Dohe
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© Sudhir Prasad
Description
करत अभ्यास के जङमति होत सुजान। रसरी आवत जात, सिल पर करत निशान।। इस दोहे का अर्थ यह है, कि निरंतर अभ्यास करने से एक मुर्ख आदमी भी बुद्धिमान बन सकता है. जिस तरह कुँए की मुडेर पर बार बार रस्सी के घिसने से उस पर निशाँ पड़ जाते है.
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