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Author: Newslaundry Team

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You watch...we are watching. Sabki Dhulai.
247 Episodes
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इस हफ़्ते की चर्चा ऐसे वक़्त में आयोजित हुई जब राजनीति के गलियारों से लेकर पान की दुकानों तक संभावित चुनावी परिणामों की ही चर्चा हो रही है. इस बीच साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने एक विवादित बयान दिया, जिसमें उन्होंने गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बता दिया. ये मामला काफ़ी विवादों में आ गया और यहां तक कि पीएम मोदी को भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया देनी पड़ी. पश्चिम बंगाल में इस पूरे हफ़्ते अमित शाह के रोड शो और उसमें हुई हिंसा के बाद बवाल खड़ा हुआ, जब ईश्वरचंद्र विद्यासागर की प्रतिमा गिरा दी गयी. वहां की स्थितियों को देखते हुए चुनाव आयोग ने 1 दिन पहले ही चुनाव प्रचार को रोकने का आदेश दे दिया. इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की भारतीय जनता पार्टी की कार्यकर्ता प्रिंयका शर्मा को कंडीशनल बेल दी, जिन्हें ममता बनर्जी की एक फोटोशॉप्ड इमेंज शेयर करने की वजह से गिरफ्तार कर लिया गया था. इसी बीच कांग्रेस के मणिशंकर अय्यर ने मोदी के ऊपर की गयी ‘नीच’ की टिप्पणी को एक लेख के द्वारा जारी रखा, साथ ही सैम पित्रोदा ने 84 सिंख दंगों पर ‘जो हुआ सो हुआ’ बोल कर कांग्रेस की परेशानी भी बढ़ा दी, जिसके बाद राहुल गांधी को इसके लिए सफाई देनी पड़ी. दूसरी ओर नरेंद्र मोदी ने इंडियन एक्सप्रेस में दिये साक्षात्कार में कहा कि मेरी छवि को किसी खान मार्किट की गैंग ने नहीं बनाया, बल्कि 45 साल की तपस्या से मैं यहां पहुंचा हूं. इसलिए इसे कोई खान मार्किट गैंग ख़त्म नहीं कर सकता. इसके अलावा, ईरान-भारत संबंधों, आने वाले मानसून और संभावित सरकार को भी चर्चा के विषयों में शामिल किया गया. चर्चा में इस बार तेज़-तर्रार युवा पत्रकार राहुल कोटियाल और अमित भारद्वाज शामिल हुए. साथ में वरिष्ठ लेखक-पत्रकार अनिल यादव ने चर्चा में शिरकत की. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. अतुल ने बातचीत शुरू करते हुए सवाल उठाया, साध्वी प्रज्ञा की जो राजनीति है, और जिस तरह की विचारधारा से वह आती हैं, उसमें गांधी और आज़ादी की लड़ाई से जुड़े अन्य नेताओं के प्रति घृणा का भाव दिखता है. जब ऐसा कोई बयान आया हो तो उसमें कोई आश्चर्यचकित होने वाली बात दिखती है? जवाब में अनिल ने कहा- “देखिये, इसमें मुझे कोई आश्चर्यचकित होने वाली बात नहीं दिखती, लेकिन इस बयान के बाद उस बड़ी विडंबना की ओर इशारा मिलता है,
In this episode of Reporters Without Orders, host Cherry Agarwal speaks to Newslaundry correspondents Ayush Tiwari and Prateek Goel about Prime Minister Narendra Modi’s rally in Delhi, the electoral climate in Madhya Pradesh and Maharashtra and more. Ayush also speaks about his report on Atishi’s pamphlet. The panel discusses Modi’s interview with News Nation, a report on cyclone Fani and how Dalits in Puri were turned away from cyclone shelters. They also talk about Prateek’s ground report from Madhya Pradesh: #MadhyaPradesh: In this village, caste determines the distance you travel to fetch water. Prateek, while answering Cherry’s question on loan waivers in Madhya Pradesh, talks about how farmers in the state are unhappy with the Congress government as they've failed to deliver on their poll promise. Prateek also talks about how the regional media didn’t cover important issues in Madhya Pradesh and Maharashtra. For all this and more, listen in.
In this episode of Reporters without Orders, host Cherry Agarwal sits down with Newslaundry Correspondent Ayush Tiwari and Desk Writer Gaurav Sarkar to talk about the protests against clean chit to Chief Justice of India Ranjan Gogoi, courtroom drama during the deposition of former Union Minister MJ Akbar, Rahul Gandhi’s public meeting in Delhi, Election Commission's social media team in Bhopal and more. Gaurav was covering the protest against the clean chit to Gogoi, while Ayush attended Congress president Rahul Gandhi's public meeting in New Delhi. Gaurav talks about how courtroom proceedings (in the MJ Akbar defamation case against journalist Priya Ramani) turned into a boxing ring. He also talks about enthusiastic support from the audience in the gallery for Ramani. Ayush speaks of his experience of attending a Rahul Gandhi election meeting. Cherry and Ayush talk about the atmosphere of the meeting, the loyalty of supporters and how ideology plays a driving force for the supporters of both parties. Ayush talks about his report from Bhopal on how the election commission's social media cell in Bhopal is keeping an eye on online campaigning of political parties in the state. For all this and more, listen in.
