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Author: The Quint

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सुनिए दिन की बड़ी खबर क्विंट हिंदी के Big Story पॉडकास्ट में
285 Episodes
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दोस्तों से बात करना हो या फिर किसी फैमिली ग्रुप का हिस्सा बनना हो, आज वॉट्सऐप के जरिए लोग एक दूसरे के साथ जुड़े हैं. वॉट्सऐप से चैटिंग के अलावा फोटोज और वीडियोज भी लगातार शेयर होती रहती हैं, जिससे लोगों की जिंदगी आसान बन चुकी है. लेकिन वॉट्सऐप पर आप किससे क्या बातें कर रहे हैं, ये कितना सिक्योर है, इस पर अब सवाल उठने लगे हैं. वॉट्सऐप भले ही दावा करता है कि चैट एंड टू एंड एन्क्रिप्टेड होती हैं और वो खुद भी इसे एक्सेस नहीं कर सकता है. लेकिन हाल ही में हुई कुछ घटनाओं ने इन दावों को हवा साबित कर दिया है. फिर चाहे वो दिल्ली दंगों में हुई गिरफ्तारियां हों या फिर सुशांत सिंह मामले में बॉलीवुड के बड़े नाम सामने आना. सभी में वॉट्सऐप ने अहम भूमिका निभाई. जांच एजेंसियों के लिए ये काफी कारगर टूल साबित हो रहा है. अब ये टूल इस तरह कानूनी कार्यवाही करने के लिए कितना सही है और कितना ग़लत, और इससे हमारी प्राइवेसी का अधिकार का कितना उलंघन होता है? आज NCB की जांच में व्हाट्सएप के इस्तेमाल से जुड़े इसी तरह के पॉइंट्स पर पॉडकास्ट में बात करेंगे. रिपोर्ट: फ़बेहा सय्यद असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई म्यूजिक: बिग बैंग फज
कोरोना महामारी के बीच तारीखों का ऐलान होते ही बिहार में चुनावी बिगुल बज चुका है. राजनीतिक दल अब राज्य में खुद को मजबूत करने में जुटे हैं और वर्चुअल तरीके से लोगों तक पहुंचने की कोशिश हो रही है. हालांकि अभी तक सीट शेयरिंग और उम्मीदवारों का ऐलान नहीं हुआ है. बिहार चुनाव को लेकर जहां पहले ये कहा जा रहा था कि नीतीश के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी एक बड़ा फैक्टर हो सकता है, वहीं सी-वोटर सर्वे ने बताया कि सरकार एनडीए की ही बनती हुई दिख रही है. चुनाव आयोग ने 25 सितंबर को बताया कि बिहार में 3 चरणों में चुनाव होगा और 28 अक्टूबर को पहली वोटिंग होगी. इसके अलावा 10 नवंबर को नतीजे भी सामने आ जाएंगे. चुनाव की तारीखों के ऐलान के ठीक बाद सी- वोटर का एक सर्वे सामने आया. इस सर्वे में लोगों से कई सवाल पूछे गए थे, जिनमें एक सवाल ये भी था कि सीएम के तौर पर उनकी पहली पसंद कौन है, साथ ही ये भी पूछा गया कि बिहार की जनता के लिए मौजूदा सबसे बड़े मुद्दे कौन से हैं. अब बिहार में आखिर किन फैक्टर्स को ध्यान में रखते हुए भविष्यवाणी की जा सकती है और कौन से वो मुद्दे हैं जिन पर इस बार बिहार की जनता वोट करने जा रही है. इसी तरह के सभी मुद्दों को लेकर आज इस पॉडकास्ट में बात करेंगे. रिपोर्ट: फ़बेहा सय्यद असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई म्यूजिक: बिग बैंग फज
संसद द्वारा विवादास्पद फार्म बिलों को पारित करने के कुछ दिनों बाद इन बिलों के विरोध में, शुक्रवार, 25 सितंबर को देशव्यापी किसान आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें दो दर्जन से अधिक किसान संगठनों ने भारत बंद के आह्वान पर अपना समर्थन देने की घोषणा की. कांग्रेस, टीएमसी, लेफ्ट, AAP और समाजवादी पार्टी सहित कई बड़े विपक्षी दलों ने भी किसानों के इस विरोध को समर्थन दिया है. जिन बिलों को लेकर सारा मुद्दा खड़ा हुआ है उनके बारे में सरकार कह रही है कि किसानो के लिए काफी फायदेमंद हैं, लेकिन किसान कहता है कि इन नए नियमों से उसका सिर्फ नुकसान ही होगा. अब तक इन कृषि बिलों के विरोध में आप ने विशेषज्ञों की बातें सुनी होंगी, सरकार की बातें सुनी होंगी लेकिन आज इस पॉडकास्ट में आपको सिर्फ किसानों के मन की बात ही सुनायेंगे. रिपोर्ट: फ़बेहा सय्यद असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई म्यूजिक: बिग बैंग फज
