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Prime Time with Ravish

Author: NDTV

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Research and Analysis of the day's top stories with Ravish Kumar.
505 Episodes
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किसान भले ही तय करते हो कि दिल्ली में किसकी सरकार बनेगी. लेकिन आज वो उस दिल्ली में प्रवेश नहीं कर सकते हैं. किसान केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानून की वापसी की मांग कर रहे हैं. महामारी की चिंता तो होनी ही चाहिए. लेकिन इसी महामारी अनेक उदाहरण आप के सामने आए जब राजनीतिक दल खुलकर रैली करते रहे. किसान दिल्ली नहीं आ सके इसके लिए दिल्ली की सीमाओं को सील कर दिया गया. दिल्ली किसानों से दूर हो गयी.
26 नवंबर को आम हड़ताल है. इसमें सरकारी कर्मचारी, मजदूरों के संगठनों के साथ-साथ किसान भी शामिल हैं. अगर दिल्ली तक आने दिया गया तो पंजाब-हरियाणा से काफी संख्या में किसानों के आने की संभावना है. यह भी ध्यान देने लायक है कि दिल्ली में 1 नवंबर से लेकर 24 नवंबर तक कोरोना से 2110 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है. तब किसानों को यह बताना होगा कि नेताओं को रैली करने की अनुमति किस कानून के तहत दी गयी थी. ऐसा नहीं है कि केंद्र सरकार की तीन कृषि कानूनों को लेकर सिर्फ पंजाब और हरियाणा में ही विरोध हो रहा है. नए कानून के अनुसार किसान कॉरपोरेट से अपनी शर्तों पर समझौता करेगा ऐसा सरकार की तरफ से दावा किया गया है.
भारत के राजनीतिक दल संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के मामले में लगातार निराश कर रहे हैं. यह बात सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए लागू होती है. राजनीति का काम है कि वो समाज व्याप्त धार्मिक और जातिगत संकीर्णता के खिलाफ काम करें. आर्टिकल 15 के तहत संविधान देश के नागरिकों के साथ धर्म, जाति, लिंग के आधार पर भेदभाव को इजाजत नहीं देता है. लेकिन आए दिन भेदभाव की राजनीति खड़ी की जा रही है.
क्या आपने बहसोत्पादन के बारे में सुना है? बहसोत्पादन एक नयी अर्थव्यवस्था का नाम है. जब अर्थव्यवस्था के मोजूदा सिद्धांतों के अनुसार उत्पादन प्रक्रिया ठप सी हो जाती है तो बहसोत्पादन के माघ्यम से अर्धव्यवस्था को रफ्तार दी जाती है. यानी बहसोत्पादन एक वैकल्पिक अर्थव्यवस्था का नाम है. इसकी खोज किसी ने नहीं की बल्कि ये अपने आप हो गया. इसके अनुसार हफ्ते या महीने के हिसाब से टॉपिक पैदा की जाती है.
सर्दियों के कारण दुनिया भर में कोरोना का प्रकोप बढ़ने लगा है. भारत में ही महामारी दिल्ली और मुंबई तक सीमित नहीं है. कल हमने आपको प्राइम टाइम में बताया था कि बिहार के दरभंगा में टेस्ट और इलाज की क्या स्थिति है. महाराष्ट्र के उस्मानाबाद की आबादी में से सिर्फ एक फीसदी आबादी ही संक्रमित हुई है. लेकिन यहां के सरकारी अस्पतालों में सुधार की स्थिति है. उससे दूसरे भी सीख सकते हैं.
कोविड को लेकर हर दिन नए-नए रिसर्च आ रहे हैं. पता नहीं अभी तक कोविड को लेकर बने कॉलर ट्यून पर कोई रिसर्च क्यों नहीं आया है. आप इस कॉलर ट्यून को टॉर्चर ट्यून कहने की जल्दी न करें. पहले बात सुन लें. सटीक आंकड़े नहीं हैं. अंदाज़े से कह रहा हूं. दिन भर में करोड़ों लोग फोन पर बात करते होंगे. करोड़ों लोग दिन में कई बार बात करते होंगे. कोरोना से बचाव के लिए क्या करना है, हेल्पलाइन नंबर क्या है. तो फिर जागरुकता आ क्यों नहीं रही है. कई लोग नंबर मिलाने के बाद इंतज़ार कर रहे हैं कि कॉलर ट्यून कब खत्म होगा और मास्क नाक से नीचे भी है जबकि वही सुन रहे हैं कि मास्क कैसे पहनना है. कई बार लगता है कि कॉलर ट्यून को लेकर रिसर्च होता तो यह निष्कर्ष निकल आता कि जागरुकता चाहे जैसे आती हो, कानों के रास्ते नहीं आती है. कॉलर ट्यून से नहीं आती है. वैसे यह तरीका मुझे तो शानदार लग लेकिन जो नज़ारा आस-पास दिख रहा है लग नहीं है कि हर बार फोन करने पर हम जो चंद सेकेंड की कुर्बानी दे रहे हैं उसका कोई नतीजा निकल रहा है.