In this episode of Reporters Without Orders, host Cherry Agarwal sits down with Newslaundry correspondent Ayush Tiwari, Desk Writer Gaurav Sarkar and Quint's Senior Correspondent Aishwarya Iyer to talk about the #Yeti, the Utsav Bains hearing, Elections 2019 and more. Aishwarya and Ayush were covering elections in Rajasthan and Madhya Pradesh respectively. They were gauging support for parties and how people in these places are forming their electoral opinions. Apart from elections, the panel also talks about the Yeti sighting and its news value. The Indian Army had tweeted out a photo of a trail of footprints in the Himalayan snow, claiming to have found footprints of the mythical creature. The panellists are clearly divided. While Ayush gushes about its history and Gaurav hopes that Yetis exist, Aishwarya and Cherry cannot help but stress on the point that it gained way more attention than it should have. In all the Yeti news, the duo felt a recently-released UN climate report got very little coverage. Utsav Bains had filed an affidavit claiming that he was approached with a “huge bribe” of ₹1.5 crore to frame the Chief Justice of India Ranjan Gogoi in a false sexual harassment case. Gaurav shares the details of proceedings, the courtroom drama and more. Although there is too much news to discuss, Gaurav points out that Game of Thrones didn't get as much hype as it should have. For all this and more, listen in!
ग़ालिब का एक शेर है- “हम वहां से हैं जहां से हमको भी/ कुछ हमारी ख़बर नहीं आती”. मौजूदा वक़्त में देश ऐसे ही दौर से गुज़र रहा है. पंजाबी के कवि ‘पाश’ के शब्दों में कहें तो एक हद तक यह वह दौर भी है, जब बिना ज़मीर होना ज़िंदगी की शर्त बन गयी है. ठीक उसी वक़्त यह बात जोर-शोर से कही जा रही है कि सारे सवालों में सबसे ऊपर है देश और देश की सुरक्षा का सवाल तो इसके ठीक समानांतर एक विडंबना भी है कि हमें देश की इस तथाकथित सुरक्षा से खतरा है. इस हफ़्ते की चर्चा ऐसे वक़्त में आयोजित हुई जब इस तरह की तमाम चर्चाओं के बीच देश के प्रधानमंत्री ‘पूर्णतः अराजनैतिक साक्षात्कार’ देने के बाद लोकसभा चुनावों में ‘पूर्ण बहुमत’ हासिल करने के अभियान में लगे हुये थे. इसी कड़ी में बनारस की सड़कों पर जनता ने ख़ुद को फ़कीर कहने वाले प्रधानमंत्री का शक्ति-प्रदर्शन देखा. चुनावी सरगर्मियों के बीच नेताओं के बयान पूरे परिदृश्य को सनसनीख़ेज बना रहे थे. यह वह समय भी था, जब देश-विदेश से कुछ दुर्भाग्यपूर्ण ख़बरें आयीं तो कुछ ख़बरें ऐसी भी रहीं जिनसे डगमगाते भरोसे को तनिक बल मिला. इस हफ़्ते की चर्चा में भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर उनकी एक महिला कर्मचारी द्वारा लगाया गया यौन-उत्पीड़न का आरोप और न्यायपालिका के दायरे में इस संबंध में हुई उठा-पटक, 2002 के गुजरात दंगे की पीड़िता बिलकीस बानो के बलात्कार मामले में सुप्रीम कोर्ट का मुआवजे का निर्णय व उसके निहितार्थ, देश का चुनावी परिदृश्य और श्रीलंका में हुई आतंकवादी घटना को चर्चा के विषय के तौर पर लिया गया. चर्चा में इस बार न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकार आनंद वर्द्धन ने शिरकत की. साथ ही चर्चा में लेखक-पत्रकार अनिल यादव भी शामिल हुये. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. इस तरह मामले की संक्षिप्त रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए अतुल ने सवाल किया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा ख़ुद सवालों के घेरे में आने के बाद अपनायी गयी प्रक्रिया व जस्टिस रंजन गोगोई द्वारा उठाये गये क़दम को आप कैसे देखते हैं? जवाब देते हुए अनिल कहते हैं- “यह मामला सामने आया तो लोगों ने पहला सवाल यह करना शुरू किया कि ऐसे मामलों में कानूनी स्थिति क्या है क्योंकि आरोप चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया पर लगे थे. किसी का स्कॉलर होना, कानून का जानकार होना एक अलग बात है लेकिन इस वजह से यह नहीं मान लेना चा
बीते हफ़्ते राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर घटित हुई घटनाओं ने कई मायनों में नयी बहस को जन्म दिया. चर्चा में इस हफ़्ते उन्हीं में से तीन बेहद ज़रूरी विषयों- जेट एयरवेज़ की उड़ानें बंद होने व हज़ारों की तादाद में लोगों के बेरोज़गार होने, विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज की इक्वाडोर के लंदन स्थित दूतावास से गिरफ़्तारी और भाजपा द्वारा तमाम आतंकवादी गतिविधियों में सह-अभियुक्त रही साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को 2019 के लोकसभा चुनावों में भोपाल से टिकट दिये जाने पर विस्तार से बातचीत की गयी. चर्चा में इस बार ‘प्रभात ख़बर-दिल्ली’ के ब्यूरो चीफ़ प्रकाश के रे ने शिरकत की. साथ ही चर्चा में लेखक-पत्रकार अनिल यादव भी शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. भारतीय जनता पार्टी द्वारा साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भोपाल से टिकट दिये जाने के बाद एक बार फिर देश में उग्र हिंदुत्व की राजनीति ने जोर पकड़ लिया है. साध्वी प्रज्ञा सिंह ने 2019 के लोकसभा चुनावों को धर्मयुद्ध करार दिया है. साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के बयानों के बाद अब धार्मिक भावनाओं के आधार की जाने वाली राजनीति तेज़ हो गयी है, जिसमें देशभक्ति का भी फ़्लेवर पड़ गया है. इसी मुद्दे से चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल ने सवाल किया कि जिस तरह की उनकी छवि है व जिस तरह के उनपर आरोप हैं, उसके बाद उन्हें या उन जैसे किसी व्यक्ति के उम्मीदवार बनाये जाने के कुछ मक़सद होते हैं. ध्रुवीकरण होता है और जीत की संभावनाएं ऐसे में बढ़ जाती हैं. और जबकि भोपाल की सीट भाजपा के लिये सालों से सुरक्षित सीट रही है, तो पार्टी द्वारा ऐसे किसी उम्मीदवार के ऊपर दांव लगाने के पीछे क्या मक़सद हो सकता है? जवाब देते हुये प्रकाश कहते हैं- “उनको खड़ा करने के पीछे जो मक़सद है, उसपर बात करने के पहले हमें यह देखना चाहिए कि उनकी उम्मीदवारी के तकनीकी या कानूनी पहलू क्या हैं. एक समय स्वास्थ्य के आधार पर लालू प्रसाद यादव जमानत की अर्ज़ी दाख़िल करते हैं, तो उनकी अर्ज़ी खारिज़ कर दी जाती है और यहां स्वास्थ्य के नाम पर एक व्यक्ति जमानत पर बाहर है और वह जमानत भी अपने आप में सवालों के घेरे में है. एक और मामला हार्दिक पटेल का भी है, जिन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी गयी. तो प्रज्ञा ठाकुर के मामले में यह एक बड़ा सवाल है और इसमें चुनाव आयोग के काम-काज