संसद का मानसून सत्र कोरोना वायरस के चलते रद्द कर दिया गया है. 14 सितंबर से शुरू हुआ ये सत्र जितना छोटा था उतना ही हंगामे भरा भी रहा. विपक्ष के भारी विरोध के बीच कई बिल पास कर दिए गए. सबसे ज्यादा चर्चा में कृषि बिल रहा, जिसे लेकर राज्यसभा में जमकर बहस हुई और बात तोड़फोड़ तक भी पहुंच गई. संसद का ये मानसून सत्र इतिहास में सबसे अनोखा था, क्योंकि कोरोना महामारी के चलते कई नियम बदले गए थे. पहली बार सांसदों को बैठकर भाषण देते हुए देखा गया. इस सत्र को 1 अक्टूबर तक चलना था, लेकिन इसी बीच करीब 30 से ज्यादा सांसद कोरोना पॉजिटिव पाए गए. इसके बाद सभी दलों ने सुरक्षा को देखते हुए 8 दिन पहले ही संसद सत्र खत्म करने पर सहमति जताई. लेकिन इन 10 दिनों के सत्र में कुल 25 बिल पास करा दिए गए और 6 नए बिलों को पेश किया गया. अब इन 10 दिनों की कार्यवाही में हाई वोल्टेज ड्रामे के साथ-साथ सरकार के पास आंकड़ों की कमी को भी देखा गया. आज पॉडकास्ट में आपको मानसून सत्र में हुए हाई वोल्टेज ड्रामा का एक क्विक रिकैप तो देंगे ही साथ ही आप को बतायंगे कि इन 10 दिनों में जो 25 बिल पास किये गए उन में कौन कौन से बिल इस तरह पास हुए कि विपक्ष को सदन का बहिष्कार करना पड़ा. रिपोर्ट: फ़बेहा सय्यद असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई म्यूजिक: बिग बैंग फज
फरवरी 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई दिल्ली हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस जो जांच पिछले 6 महीने से कर रही थी वो अब आखिर कार खत्म हुई. और इस पूरी हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने 17000 पन्नो की चार्जशीट दायर की है. इस चार्जशीट में पुलिस ने ऐसी कई बातें कही हैं जिन पर सवाल उठ रहे हैं. वो इसलिए क्यूंकि पुलिस के दावे फैक्ट्स के साथ मेल नहीं खा रहे हैं. ऐसा पिछली कई चार्जशीट में भी हुआ है कि एविडेंस होते हुए भी पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया उल्टा, उन चीजों को पुलिस ने झूठा करार दे दिया. इसीलिए फिर चाहे बुद्धिजीवी हों या फिर पूर्व आईपीएस अफसर सभी दिल्ली पुलिस पर बार-बार 'बायस्ड' होकर जांच करने के आरोप लगाते आ रहे हैं, यहाँ तक अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकारो के लिए काम करने वाली आर्गेनाईजेशन, एमनेस्टी की दिल्ली दंगो की रिपोर्ट में पुलिस को ही भीड़ का साथ देने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है. दिल्ली हिंसा की इस लम्बी जांच के बाद, कई कड़ियाँ है जो आपस में मेल नहीं खाती हैं, खास कर पुलिस के आरोप किसी अंदाजे या फिर बिलीफ पर बेस्ड दिख रहे हैं. इन्ही मुद्दों को लेकर आज दिल्ली पुलिस की इस FIR 59 वाली चार्जशीट पर पॉडकास्ट में बात करेंगे. रिपोर्ट: फ़बेहा सय्यद असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई म्यूजिक: बिग बैंग फज