भारत का समाज बुनियादी रूप से प्रेम का विरोधी है. किसी को प्रेम न हो जाए. अपनी पसंद से धर्म या जाति के बाहर शादी न हो जाए. इस आशंका में डूबा रहता है ,डरा रहता है. एक ऐसा समाज जो सोते जागते गीतों में सिर्फ प्रेम गीत ही सुनता है. प्रेम से इतना डरता है कि डर का भूत खड़ा करता है. ऐसे ही एक भूत का नाम है लव जिहाद.
पत्रकारों की गिरफ्तारी, जांच और जमानत याचिका के मामले में अदालतों के फैसले में अगर इतना अंतर होगा तो लोग सवाल करेंगे ही कि क्या कानून का पैमाना किसी खास पत्रकार के लिए ही है या सभी के लिए है. एक पत्रकार के मामले की सुनवाई जल्दी हो जाती है और बाकी पत्रकारों या सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सुनवाई में काफी वक्त लग जाता है. आइए देखते हैं प्राइम टाइम रवीश कुमार के साथ...
रविवार को कोलकाता (Kolkata) की सड़कों पर सिर्फ एक अभिनेता को अंतिम विदाई नहीं दी गई बल्कि उस विदाई में किसी अभिनेता के लिए स्वागत भी था. अगर आने वाला कलाकार सौमित्र चटर्जी (Saumitra Chatterjee) की तरह अपने अभिनय की साधना में डूबा रहेगा. तो किनारे बैठा समाज उसे अपने दिलों में किसी पुराने हिसाब की तरह जोड़ता रहेगा. बंगाल शोक में डूबा हुआ है यह बात उत्तर भारत की समझ से बहुत दूर की है. जब दिल्ली में हिंदी के बड़े कवि कुंवर नारायण का अंतिम संस्कार हो रहा था तो वहां कोई 150 लोग भी नहीं होंगे. जब विजयदान देथा जैसे साहित्यकार का निधन हुआ तो शायद ही किसी चैनल के पास उनसे बातचीत का कोई वीडियो भी था. ये किसी की लोकप्रियता का पैमाना तो नहीं हो सकता लेकिन कुंवर नायारण की कविताएं और विजयदान देथा की लोककथाएं आज भी इंटरनेट पर किसी बड़े संकट के समय आसरा बनकर तैरती रहती हैं. आपको तीन अखबारों की कवरेज से अंदाजा लगेगा कि इस अंतरारष्ट्रीय स्तर के अभिनेता को वहां के अखबारों ने कैसे याद किया है.
दिल्ली में कोरोना के कारण पिछले 24 घंटे में 100 अधिक लोगों की मौत हुई है. इससे पहले 16 जून को 93 लोगों की मौत हुई थी. अभी तक दिल्ली में कोरोना से दिल्ली में 7332 लोगों की मौत हो चुकी है. जिनमें से 563 लोगों की मौत पिछले एक हफ्ते में हुई है. आप देख सकते हैं कि 6 नवबंर से 12 नवबंर के बीच मरने वालों की संख्या कितनी तेजी से बढ़ी है. 6 नवबंर को 64 लोगों की मौत हुई थी दिल्ली में. 9 नवबंर को 71 लोगों की मौत हुई थी. 11 नवबंर को दिल्ली में 85 लोगों की मौत हुई और 12 नवबंर को 104 लोगों की मौत हुई.
देश और दुनिया में कोरोना का कहर अभी बना हुआ है और खासकर राजधानी दिल्ली में तो लगता है कि कोरोना की तीसरी लहर शुरू हो गई है. क्योंकि हर रोज रेकॉर्ड नए केस सामने आ रहे हैं. कल ही 8500 से ज्यादा केस सामने आए हैं. दिल्ली सरकार के एहसास है कि आने वाले दिन और भी ज्यादा कठिन होने जा रहे हैं. यही वजह है कि दिल्ली सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों में 80 प्रतिशत बेड कोरोना मरीजों के लिए रिजर्व करने का फैसला किया है जिसके लिए हाईकोर्ट ने आज अनुमति भी दे दी है. कोरोना के इस कहर के बीच प्रदूषण भी हावी हो रहा है ऊपर से मौसम है त्योहारों का तो लोग ज्यादा से ज्यादा बाहर निकल रहे हैं. दिल्ली और देश के दूसरे इलाकों में बाजारों में बहुत भीड़ देखने को मिल रही है.
चुनाव खत्म होने के अगले दिन चुनाव पर बात करना ऐसा ही लगता है जैसे दीवाली के दूसरे दिन हरी घास पर पटाखों के लाल-लाल बिखरे हुए कागज को देखकर लगता है. थकान सा लगता है कि इसे अभी साफ करें या कुछ दिन रहने दें. कहने का मतलब यह है कि नया कहने के लिए कुछ बचता नहीं है. चिराग पासवान का पटाखा भले ना फूटा हो लेकिन उससे झोले में रखे पटाखों में आग लग गयी. हालांकि कुछ पटाखे फूटने से रह गए. ऐसे समय में जब प्रदूषण के कारण पटाखों पर बैन की बात हो रही है वैसे में पटाखे को रूपक की तरह प्रयोग करना गलत हो सकता है, ठीक उसी तरह जैसे चिराग अगर नीतीश के लिए गलत हैं तो बीजेपी के लिए अच्छे कैसे हो सकते हैं?