This week’s Reporters Without Orders features host Cherry Agarwal with Newslaundry's head of research Ayush Tiwari and desk writer Gaurav Sarkar. The panel talks about the impact Sandeep Bamzai’s tutelage has had on IANS, a petition presented to the Supreme Court seeking permission for Muslim women to offer namaaz in mosques and Maneka Gandhi’s comments on the un-secret nature of secret ballots. Ayush kickstarts the discussion with his own article about how a news agency, IANS, that has off late become "a part of the larger trend of media layoffs" as it suffocates under the corporate ownership of Mr Anil Ambani. He reveals examples of reporters at IANS and establishes a growing pattern alongside other media organizations such as Vice and Buzzfeed. The panel goes on to discuss the intricacies of corporate ownership and the direct influence they exercise on editorial management. Ayush also talks about a Swarajya Magazine report about how the family of a minor Dalit girl who was kidnapped by a man that happened to be Muslim were denied the right to file an FIR by the police since they did not want it to flare up into a ‘Hindu-Muslim’ issue. The panel then went into discussing the implications of ‘pseudo-secularism’ that dominates the Indian narrative today. Gaurav discusses an archaic ritual that Shashi Tharoor made a mockery of himself participating in. The ritual, called ‘Tulabharam’, is one where a person’s “BMI is weighed in phool, phal and gold” and Tharoor fell off the scales having to endure 11 stitches afterwards. The panel delved into the problems associated with the endorsement by politicians of religious traditions such as these and the implications that such engagement had on the sentiments of the voting public. He also brought up a recent plea put before the Supreme Court by a Pune-based couple that sought permission to let women offer prayers in mosques. The discussion questioned the fast-paced nature of the proceedings as well nuances of religion such
बीता हफ़्ता तमाम तरह की घटनाओं का गवाह रहा. इस बार की चर्चा जब आयोजित की गयी, उस वक़्त देश के कुछ हिस्सों में साल 2014 के बाद तनाव, द्वंद्व, संघर्ष, भ्रम व मायूसी के 5 सालों से हताश-निराश अवाम एक बार फ़िर उम्मीदों से बेतरह लैश होकर पहले चरण के मतदान में अपने मताधिकार का प्रयोग कर रही थी. चर्चा में इस हफ़्ते सुप्रीम कोर्ट द्वारा राफेल मामले में प्रशांत भूषण, यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए दिये गये  फैसले, चुनाव के धड़कते माहौल में सीमा पार से आती ख़बर जिसमें इमरान ख़ान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व उनकी पार्टी द्वारा बहुमत हासिल करने पर भारत-पाकिस्तान संबंधों में गर्माहट आने की उम्मीद जतायी, बस्तर में नकुलनार इलाके में हुआ नक्सली हमला जिसमें बीजेपी के विधायक व 5 सीआरपीएफ जवानों समेत कुल छः लोगों की मृत्यु हो गयी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के ब्लॉग अपडेट व भाजपा के चुनावी घोषणापत्र पर चर्चा की गयी. इस हफ़्ते की चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार हृदयेश जोशी ने शिरकत की. साथ ही लेखक-पत्रकार अनिल यादव भी चर्चा में शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. राफेल मामले में दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए दिये गये फैसले से चर्चा की शुरुआत करते हुए, अतुल ने सवाल किया कि एक तरफ़ सरकार द्वारा इस मामले से लगातार पीछा छुड़ाने के प्रयास लगातार जारी रहे और अब चुनावी उठापटक के बीच सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस तरह का फैसला दिये जाने के बाद अब आप राफेल मामले को किस तरफ़ जाता हुआ देखते हैं? क्या बात राहुल गांधी द्वारा लगातार लगाये जा रहे आरोपों की दिशा में आगे बढ़ गयी है? जवाब में पेंटागन पेपर्स का ज़िक्र करते हुए हृदयेश ने कहा, “यहां पर एक तो प्रोसीजर का मामला इन्वाल्व है, इसके साथ ही मामला पॉलिटिकल परसेप्शन का भी हो गया है. इस वक़्त कांग्रेस ने मैनिफेस्टो में जिस तरह से ख़ुद को सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर ऊपर दिखाने की कोशिश की थी, इसके बाद प्रोपराइटी के मामले में एक बयानबाजी करने में उसको मदद मिलेगी.” इसी कड़ी में मीडिया के नज़रिये से इस मसले को देखते हुए अतुल ने सवाल किया कि इस मौके पर यह फैसला सरकार के लिए तो झटके जैसा है, लेकिन जबकि पिछले पांच सालों में लगातार यह बात चर्चा में रही कि मीडिया पर सरकारी दबाव ह