मीडिया को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के तौर पर देखा गया है. किसी भी जानकारी को एक जगह से दूसरी जगह तक तेजी से पहुंचाने का काम आज मीडिया कर रहा है. पल भर में पता चल जाता है कि कौन से शहर या फिर दुनिया के कौन से देश में क्या चल रहा है. लेकिन भारत में पिछले कुछ वक्त से मीडिया पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. कहा जा रहा है कि मीडिया अपनी ताकत का इस्तेमाल समाज को बांटने के लिए कर रहा है और लोगों के दिमाग में जहर भरा जा रहा है. हाल ही में सुदर्शन टीवी के एक विवादित शो यूपीएससी जिहाद ने इस बहस को और आगे बढ़ाने का काम किया. जिसमें एक खास समुदाय को टारगेट किया जा रहा था. इस विवादित शो को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है और इस पर फिलहाल कोर्ट ने रोक लगा दी है. इस केस की अलग-अलग सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया की मनमानी को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े किए. वहीं केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया से खतरनाक डिजिटल मीडिया को बताया. केंद्र ने कहा है कि इस पर रेगुलेशन की जरूरत है. इसी पूरे मामले को लेकर आज इस पॉडकास्ट में बात करेंगे कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद और क्विंट के लीगल एडिटर वकाशा सचदेव से. रिपोर्ट: फ़बेहा सय्यद असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई म्यूजिक: बिग बैंग फज
रविवार, २० सितम्बर को संसद में जो अफरा-तफरी का आलम हुआ, उसके बाद 8 सांसदों को एक हफ्ते के लिए RS से सस्पेंड कर दिया गया है. इस सस्पेंशन के पीछे वो सेशन है जिस में किसानों से जुड़े दो ऐसे बिल पारित हुए, जिनके खिलाफ विपक्ष ने जमकर विरोध किया. संसद के उच्च सदन में वो मंज़र देखने को मिला जो शायद ही पहले कभी देखा गया हो. माइक टूटे, कुर्सियां टूटी, किताबें और पर्चे फाड़े गए. और विपक्ष ने सरकार पर ये आरोप भी लगाया कि बीजेपी पार्लियामेंट डेमोक्रेसी का क़त्ल कर रही है. संसद में यही देखते आय हैं कि अहम बिलों पर विपक्ष को वोटिंग का अधिकार दिया जाता है, और एक हेल्दी डिसकशन बाद वोटिंग के आधार पर ही बिल पास होता है. लेकिन जब चर्चा की गुंजाइश ही ख़त्म कर दी जाय तो उसका मतलब क्या है? आज बिग स्टोरी में संसद के वो नियम और कानून दोबारा समझेंगे जिन्हे शायद कभी स्कूल में पढ़ा होगा, लेकिन अब भूल गए हैं. पॉडकास्ट में पार्लियामेंट डेमोक्रेसी से जुड़े कुछ बेसिक चीज़ें रिफ्रेश करने के लिए सुनिए सीनियर जर्नलिस्ट और पोलिटिकल एनालिस्ट, जावेद अंसारी को. और साथ ही सुनिए पार्लिअमेंट्री रिसर्च सर्विस (PRS) के चक्षु रॉय को भी. रिपोर्ट: फ़बेहा सय्यद वॉइस ओवर: नमन मिश्रा असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई म्यूजिक: बिग बैंग फज
'द सोशल डिलेमा' डेढ़ घंटे का एक डोक्यू-ड्रामा है जिसे देखते-देखते आपको उन सवालों का भी जवाब मिल सकता है जो आपने कभी शायद पूछे भी न हों या फिर उनके बारे में कभी खयाल तक न आया हो. मसलन फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हम 'फ्री' में अकाउंट बना तो लेते हैं, लेकिन लेकिन हमें ये अंदाजा भी नहीं लगता कि हमारा 'सो-कॉल्ड फ्री अकाउंट' ही वो करेंसी है जिसकी इन कम्पनीज को जरूरत है. और इसी वजह से हम इनके लिए केवल यूजर नहीं बल्कि एक प्रोडक्ट हैं. इस फिल्म में फेसबुक और उबर में काम करने वाला एक पूर्व कर्मचारी भी कहता है कि सोशल मीडिया पर यूजर दरअसल कम्पनीज के लिए 'लैब रैट' होते हैं. आखिर ये कैसा एक्सपेरिमेंट चल रहा है जिसका हमें पता नहीं चल पा रहा? आखिर किस तरह हम से ये बात छुपाई जाती है कि हम इस यूनिवर्सल