Deal और War. पिछले दो-तीन सालों को देखें तो ऐसा मालूम होता है कि Geopolitics इसी के इर्द गिर्द घूमती रहती है. ट्रंप ने इसी शब्द के आसपास अपनी पूरी geopolitics रच रखी है. उन्होंने एक डील करने का ऐलान फिर से कर दिया है. इस बार भारत के साथ. सोमवार शाम पहले ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट लिखा और बताया कि देखो भारत और US की डील होने वाली है. US ने भारत के प्रति जो ट्रैरिफ लगाए थे उनमें नरमी बरती है. कहा मोदी जी मेरे इतने अच्छे दोस्त हैं कि भारत भी हम पर अब से मात्र 0% टैरिफ लगाएगा. और हम भारत पर 18% टैरिफ़ लगाएंगे. उस के बाद से ही सोशल मीडिया और देश में बवाल मचा हुआ है . एक तबका नाराज़ है. एक बहुत खुश है. मार्केट उछल रहा है. उधर विपक्ष कह रहा है कि मोदी जी झुक गए हैं. तो Padhaku Nitin World Affairs के इस Episode में इस डील का ही रेशा रेशा खोला गया है. इस ऐलान के बाद से कौन से सवाल हैं जिनके जवाब मिल गए हैं? कौनसे सवालों के जवाब अभी भी नदारद हैं? कौनसे नए सवाल खड़े हो गए हैं? और इनमें परते क्या हैं? Epstein और America Iran के मसले को भी छुआ. क्योंकि हमारे साथ एक ऐसे गेस्ट हैं जो इन सभी मुद्दों पर बराबर अथॉरिटी रखते हैं. Prof. Mohsin Raza. हमारे Regular मेहमान हैं. क्योंकि ये बातें बड़ी चटपटी तरह से समझाते हैं और आपको भी पसंद आते हैं. पूरा पॉडकास्ट देखिएगा और चैनल Subscribe भी करना न भूलिएगा. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: रोहन भारती
World Order अब स्मूदली नहीं बदल रहा है, समीकरण बिखर रहे हैं. टूट रहे हैं नए समीकरण बन रहे हैं. ये बात पिछले हफ़्ते Davos में गूंजी. लेकिन इसका असर brussels से लेकर दिल्ली तक देखने को मिल रहा है और ब्रसेल्स-दिल्ली दोनों को देखने को मिल रहा है. 26 जनवरी की परेड में चीफ़ गेस्ट रहीं European Union की Commissioner Ursula Von der leyen और उसके अगले ही दिन हुई एक बड़ी डील India-EU का FTA. ख़ास बात ये है कि ये डील 18 साल से अटकी हुई थी. लेकिन फिर अचानक क्या हुआ कि इतनी बड़ी डील जिससे India-EU का ट्रेड 250 Billion Dollar का बनने की ओर है. वो एकदम से हो गया? दरअसल यही Geopolitics है. दुनिया के एक कोने में हलचल होती है, Shock Waves दुनिया भर में फैलती है और कुछ बड़ा और अहम घट जाता है. जैसे कि ये डील. तो आज पहले तो इसी डील को समझेंगे. समझेंगे कि क्यों PM Modi ने इसे कहा Mother of all Deals? इस डील से आम आदमी को क्या फायदा पहुंचेगा? इस डील के अनाउंस होते ही अमेरिका क्यों चिढ़ रहा है? ये सब समझेंगे एक ऐसी एक्सपर्ट से जिन्होंने इस डील को बहुत क्लोज़ली observe किया. डील जिस कमरे में हुई ये खुद वहां मौजूद थीं. Germany के Highest Civil Honour से सम्मानित हैं. Ministry of External Affairs के Foreign Service Institute में Guest Faculty हैं. UGC Europe Area Studies Programme की Director रह चुकी हैं. School Of International Studies JNU की Chairperson भी. नाम है Professor Ummu Salma Bava. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: सूरज सिंह