This week’s Reporters Without Orders features host Cherry Agarwal, Head of Research Ayush Tiwari, Desk Writer Gaurav Sarkar and Newslaundry Hindi reporter Basant Kumar. The panel talks the Enforcement Directorate's fourth supplementary chargesheet in the AgustaWestland chopper deal scam, increasing propaganda in daily soaps, the impact of communal violence in Western Uttar Pradesh, Congress' demonetisation sting operation and more. Speaking about the allegations that journalists "toned down" reportage on the AgustaWestland scam, Ayush says: “ Manu Pubby and Shekhar Gupta broke the story on the Augusta Westland scam and if they wouldn’t have done it we wouldn’t have known about it." He also makes a case for why there is a need to look at the full chargesheet, going beyond sections of the document that was leaked to the media. He adds these are baseless allegations and do not make a strong case against the three journalists who were allegedly named. Moving on, Gaurav points out political propaganda is increasingly being embedded in daily soaps such as Bhabhiji Ghar Par Hain. He also talks of various such videos doing the rounds on Twitter. He questions the intent of such propaganda and says, “The Model Code of Conduct is in effect, is this (such content) even allowed during this period?” Basant speaks about his ground report from Western UP which focused on understanding the impact of communal violence in the area. He is surprised that many young voters have fallen into a communal trap and are in favour of divisive politics. He says, “Hindus have hatred for Muslims while Muslims are fearful." There's also talk about what UP politics and 2019 general elections. Gaurav talks about a sting operation shown by the Congress and raises questions about its credibility. He feels it's edited and says: “How do you get hard cuts in raw unedited video?”
बीता हफ़्ता बहुत सारी घटनाओं का साक्षी रहा है. इस हफ़्ते की चर्चा तब आयोजित हुई, जबकि चुनावी सरगर्मियां चरम पर थीं और पहले चरण के चुनाव में हफ़्ते भर से भी कम वक़्त रह गया था. इस हफ़्ते की चर्चा में ‘टाइम मैगज़ीन’ द्वारा पेशे का जोख़िम उठा रहे पत्रकारों की सूची में इस बार हिंदुस्तान की स्वतंत्र पत्रकार राना अयूब का नाम दर्ज़ करने व पेशे में पत्रकारों के लिए लगातार बने हुए खतरों, देशभर में महिलाओं के लिए रोजगार की संभावनाओं पर विस्तार से बात करती ऑक्सफेम इंडिया की रिपोर्ट, राहुल गांधी द्वारा पहली दफ़ा दो जगहों से लोकसभा चुनाव लड़ने, कांग्रेस पार्टी के चुनावी घोषणापत्र व आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की घटनाओं पर चर्चा के क्रम में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बायोपिक, जिसमें अभिनेता विवेक ओबेरॉय उनका किरदार निभा रहे, पर चर्चा की गयी. चर्चा में इस बार वरिष्ठ पत्रकार हृदयेश जोशी ने शिरकत की. साथ ही लेखक-पत्रकार अनिल यादव व न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकार आनंद वर्धन भी चर्चा में शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. कांग्रेस पार्टी के चुनावी घोषणापत्र से चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल ने कहा कि कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में शिक्षा व कृषि के क्षेत्र के लिए किए गये वायदों, अलग से कृषि बजट जारी करने व ‘न्याय’ योजना जिसमें देश में ग़रीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रहे पांच करोड़ परिवारों को 6000 रुपये की मासिक आर्थिक मदद की बात कही गयी है. अतुल ने इसी में अपनी बात जोड़ते हुए कहा कि इन सबको ध्यान में रखते हुए अगर चुनावी घोषणापत्र पर गौर करें तो इसमें समाजवादी रुझान की झलक मिलती है, साथ ही इसमें उस लीक से थोड़ा हटकर चलने का प्रयास भी देखने को मिलता है, जिसका निर्माण ऐसे समय में हुआ जब बाज़ारवाद ने अर्थव्यवस्था को अपनी पकड़ में ले लिया है, इस संबंध में आपकी क्या राय है? जवाब देते हुए हृदयेश जोशी ने कहा- “आपने सोशलिस्ट शब्द का इस्तेमाल किया. यहां मूल बात समझने की ये है कि शुरुआत से ही पार्टियों का और ख़ास तौर पर कांग्रेस पार्टी का ये अनुभव रहा है कि जब-जब वो अपनी इस सोशलिस्ट लाइन से हटी है, उसका जनाधार बुरी तरह खिसका है. अगर आप कुछ वक़्त पहले अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज़ के इंडियन एक्सप्रेस में छपे लेख ‘रैश यू टर्न, हाफ-बेक्ड प्लान्स’ पर गौर करें तो उनका क
This week’s Reporters Without Orders features host Cherry Agarwal with Newslaundry's head of research Ayush Tiwari and desk writer Gaurav Sarkar. The panel talks about the SSC paper leaks, Yogi Adityanath’s rally, the Congress manifesto and the newly launched NaMo TV. Ayush talks about the press conference he attended on the SSC paper leaks conducted by Yogendra Yadav and Kanhaiya Kumar, an SSC aspirant from Bihar. He explains what happened and how the government and authorities were hand-in-glove. He says: “The Chairman of the SSC should be taken into account because this incident has happened under his nose.” Cherry discusses the recently released Congress manifesto which made a slew of promises including some focusing on the media, like the amendment of Press Council of India Act to strengthen self-regulation of the media, and the empowering of the Press Council of India to fight the menace of fake news and misinformation. Most fake news is amplified by TV news on a daily basis, and Cherry says: “TV newsrooms have whipped up war hysteria, communal mongering ... Be it Ayodhya, Pulwama, Balakot—I