साइबर एक्टिविटी में फ्यूल का काम कर रहे हैं? इसमें कोई एथिक्स हैं भी या नहीं? आखिर इससे कैसे बचें, और हमें कौन बचाएगा? इन में से कुछ सवालों के जवाब जो दिए जा सकते हैं वो आज बिग स्टोरी में समझेंगे ऑल्ट न्यूज़ फैक्ट चेकिंग वेबसाइट के सम्पादक, प्रतीक सिन्हा से. और साथ ही बात करेंगे जसप्रीत बिंद्रा से जो बड़ी कम्पनीज को डिजिटल और टेक्नोलॉजी के मामलों में सलाह देते हैं. रिपोर्ट: फ़बेहा सय्यद गेस्ट: प्रतीक सिन्हा, फैक्ट चेकिंग वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ के सम्पादक; जसप्रीत बिंद्रा, डिजिटल और टेक्नोलॉजी मामलों के विशेषज्ञ इनपुट्स: सायरस जॉन असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई म्यूजिक: बिग बैंग फज
किसानों को लेकर केंद्र सरकार के तीन ऐसे अध्यादेश लाई है, जिनसे देशभर के हजारों किसान गुस्से में हैं. केंद्र के इन कानूनों का विरोध तेज हो चुका है और किसान सड़कों पर उतरने लगे हैं. इस विरोध ने एक बार फिर किसान आंदोलन का रूप ले लिया है. मानसून सत्र शुरू होने से कई हफ्ते पहले केंद्र सरकार की तरफ से कृषि क्षेत्र से जुड़े कुछ अध्यादेश लाए गए. जिन्हें बिल के तौर पर पेश कर इस सत्र में ही पास कराने की योजना है. लेकिन हरियाणा से लेकर पंजाब तक और अन्य राज्यों के किसान इसे किसान विरोधी बता रहे हैं और उग्र प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं. किसानों का कहना है कि इस तरह के कानून लाकर सरकार मंडी ख़त्म करना चाहती है, msp और फार्म स्टॉक की लिमिट ख़त्म करना चाहती है ताकि बड़ी कंपनियां एग्रीकल्चर सेक्टर में आ पाएं और किसान से कम दामों में फसल खरीदकर  जितना चाहें उतना अपने पास जमा करें और बाद में अपने हिसाब से महंगा करके बेचें। तो आज इन तीन ऑर्डिनन्सेस के बारे में जानेंगे और साथ ही बात करेंगे प्याज के निर्यात पर लगे बैन की. बताएंगे कि कैसे निर्यात पर लगी इस रोक ने प्याज किसानों को सड़क पर लगाकर खड़ा कर दिया है. रिपोर्ट: फ़बेहा सय्यद गेस्ट: देविंदर शर्मा, कृषि विशेषज्ञ; राकेश टिकैट, भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता; जी. चंद्रशेखर, कृषि एक्सपर्ट इनपुट्स: वैभव पालिनिटकर और रौनक कुकड़े असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई म्यूजिक: बिग बैंग फज
लंबे लॉकडाउन के बाद और कोरोना के खतरे के बीच अब पहली बार स्कूल खुलने जा रहे हैं, लेकिन सिर्फ 9वीं से लेकर 12वीं तक के बच्चों के लिए ये विकल्प दिया गया है. इसमें भी अगर बच्चों के पेरेंट्स उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं तो वो अपने बच्चों को घर पर ही रख सकते हैं. कहा गया है कि बच्चे टीचर्स से कंसल्ट करने के लिए स्कूल जा सकते हैं. यानी जिन टॉपिक्स पर डाउट है, उन्हें स्कूल जाकर टीचर से पूछ सकते हैं. लेकिन स्कूल खोले जाने को लेकर स्कूल प्रशासन आखिर किस हद तक तैयार है, खासतौर पर सरकारी स्कूल, जहां पर बच्चों को ज्यादा खतरा हो सकता है. साथ ही ये भी सवाल है कि जब भारत में कोरोना अपने पीक पर है और एक दिन में 90 हजार से भी ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं तो क्या अभी स्कूल खोलना सही है? इसी सब पर आज इस पॉडकास्ट में बात करेंगे. रिपोर्ट: फ़बेहा सय्यद असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई म्यूजिक: बिग बैंग फज