अगर आप सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं तो पिछले महीने दो महीने में आपने ईरान से आती तस्वीरें ज़रूर देखी होंगी. कभी तेहरान में पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाती ईरानी जनता. कभी ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की फोटो को सिगरेट से जलाती महिला का फोटो. कभी मस्जिद को नुकसान पहुंचाते ईरानी प्रदर्शनकारी. ये वही ईरान है जिसने 1979 में Islamic Revolution देखा. ये वही ईरान है जो एक दौर में निहायत ही Westernised था और फिर वो दौर भी जब हिजाब ठीक से न पहनने पर एक महिला पहले अरेस्ट की गई फिर कस्टडी में ही उसने दम तोड़ा. पिछले डेढ़ दो महीने से ईरान में सरकार के खिलाफ़ भयंकर प्रदर्शन जारी थे. ईरानी सरकार ने उसे दबाने के लिए बहुत सख़्त कदम भी उठाए. लेकिन मामला Domestic से Geopolitical तब बन गया जब Venezuela में ‘Democracy’ स्थापित करके आए ट्रंप ने कहा- मैं यहां भी आ जाऊं क्या? यहां से मामला बहुत ज़्यादा पेचीदा हो गया है. तो आज इसे ही समझते हैं. समझेंगे कि Iran में ये प्रदर्शन छिड़े क्यों? इनके पीछे सिर्फ़ जनता का असंतोष था या कि कुछ और ताकतें भीं? Iran में होते Protest ने कैसे भारत के चावल व्यापारियों तक को तंग कर रखा है? और Iran ऐसा क्या करने जा रहा है जिससे भारत का 60% Energy Sector सकते में आ सकता है? Padhaku Nitin World Affairs के इस एपिसोड में हमने ये सवाल पूछे हमारे मेहमान और Ex-Ambassador Anil Trigunayat जी से. पिछले 3 दशकों में उन्होंने भारत को दुनियाभर में अलग अलग जगहों पर Represent किया है. Jordan, Libya Malta में Ambassador भी रहे यानि Middle East को जानते समझते बहुत अच्छे से हैं. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्स: रोहन भारती
BMW, Volkswagen, Audi और Mercedes-Benz. इन गाड़ियों में कॉमन क्या है? एक ये कि भारतीय सड़कों पर आपको इन गाड़ियों की धूम खूब दिखती है. मिडल क्लास की Aspirations का हिस्सा रही है ये गाड़ियां. लेकिन एक Common बात ये भी है कि ये गाड़ियां इस बात का प्रमाण है कि Europe में हमारा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर जर्मनी है. ये सारी जर्मन गाड़ियां हैं जिनमें भारतियों का इंट्रेस्ट पुरानी बात है, लेकिन नई बात है Germany का भारतीयों में इंट्रेस्ट. ये तस्वीरें देखिए ये हैं Germany के Chancellor फ्रेड्रिक मर्ज़ जो कि State Visit पर भारत के दो दिनी दौरे पर आए हैं. उन्होंने पहले पीएम मोदी के साथ अहमदाबाद में पतंग उड़ाई फिर वो बैंग्लोर पहुंचे. साथ में लाए 23 जर्मन CEOs और Industry leaders को. साथ में प्रेस कांफ्रेंस की, और इस बात पर ज़ोर दिया कि वो भारत को Indo-Pacific नें जर्मनी का साथी बनाना चाहते हैं. अभी जर्मन चांसलर आए हैं. फिर पोलिश प्रेसिडेंट आने को हैं. फ्रेंच प्रेसिडेंट मेंक्रों भी आने को है फरवरी में. और उससे पहले 26 जनवरी के कार्यक्रम में European Union की हेड Ursula Von der Leyen भी आने को हैं.लेकिन सवाल उठता है कि आखिर यूरोप को अचानक भारत में इंट्रेस्ट क्यों आने लगा है? इसमें बहुत पेंच हैं. बहुत Complexities हैं. जिन्हें हमारे लिए Decode किया है इस एपिसोड में मेहमान बनकर आईं Dr. Sheetal Sharma ने. वो Associate Professor हैं JNU में. European Studies पढ़ाती हैं.प्रड्यूसर: मानव देव रावतसाउंड मिक्स: अमन पाल

