mean TV newsrooms go insane.” She also discusses the Congress’s promise of making defamation a civil offence and the removal of the controversial sedition law. Gaurav tells us about Yogi Adityanath’s rally in Bisara village near Greater Noida where the prime accused in the Akhlaq lynching case were present in the front rows, attending the rally. Gaurav quotes one of the accused as saying “we are out on bail and nothing can happen to us”. Ayush adds, “When one of the accused died, he was wrapped in a tricolour.” The panel discusses religion and the caste system in the context of the beef ban, and its impact on people. Cherry also brings up NaMo TV—now renamed Content TV—and how most details about the channel are hidden. "The Election Commission should examine its funding, violation of the Model Code of Conduct, ownership and whether the broadcasting rules are being vio
चुनावी गहमा-गहमी के बीच बीता हफ़्ता तमाम अच्छी-बुरी खबरों के साथ हिंदुस्तान के लिए एक उपलब्धि लेकर आया. इस हफ़्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा खगोल विज्ञान के क्षेत्र में भारत की हालिया उपलब्धि को बताते हुए राष्ट्र के नाम संदेश जारी संदेश, राहुल गांधी द्वारा चुनावी अभियान के तहत की एक बड़ी योजना ‘न्याय’ का ऐलान, पिछले हफ़्ते होली के रंगों को धूमिल करती हुई व सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने वाली गुड़गांव में एक मुस्लिम परिवार के साथ हुई हिंसक वारदात और सामाजिक कार्यकर्ता व अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज़ की झारखंड में हुई गिरफ़्तारी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रिपब्लिक भारत चैनल को दिया गया इंटरव्यू आदि चर्चा में विषय के तौर पर लिया गया. चर्चा में इस बार लेखक-पत्रकार अनिल यादव व हिंदुस्तान अख़बार के विशेष संवाददाता स्कंद विवेकधर शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ज़ारी राष्ट्र के नाम संदेश में उपग्रह को मार-गिराने की क्षमता के ज़िक्र के साथ चर्चा की शुरुआत हुई. अतुल ने पॉलिटिकल पार्टियों का हवाला देते हुए सवाल किया कि क्या इसकी ज़रूरत थी कि प्रधानमंत्री इतना ज़्यादा सस्पेंस बनाते हुए इसकी घोषणा करें? इसमें दूसरी बात यह भी शामिल की गई कि इसको भारत सरकार की तरफ़ से इस तरह पेश किया गया कि इसमें 1974 या 1998 में हुए परमाणु परीक्षण जैसी कोई बात है. आप इन दोनों ही बातों को किस तरह देखते हैं? जवाब देते हुए अनिल ने कहा, “वास्तव में प्रधानमंत्री को राष्ट्र के नाम विशेष संबोधन के ज़रिए इसे बताने की आवश्यकता नहीं थी. अगर राष्ट्र के नाम संबोधन की आवश्यकता थी तो वह पुलवामा हमले के समय ज़्यादा थी. पूरा देश उस समय बहुत सदमे में था, लोगों में नाराज़गी थी. वो एक बड़ी घटना थी, पूरे देश को हिला देने वाली. लेकिन उस वक़्त प्रधानमंत्री को यह ज़रूरत नहीं महसूस हुई कि राष्ट्र के नाम विशेष संबोधन दें. लेकिन ये जो घटना हुई कि तीन मिनट के भीतर अपने ही कबाड़ हो चुके एक उपग्रह को एक मिसाइल द्वारा नष्ट कर दिया गया तो उन्होंने पूरे देश को बताया. तो इसके पीछे जो मकसद है वो प्रोपेगैंडा का है.” इस घटना पर विपक्ष द्वारा सवाल उठाए जाने पर- ‘विपक्ष हर चीज़ पर सवाल खड़े कर रहा है’- जैसी बात भारतीय जनता पार्टी व प्रधानमंत्री द्वारा बार-ब
This week’s Reporters Without Orders features host Cherry Agarwal, Business Standard's Arup Roychoudhury, Newslaundry’s head of research Ayush Tiwari, and Newslaundry's associate editor Meghnad. The panel talks about the Election Commission of India's Model Code of Conduct, a recent study by Reuters Institute for the Study of Journalism on Indian digital media, and Rahul Gandhi’s announcement of the Nyuntam Aay Yojana (NYAY). The discussion starts with the Reuters report with Ayush explaining the nuances of the survey. The panel discusses its important aspects like the sample size and type of questions, and examines why some news sites are more trusted by Indians. Arup says, "Times of India right now in this country is almost as synonymous as 'Xerox' versus 'photocopy'." Meghnad tells us about the guidelines issued by the Election Commission of India with respect to social media for the conduct of political parties and candidates during elections. Ayush and Arup share their opinions on why the EC may face a lot of trouble in the absence of laws regarding political advertisements. On the EC's effort to keep a check on social media, Meghnad says, “Maybe they are just putting out reports of ‘we have taken action’, whereas there might be thousands and thousands which have just been ignored.” The panel also discusses the "ghost advertisers" on Facebook and the effectiveness of the EC’s guidelines. Cherry discusses the recent announcements made by the Congress as poll promises, focusing on the NYAY, which is the party's minimum income guarantee scheme. “This is a poll promise, how well this gets implemented—if it gets implemented—is what we have to see.” NYAY offers ₹12,000 per month for a family (up to ₹72,000 per year) as basic income. When it comes to how the scheme will be funded, Ayush says: “Till the coming election they won’t clarify it, because keeping it vague is the best idea.” Arup also gives an in-depth analysis of the basic structure of a minimum income g