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक ऐसा नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसे लेकर अब बहस शुरू हो चुकी है. इसके मुताबिक अब यूपी में एक स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स का गठन किया गया है, जिसके पास कुछ स्पेशल पावर होंगी. यानी इस फोर्स को किसी को भी गिरफ्तार करने के लिए वारंट की जरूरत नहीं होगी. साथ ही बिना सर्च वारंट के तलाशी भी ले सकती है. लेकिन अब इसे यूपी में अपराध के कम करने के अलावा सरकार के एक हथियार के तौर पर देखा जा रहा है. लोग इसके गलत इस्तेमाल की भी आशंका जता रहे हैं. अब सवाल ये है कि ऐसा क्या हुआ कि UP सरकार को स्पेशल फोर्सेज एक्ट लागू करने की जरूरत पड़ गई? इससे क्या खतरे हो सकते हैं? और विपक्षी नेताओं का इस पर क्या कहना है, इस सब पर ही आज इस पॉडकास्ट में बात करेंगे. पॉडकास्ट में सुनिए लॉयर, रिया घोष को और साथ ही सुनिए समाजवादी के स्पोकेसपर्सन घनश्याम तिवारी को भी. रिपोर्ट: फ़बेहा सय्यद गेस्ट: वकील रिया घोष और घनश्याम तिवारी, स्पोकेसपर्सन समाजवादी पार्टी असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई म्यूजिक: बिग बैंग फज
इस साल फरवरी में हुई दिल्ली हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस अब लगातार चार्जशीट दायर कर रही है. पिछले दिनों इन्हीं चार्जशीट को लेकर कई गिरफ्तारियां भी हुईं. लेकिन अब दिल्ली पुलिस की एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट में कुछ ऐसे बड़े नामों का जिक्र किया गया है, जिनमें ज्यादातर एक्टिविस्ट हैं. साथ ही दिल्ली पुलिस ने इसी मामले में JNU के पूर्व छात्र और एक्टिविस्ट उमर खालिद को भी UAPA के तहत गिरफ्तार कर लिया है. दिल्ली हिंसा की जांच में सीपीएम नेता सीताराम येचुरी, स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव (https://hindi.thequint.com/news/india/delhi-violence-fir-50-chargesheet-names-yogendra-yadav-jafrabad-speech) , इकनॉमिस्ट जयती घोष समेत कई बड़े नाम हैं. लेकिन पुलिस की इन चार्जशीट्स में कई ऐसी चीजें भी हैं, जो एक दूसरे से मेल नहीं खाती हैं. जिन तारीखों में ट्रंप के दौरे के वक्त दंगे फैलाने की साजिश का जिक्र किया गया है, उन तारीखों तक तो ट्रंप के दौरा का ऐलान भी नहीं हुआ था. इस पूरे मामले पर आज इस पॉडकास्ट में नज़र डालेंगे। साथ ही पॉडकास्ट में सुनिए क्विंट के पोलिटिकल एडिटर, आदित्य मेनन से जो बता रहे हैं कि कैसे दिल्ली हिंसा मामले में पुलिस की जांच और गिरफ्तारियां हमें एल्गार परिषद् मामले (https://hindi.thequint.com/news/india/podcast-how-are-the-raids-at-hany-babus-house-and-bhima-koregaon-related) की याद दिलाता है. रिपोर्ट: फ़बेहा सय्यद गेस्ट: आदित्य मेनन, पोलिटिकल एडिटर, क्विंट वॉइस ओवर: वैभव पालिनिटकर असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई म्यूजिक: बिग बैंग फज
पिछले करीब चार महीने से भारत और चीन के बीच तनाव की खबरें हम सभी सुनते आ रहे हैं. चीन की तरफ से लगातार सीमा पर हो रही घुसपैठ का भारतीय जवान डटकर सामना कर रहे हैं. लेकिन इसी बीच रूस में होने वाली एससीओ बैठक के दौरान पहले भारत चीन के रक्षामंत्रियों और उसके बाद विदेश मंत्रियों की मुलाकात हुई. रूस के मॉस्को में हुई इन मुलाकातों को लेकर अब बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि क्या अब रूस दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करने का काम कर रहा है? क्या वाकई रूस इस स्थिति में है कि वो दोनों देशों के बीच बिगड़ते रिश्तों को सुधार सके? ये समझने के लिए एक लार्जर पिक्चर देखनी होगी, जिस