बीत रहा हफ़्ता रंगों के त्यौहार ‘होली’ के उल्लास में डूबा रहा. इस बीच तमाम घटनाएं अप्रभावित अपनी गति से घटती रहीं. तमाम चिंताजनक वारदातों से अप्रभावित प्रधानमंत्री के कार्यक्रम वक़्त और तारीख़ में बिना किसी फेरबदल के आयोजित होते रहे. ऐसे में नज़ीर अकबराबादी का होली पर लिखा गीत ‘होली की बहारें’ बेहद मानीखेज़ है. उनके लिए फिराक़ गोरखपुरी लिखते हैं कि नज़ीर दुनिया के रंग में रंगे हुए महाकवि थे. वे दुनिया में रहते थे और दुनिया उनमें रहती थी, जो उनकी कविताओं में हंसती-बोलती, जीती-जागती त्यौहार मनाती नज़र आती है. गीत के कुछ अंश इस प्रकार हैं- “जब फागुन रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की और दफ़ के शोर खड़कते हों तब देख बहारें होली की परियों के रंग दमकते हों तब देख बहारें होली की ख़ुम, शीशे, जाम झलकते हों तब देख बहारें होली की.” अनिल यादव गीत के बारे में बताते हुए कहते हैं कि ऐसे वक़्त में जब सांप्रदायिक आधारों पर समाज को बांटने की कोशिशें बदस्तूर जारी हैं, यह गीत इस लिए भी सुना/ पढ़ा जाना चाहिए क्योंकि इससे पता चलता है कि हमारी साझी संस्कृति का रंग कितना गहरा है. रंगों के त्यौहार पर संक्षिप्त बातचीत व गीत के ज़िक्र के बात चर्चा के विषयों की ओर लौटना हुआ. इस हफ़्ते की चर्चा में भारतीय जनता पार्टी के लोकसभा उम्मीदवारों की पहली सूची जारी हुई जिसमें वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी का नाम नहीं होने के बाद अब उनके राजनीतिक अवसान, पंजाब नेशनल बैंक से तकरीबन 13000 करोड़ रूपये के गबन के बाद देश से फरार चल रहे नीरव मोदी की लंदन में हुई गिरफ़्तारी, पत्रकार बरखा दत्त को गालियां देने व जान से मारने की धमकी देने वाले कुछ लोगों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने, न्यूज़ीलैण्ड में मस्जिदों में घुसकर दो बन्दूकधारियों द्वारा तकरीबन 50 लोगों की हत्या की आतंकवादी घटना, प्रधानमंत्री के चुनावी अभियान ‘मैं भी चौकीदार’ और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की सीक्रेट डायरी प्रकाश में आने, उससे सामने आ रहे तथ्यों को चर्चा में विशेष तौर पर लिया गया. चर्चा में इस बार लेखक-पत्रकार अनिल यादव व न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकार आनंद वर्धन शामिल हुए. चर्चा का संचालन हमेशा की तरह न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. कर्नाटक के डायरी-प्रकरण से चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल ने सवाल किया कि यह डा
बीता हफ़्ता कई वजहों से चर्चा में रहा. चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा की जिसके साथ ही नेताओं की बयानबाजी का दौर शुरू हो गया. इस हफ़्ते की कुछ प्रमुख घटनाओं मसलन कर्नाटक के बीजेपी नेता अनंत कुमार हेगड़े का राहुल गांधी और उनके परिवार पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना, हिंदुस्तान यूनीलीवर के उत्पाद ‘सर्फ़ एक्सेल’ के होली से जुड़े एक विज्ञापन पर उठा विवाद, अदालत की अवमानना के आरोप के चलते शिलॉन्ग टाइम्स की एडिटर पैट्रीशिया मुखीम पर मेघालय हाईकोर्ट द्वारा लगाया गया जुर्माना और जुर्माने की अदायगी में असफल रहने पर 6 महीने की जेल के साथ अख़बार बंद करने का आदेश, आदि विषय इस बार की चर्चा में शामिल रहे. चर्चा में इस बार पत्रकार राहुल कोटियाल ने बतौर मेहमान शिरकत की. साथ ही न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकार आनंद वर्धन व लेखक-पत्रकार अनिल यादव भी चर्चा में शामिल रहे. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल ने कहा कि हमारे समाज या समय में हर चीज़ के साथ विवाद जुड़ जाने की एक परंपरा विकसित हो गई है और अब किसी भी चीज़ का विवादों के साए में चले जाना आम सी बात हो गई है. चुनाव की तारीख़ों के ऐलान के बाद रमज़ान के महीने में चुनाव होने और चुनाव की तारीख़ों व फेज़ को लेकर भी विवाद हो गया. राजनीतिक गलियारों में लगाई जा रही इन अटकलों का ज़िक्र करते हुए कि चुनाव की तारीख़ें बीजेपी के मुफ़ीद हैं, अतुल ने सवाल किया कि इस विवाद को कैसे देखा जाए? क्या इसमें विपक्ष को किसी भी तरह का डिसएडवांटेज है? जवाब देते हुए अनिल ने कहा, “ये चुनाव काफ़ी अविश्वास के माहौल में हो रहे हैं. एक संभावना यह भी थी कि क्या पता चुनाव हों ही न. सर्जिकल स्ट्राइक के बाद ये अटकलें लगाई गईं कि हो सकता है प्रधानमंत्री मोदी आपातकाल लागू करने के लिए इस अवसर का इस्तेमाल करें और चुनाव आगे चलकर तब कराएं जब परिस्थितियां उनके पक्ष में हो जाएं दूसरा एक बहुत बड़ी आशंका पिछले पांच सालों में हवा में रही है कि ईवीएम के ज़रिए चुनाव में गड़बड़ी की जाती है. तो एक तरह से सरकार और चुनाव आयोग के प्रति पिछले पांच सालों में एक अविश्वास का माहौल हवा में रहा है और उसी पृष्ठभूमि में ये चुनाव हो रहे हैं. तो जहां असुरक्षा होती है, अविश्वास होता है, हर चीज़ के दूसरे अर्थ निकाले जाते हैं. और मुझे यह लगता है
This week’s Reporters Without Orders features our host Cherry Agarwal, award-winning reporter Amit Visen, Newslaundry’s head of research Ayush Tiwari and desk writer Gaurav Sarkar. The panel talks about gender pay gap across newsrooms, Rahul Gandhi's use of "ji" for Jaish chief Masood Azhar, Election Commission's presser, custodial deaths in Bihar, government advertisements and more. The discussion starts with Ayush talking about a YouGov poll on dwindling job opportunities in the country. He mentions that the females surveyed are conscious of the disparity in pay. Cherry mentions the BBC's gender pay gap story and asks Amit about his experience with different media organisations. Amit speaks of the prejudice against women journalist that restricts them to female-centric content. Reflecting on what was over-reported by sections of the media, Gaurav talks about the internet outrage over Rahul Gandhi using "ji" to address Masood Azhar. The panel also discusses the misuse of laws such as sedition. Amit talks about the announcements made by the Election Commission and what does no-go for simultaneous elections in Jammu and Kashmir mean. He also expresses his disappointment at the under-reporting of the custodial deaths in Bihar. Ayush and Gaurav share their opinion on the Huffington Post report about the Indian cricket team wearing camouflage caps. “…It's not difficult to see the emotion that they are coming from, post-Pulwama, but does it really require PCB [Pakistan Cricket Board] …to say that you all are hurting our sentiments?” says Gaurav. Ayush remarks, “They [Indian government] have given patriotism a bad name by taking it to very irrational extremes but that shouldn’t limit our horizon of looking at things.” Cherry discusses the upcoming Lok Sabha elections and some of the announcements made by the Election Commission. Is monitoring the spread of fake news and disinformation across social media platforms within EC's jurisdiction? Is EC's reasoning for not
बीते हफ़्ते एक तरफ़ जहां कुछ बेहद अहम मुद्दे चर्चा में रहे वहीं कुछ घटनाएं मीडिया गलियारों में सनसनी की तरह छाईं रहीं. इस हफ़्ते की चर्चा में हमने उन्हीं में से कुछ को विषयों के लिया. उत्तर प्रदेश के संत कबीरनगर में सांसद और विधायक के बीच हुई जूतम-पैजार की घटना और भारतीय राजनीति की अहंकार-नीति, अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद और विवाद सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा हुई तीन मध्यस्थों की नियुक्ति, राफेल डील से जुड़े कुछ दस्तावेज़ों की चोरी, सरकार के रवैये और द हिन्दू को निशाने पर लिए जाने और प्रधानमंत्री द्वारा मानवीय गरिमा और समझ-बूझ को परे रखते हुए बेहद संवेदनहीनता से डिस्लेक्सिया पीड़ितों का मज़ाक उड़ाए जाने की घटना को चर्चा के विषय के तौर पर लिया गया. चर्चा में इस बार ‘पेट्रियट’ न्यूज़पेपर के सीनियर एसोसिएट एडिटर मिहिर श्रीवास्तव ने बतौर मेहमान शिरकत की. साथ ही चर्चा में लेखक-पत्रकार अनिल यादव भी शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. चर्चा की शुरुआत में ‘न्यूडिटी’ पर अपने शोध और क़िताबों के लिए मशहूर मिहिर इस विषय पर अपनी संक्षिप्त राय रखते हुए कहते हैं, “जहां तक न्यूडिटी का सवाल है, इसके नाम पर कुछ लोग संस्कृति के ठेकेदार बने फिरते हैं. लोगों को मारते हैं, पेंटिंग फाड़ देते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि जिस चीज़ की वह सुरक्षा करने में लगे हैं, वह भारत की संस्कृति नहीं है. वह ‘विक्टोरियन मोरैलिटी’ है. यह ‘विक्टोरियन मोरैलिटी’ ढाई-तीन सौ साल पहले अंग्रेज़ी शासन के दौरान हम पर थोपी गई है.” इसके बाद उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर में हुए ‘जूता-प्रकरण’ से चर्चा के निर्धारित विषयों की ओर लौटते हुए चर्चा की शुरुआत हुई. भारतीय समाज और राजनीति में पद-प्रतिष्ठा और नाम की भूख और इससे पैदा अहंकार पर बात करते हुए अतुल सवाल करते हैं, “नाम की भूख और यश लोलुपता की यह परंपरा इस स्तर तक पहुंच जाए कि वह ‘जूता’ चलने की एक परंपरा को जन्म दे और वह परंपरा अमर हो जाए, आप इसे कैसे देखते हैं?” जवाब में बरसों पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा में जूतम-पैजार की घटना का ज़िक्र करते हुए अनिल कहते हैं, “जो लोग पॉलिटिक्स में हैं, वो अपनी जो छवि पेश करते हैं, वो असल में वैसे हैं नहीं. वो पोज़ करते हैं कि वो लोगों की सेवा करने के लिए, अपने इलाके का विकास करन
In this episode of Reporters Without Orders, host Cherry Agarwal is joined by Newslaundry's head of research Ayush Tiwari, desk writer Gaurav Sarkar and Vijaita Singh from The Hindu. The panel talks about the reporting on the Balakot airstrike, ghost advertising for the BJP online, and more. The podcast kicks off with the panel talking about the reportage on the casualties caused by the IAF’s airstrike on a Jaish-e-Mohammad's training camp. Discussing the varying numbers put out by the media, Vijaita says: “There was a precision strike ... even Pakistan has admitted ... but to give numbers, it’s very difficult for the IAF or anybody because Pakistan is very secretive about these things.” Cherry is concerned about the credibility of "anonymous sources", saying, "I am often fearful that once the report goes out, [what if] my source flips over and says I didn’t talk to you?” They discuss the I&B Ministry’s showcause notice to two TV channels for airing a Pakistan Army press briefing. Ayush pointing out its digital equivalent, says: “Many of these digital outlets carried stories on what the Pakistan newspapers are saying … would that also be considered against national security?” Cherry points out that the media is not a tool for the government to set the narrative—it's there to raise questions, which doesn't make them anti-national or unpatriotic. The discussion moves to Gaurav’s story on how Facebook's recently-released Ad Library Report lists "ghost advertisers"—who are Facebook and Instagram pages which often run ads for political parties without disclaimers. Gaurav explains, "You don’t know who has been funding that. So officially, if the BJP’s accounts are spending ₹6-8 lakh a week, then who are these guys pushing about a crore worth of advertising in a month?” For this and more, listen up!