में रूस, चीन और रूस और भारत के बीच के रिश्तों पर एक नज़र डालनी जरूरी है. मास्को में हुए 5-पॉइंट के जॉइंट सटटेमनेट का क्या मतलब है? इसे किस तरह समझ सकते हैं? और रूस के सम्बन्ध भारत, और चीन के साथ कैसे रहे हैं? इस के बारे में जानिए जियोपॉलिटिक्स एक्सपर्ट और पूर्व डिप्लोमेट, विष्णु प्रकाश से. रिपोर्ट: फ़बेहा सय्यद गेस्ट: विष्णु प्रकाश, जियोपॉलिटिक्स एक्सपर्ट और पूर्व डिप्लोमेट वॉइस ओवर: वैभव पालिनिटकर असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई म्यूजिक: बिग बैंग फज
कोरोना महामारी के कहर को करीब 8 महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन अब तक इसका असर दुनिया के कई देशों में देखने को मिल रहा है. इसीलिए दुनिया के बड़े देश इस वायरस को खत्म करने की दवा या वैक्सीन को लेकर काम कर रहे हैं और इनके बीच अब एक रेस शुरू हो चुकी है कि कौन सबसे पहले कोरोना वैक्सीन तैयार करेगा. लेकिन रेस में करीब सबसे आगे चल रही ऑक्सफ़ोर्ड-AstraZeneca COVID-19 वैक्सीन को लेकर एक बुरी खबर सामने आई है. इस वैक्सीन के ट्रायल दुनियाभर में फिलहाल के लिए बंद कर दिए गए हैं. क्योंकि ब्रिटेन में इस वैक्सीन के ट्रायल में शामिल होने वाले एक शख्स पर इसका बुरा रिएक्शन देखने को मिला है. इसी के चलते अब भारत जो कि इस वैक्सीन के तीसरे फेज का ट्रायल शुरू करने वाला था उसने भी इस पर रोक लगा दी है. अब जिस वैक्सीन ने दुनियाभर के लोगों में एक उम्मीद जगाई थी, उसके ट्रायल पर अचानक यूं ब्रेक लग जाना आखिर कितना चिंताजनक है? क्या वैक्सीन का सपना और भी ज्यादा दूर चला गया है, या फिर वैक्सीन के प्रोसेस में ये एक आम बात है? इस पूरे मसले पर आज बात करेंगे प्रोफेसर गिरिधर आर. बाबू से, जो बेंगलुरु में पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इण्डिया में लाइफकोर्स एपिडिमियोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड हैं. रिपोर्ट: फबेहा सय्यद गेस्ट: प्रोफेसर गिरिधर आर. बाबू, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इण्डिया, बेंगलुरु असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई म्यूजिक: बिग बैंग फज
सुशांत सिंह केस को लेकर पिछले करीब ढ़ाई महीनों में मुंबई पुलिस, बिहार पुलिस, CBI, ED, और NCB की जांच लोग देख चुके हैं. लेकिन तमाम पुलिस महकमों और एजेंसियों में से अब इस केस में एनसीबी एक्शन मोड में है. एनसीबी ने कुछ इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस और रिया के बयान के आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया. जिसके बाद कोर्ट ने रिया को 14 दिन की न्यायिक हिरासत पर भी भेज दिया. जिस कानून के तहत रिया को गिरफ्तार किया गया है वो है NDPS ACT 1985 यानी नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टांसेस एक्ट. इसके किन सेक्शंस के तहत गिरफ्तारी हुई है? आरोप साबित होने पर रिया को इस कानून के तहत क्या सजा मिल सकती है? और रिया के खिलाफ जो केस बना है, वो आखिर कितना मज़बूत है, इस पर भी बात करेंगे. लेकिन जिस ड्रग को लेकर ये सारा मामला फैला है, वो है कैनाबिस, जिसे गांजा, या भांग के रूप में हम जानते हैं. इस ड्रग को लेकर भारत में क्या कानून है? और कैनाबिस यानी गांजे पर प्रतिबंध से इकनॉमी को किस प्रकार से आर्थिक नुक्सान हो रहा है, इस पर आज इस पॉडकास्ट में तफ्सील से बात करेंगे, वीद अहमद से जो विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी में रिसर्चर हैं. रिपोर्ट: फ़बेहा सय्यद गेस्ट: नवीद अहमद, लीगल रिसर्चर असिस्टेंट एडिटर: मुकेश बौड़ाई म्यूजिक: बिग बैंग फज