बीता पूरा हफ़्ता काफ़ी उठापटक भरा रहा. चर्चा में उन्हीं में से कुछ विषयों पर विस्तार से बात की गई. इस हफ़्ते की सबसे महत्वपूर्ण घटना रही, भारत और पाकिस्तान के हवाई हमलों के बाद पैदा हुआ तनाव. पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी ठिकानों पर कार्रवाई की थी. बदले में पाकिस्तान ने भारत की हवाई सीमा का उल्लंघन किया. भारत- पाकिस्तान के बीच पैदा तनाव की वजह से एक और महत्वपूर्ण घटना जो उस तरह से सुर्ख़ियों में न आ सकी, वह अरुणाचल प्रदेश में वहां के स्थानीय निवासियों द्वारा किया गया बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन है. टकराव की वजह वहां पर ऐसे छः समुदायों को ‘स्थानीय निवासी प्रमाणपत्र’ देने की सिफ़ारिश थी जो मूल रूप से अरुणाचल के निवासी नहीं हैं, लेकिन दशकों से नामसाई और चांगलांग जिलों में रह रहे थे. तीसरी घटना जो इस हफ़्ते चर्चा का विषय रही, वह है 13 से ज़्यादा चैनलों को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा नोटिस जारी किया जाना. इन चैनलों के ऊपर आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तान के सैन्य प्रवक्ता मेजर जनरल गफूर की उस प्रेस कांफ्रेंस को लाइव दिखाया. जिसमें वो भारत को हमले का जवाब देने की धमकी दे रहे थे. सरकार का इस पर कहना रहा कि यह ग़लत परम्परा है, इससे देश की एकता और अखंडता पर संकट पैदा हो सकता है. इस हफ्ते चर्चा में ‘द ट्रिब्यून’ की डेप्युटी एडिटर स्मिता शर्मा बतौर मेहमान शिरकत की. साथ ही चर्चा में हमारे साथ लेखक-पत्रकार अनिल यादव भी शामिल हुए. चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. भारत-पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण माहौल पर चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल ने एक सवाल रखा कि ऊरी हमले के बाद पिछला जो सर्जिकल स्ट्राइक हुआ और अब ये जो इंडियन एयरफोर्स ने किया है, इससे क्या वह धारणा टूट गई है कि न्यूक्लियर पॉवर रहते हुए भी इस तरह की परिस्थितियां आने पर या किसी तरह की क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म की स्थिति में हम पाकिस्तान को जवाब दे सकते हैं? या हम न्यूक्लियर पॉवर होते हुए भी एक लिमिटेड लेवल पर एक दूसरे से कॉन्फ्रंट कर सकते हैं? इसका जवाब देते हुए स्मिता ने कहा कि अगर आप न्यूक्लियर डेटरेंस की बात करते हैं तो न्यूक्लियर डेटरेंस क्या है? इस कांसेप्ट को लेकर बहुत चर्चाएं होती रहती हैं. जब आपके पास परमाणु हथियार होता है तो क्य
This episode of Reporters Without Orders features host Cherry Agarwal, Newslaundry's head of research Ayush Tiwari, special correspondent Prateek Goyal and independent journalist Aruna Chandrasekhar. The panel talks about the Indian airstrike in Jaba, near Balakot, Supreme Court's order to evict more than 1 million tribals and forest-dwellers, the Kisan long march in Maharashtra and more. The podcast kicks off with the panel talking about IAF’s airstrike on Jaish-e-Muhammad's "biggest training camp" in Pakistan. They also talk about the Supreme Court's verdict which has the potential to impact as many as 1 million tribals and forest-dwellers. Cherry points how tribals are often criticised for occupying "illegal" land. To which, Aruna says, “The government is supposed to be a custodian of public land…the idea that they are illegal occupants or illegal encroachers is part of language that is still extremely entrenched in our bureaucracy.” The panel also discusses why Arunachal Pradesh has been on the boil and a section of the media's coverage of the ongoing agitation. Further, they discuss the Republic TV-AMU controversy and the reason why sedition is used with much ease. Talking about police's actions in the AMU case, Ayush says, “They didn’t make any arrests in that sedition charge case… there are robbery, murder, rioting (charges), besides the sedition charge.” Moving on, Prateek, who was at the Kisan long march that began from Nasik's Mumbai Naka, tells the panel what he saw on the ground. The panel also discusses the implications of association of the farmers' protest with AIKS. Prateek says, “Farmers are in distress… people above the age of 70 walked 20-25 km to take part in the march.” He says whether AIKS takes advantage of that or not is a separate issue, but such protests will go a long way in highlighting the agrarian distress.
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