सुशांत सिंह राजपूत मामले पर अब नेताओं ने अपनी राजनीतिक रोटियां सेकनी शुरू कर दी हैं.  सुशांत सिंह केस को लेकर पहले बिहार सरकार बनाम महाराष्ट्र सरकार का झगड़ा सबने देखा, लेकिन अब एक बार फिर हलचल तेज हो चुकी है. कंगना और शिवसेना के बीच जुबानी जंग और बिहार चुनावों में बीजेपी के सुशांत की फोटो वाले पोस्टर्स ने बता दिया कि नेता अब इस मुद्दे को आसानी से छोड़ने वाले तो नहीं हैं. कंगना को बीजेपी की नीतियों का समर्थन करने के लिए जाना जाता है, और ये करते हुए वो कई बारे फ़िल्मी जगत की कुछ हस्तियों पर सीधा वार करती भी नज़र आती रही हैं. आज पॉडकास्ट में सुनिए इंडेपेंट जर्नलिस्ट और पब्लिश्ड ऑथर केतन वैद्या को जो बता रहे हैं कैसे कंगना को एक राजनितिक मोहरे के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है. साथ ही सुनिए क्विंट के पोलिटिकल एडिटर आदित्य मेनन से जो बता रहे हैं कैसे सुशांत सिंह को इन्साफ दिलाने की मुहिम ने बिहार में होने वाले चुनाव का फोकस तय कर लिया है. रिपोर्ट : फबेहा सय्यद सब-एडिटर : मुकेश बौड़ाई वॉइस ओवर: नमन मिश्रा
कोरोना वायरस के मामले भारत में हर दूसरे दिन नया रिकॉर्ड बना रहे हैं. जब जीडीपी पिछले 40 सालों में पहली बार -23.9 तो हर तरफ उसकी चर्चा होने लगी, लेकिन फिर अचानक खबर सामने आई कि भारत ने कोरोना मामलों में ब्राजील को भी पीछे छोड़ दिया है और अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर आ चुका है. यानी जहां देश की जीडीपी में बढ़ोतरी होनी चाहिए थी, वहां वो माइनस में गिर गई, और कोरोना मामले जो कम होने चाहिए थे वो लगातार बढ़ रहे हैं.  दुनिया में कोरोनावायरस संक्रमण के मामलो की लिस्ट में हम अमेरिका से कुछ ही दूर हैं. यानी 42 लाख मामलों के साथ हम ग्लोबली नंबर दो के स्थान पर आ गए हैं. भले ही भारत में रोजाना 80 से 90 हजार मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन मृत्य दर अब भी बाकी देशों के मुकाबले काफी कम है और रिकवरी रेट भी ज़्यादा है. फिर ये भी कहा जा रहा है कि भारत जैसे बड़े देश में ये आंकड़े बहुत मामूली हैं और शायद हमें उतना डरने की ज़रुरत न हो. लेकिन साइंटिस्ट्स का मानना है कि मामला इतना बढ़ गया है कि सरकार भी अब कुछ नहीं कर सकती. आखिर भारत की ये Covid स्टोरी आंकड़ों को देखते हुए कैसे समझें? यही आज इस पॉडकास्ट में समझने की कोशिश करेंगे देश के जाने माने विरोलॉजिस्ट, डॉ. शाहिद जमील से.
टेलीकम्यूनिकेशन सेक्टर पर आफत के बादल छटने का नाम नहीं ले रहे हैं. इस सेक्टर की Vodafone-Idea and Bharti Airtel कम्पनीज बैंकरप्सी की कगार पर खड़ी हैं और AGR मामले में बुरी तरह फंसी हुई हैं. AGR यानी Adjusted gross revenue - ये यूसेज और लाइसेंसिग फीस है जो टेलीकॉम कंपनियों को भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ़ कम्युनिकेशन को देनी होती है. लेकिन ये रक़म अब 1.6 lakh crore तक पहुंच गई और एक विवाद में उलझी हुई है. अब इस पूरे मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला भी आया है जिसे इन कम्पनीज के लिए फायदे का सौदा बताया जा रहा है. क्या है वो फैसला ? क्या वाक़ई इससे इन कम्पनीज की दुकान बंद होने से बच पाएगी? और सबसे बड़ी बात कि हम और आप जैसे करोड़ों यूजर्स पर इस फैसले का क्या और किस हद तक असर पड़ेगा. आज पॉडकास्ट में टेलीकॉम जगत के इस बड़े विवाद पर तफ्सील से बात करेंगे.
भारत सरकार ने एक बार फिर 118 चीनी ऐप्स को बैन करने का ऐलान किया है. लेकिन इन सभी ऐप्स में सबसे ज्यादा चर्चा पब्जी मोबाइल गेम की हो रही है. जैसे टिक टॉक भारत में वीडियो के लिए काफी ज्यादा फेमस था, वैसे ही पब्जी गेम को लेकर भी भारत में करोड़ों लोग दीवाने थे. भारत में PUBG मोबाइल गेमिंग एप के करीब 5 करोड़ डाउनलोड और करीब 3.3 करोड़ यूजर्स हैं. इस गेमिंग ऐप को लेकर भारत ही नहीं दुनियाभर में काफी ज्यादा चर्चा है. इन सभी 118 चीनी ऐप्स को बैन करने के पीछे भारत सरकार ने फिर लोगों के निजी डेटा को शेयर करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा बताया है. अब सवाल ये है कि क्या वाकई में इंडियन यूजर्स के लिए टिक टॉक की तरह पब्जी मोबाइल गेम के भी कई बेहतर विकल्प सामने आएंगे? एक सवाल उठ रहा है क्या पब्जी चीनी कंपनी का मोबाइल गेम है और अगर ऐसा है तो क्या हमने इससे चीन को एक कड़ा जवाब दिया है? इन्ही पर आज बात करेंगे इस पॉडकास्ट में.
भारत और चीन के बीच तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है. पिछले करीब दो महीने से जारी बातचीत के बाद एक बार फिर चीन की तरफ से एलएसी पार करने की कोशिश की गई. पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो झील के नजदीक चीनी सैनिक पूरी तैयारी से घुसपैठ करने के लिए आए थे, लेकिन भारतीय जवानों ने दीवार बनकर एक बार फिर उनका रास्ता रोक लिया और चीनी सेना अपने मंसूबों में नाकाम रही. 29 अगस्त की रात हुई इस घुसपैठ की कोशिश के बाद भी चीनी सेना ने 31 अगस्त को भी ऐसी ही हरकत करने की कोशिश की, जिसे फिर भारतीय सेना ने नाकाम किया. लेकिन  इस नए डेवलपमेंट की खास बात ये है कि पैंगोंग त्सो के साउथ एरिया पर कभी कोई तनाव नहीं होने की वजह से वहां आर्मी कभी भी तैनात नहीं रही. लेकिन अब भारत ने उस पूरे इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी है. इस इलाके में अब स्पेशल फ्रंटियर फोर्स तैनाती कर दी गई है. जिन्हे 'विकास बटालियन' भी कहा जाता है. अब ये स्पेशल फ्रंटियर फोर्स क्या हैं, इनका महत्व क्या होता है, और ऐसा क्यों कहा जा रहा है कि इस स्पेशल फ्रंटियर फोर्स के इस्तेमाल से चीन को ज़ोर का झटका धीरे से लगेगा? आज इस पॉडकॉटस में सुनिए इंडिपेंडेंट जर्नलिस्ट, आदित्य राज कॉल को. और साथ ही सुनिए स्पेशल फ्रंटियर फोर्स के बारे में नई दिल्ली के ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के डिस्टिंगुइश्ड फेलो, मनोज जोशी को.
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Comments (5)

Neeraj Kumar

superb coverage...

Aug 8th
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Mandeep Sahni

@QuintHindi I request you to please ask Ms. Fabeha Syed to only anchor the entire Big Story #Hindi #news podcast. I listen this only because of her way of speaking. Her voice is like honey to ears.

May 26th
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Mandeep Sahni

This is the best #Hindi #news #podcast I have heard till date. The anchor and #journalist Fabeha Syed touches the right strings while presenting the news report. #PodcastRecommendations #HindiPodcasts #India

Apr 2nd
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Sharad Patel

Loved the interview ! Exposes BJP hypocrisy and how clueless they are

Feb 17th
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Amit Singh

Good one.

Sep 26th
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