फर्ज कीजिए कि आपका दाखिला किसी सरकारी मेडिकल कॉलेज में होता है. दाखिले के समय आप फीस जमा करते हैं 52 हजार और कुछ समय बाद आपसे कहा जाए कि आपको हर साल 9 लाख 20 हजार रुपया बॉन्ड के रूप में अलग से जमा करने होंगे तो आप क्या करेंगे? इससे साथ-साथ फीस को बढ़ाकर 52 हजार से 80 हजार कर दिया जाए तो आप क्या करेंगे? सालाना बॉन्ड और फीस मिलाकर 10 लाख जमा करवाने होंगे. फीस बढ़नी चाहिए लेकिन क्या फीस एक बार में 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ जानी चाहिए? यह कमाल का काम हुआ है हरियाणा में.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को झूठों का सरदार घोषित करने से पहले अपने आसपास झांक कर देख लें , कि कोई दूसरा तो नहीं है? मानव सभ्यता के इतिहास में तो झूठ बोलने वाले बहुत हुए, मगर ट्रंप का अपना मुकाम है. ट्रंप के हर झूठ की गिनती की गयी. भारत में झूठ की खेती का मुहावरा तो सुना था लेकिन झूठ की गिनती का नहीं. 2016 में ट्रंप के राष्ट्रपति बनने में झूठ का अहम योगदान रहा था. उसके बाद से दुनिया में चुनावों में झूठ को लेकर सतर्कता बढ़ी है, भारत को छोड़कर.
चुनाव ऐसा होना चाहिए एक-एक वोट से रुझान बदल जाए. आगे चल रहे ट्रंप अब पीछे नजर आ रहे हैं. हो सकता है कि फिर आगे निकल जाएं. मतों की गिनतियां आखिरी चरण की तरफ अग्रसर हैं. अगर कुछ नहीं पलटा तो जो बाइडन राष्ट्रपति हो जाएंगे. अगर कुछ चमत्कार हुआ तो ट्रंप बन जाएंगे. अमेरिकी मीडिया अब कुछ भी सोच समझकर बोलना चाहता है. किसी की हार जीत पर दाव लगाने से बचने लगा है.
आशंकाओं से भरपूर अमेरिका में मतों की गिनती जारी है, अमेरिकी सड़कों पर जहां एक समय में नतीजों के दिन पार्टी का माहौल हुआ करता था. वहां आज तनाव है. पुलिस के पसीने छूट रहे हैं कि कहीं अगर चुनाव नतीजे बराबरी पर रहे तो क्या होगा, ट्रंप समर्थक क्या करेंगे और बाइडन समर्थक क्या करेंगे?
बिहार में दो चरणों का मतदान समाप्त हो गया. इसी के साथ 243 सीटों की विधानसभा के चुनाव में 165 सीटों के लिए मतदान हो गया. मत प्रतिशत की संख्या बदलती रहती है. क्योंकि चुनाव आयोग मतदान के दिन तक इसकी समीक्षा करता है और अंतिम नंबर देता है. बिहार के चुनाव में महिला मतदाताओं की पहचान अलग से मानी जाती रही है. इस बार ऐसा क्या हुआ कि पहले ही चरण के मतदान में महिलाओं ने कम दिए हैं? देखे रवीश कुमार के साथ प्राइम टाइम...
अगर आपको कोरोना (Coronavirus) के इस दौर में मास्क ना पहनना हो, सामाजिक दूरी का पालन ना करना हो और जुर्माना भी ना देना हो तो आप तुरंत बिहार चले जाइये. वहां अब किसी चीज का पालन नहीं हो रही है. अब इसकी संभावना भी नहीं है. अब बिहार को लेकर ग्लोबल प्रयोग होना चाहिए कि आखिर इस राज्य में ऐसा क्या है कि कोरोना को लेकर तमाम लापरवाही के बावजूद भी यहां कोरोना की संख्या दिल्ली से भी कम है, जहां इतने नियम कानून है. सोचिए चुनाव बिहार में हो रहे हैं और वहां कोई नियम कानून नहीं है लेकिन कोरोना के केस नहीं बढ़ रहे हैं. चुनाव अमेरिका में भी हो रहे हैं लेकिन वहां भी रैलियां हो रही है, लेकिन वहां केस बढ़ रहे हैं सिर्फ बिहार में नहीं बढ़ रहे हैं.
क्या बिहार चुनावों में स्वास्थ्य की बात हो रही है? प्रखंड से लेकर जिलास्तर तक कई अस्पतालों की हालत इतनी खराब है कि वहां न ICU है ना बेड. अगर डॉक्टर हैं भी तो बहुत ही कम. अस्पतालों के नाम पर भवन बनाने में ही कई साल निकाल दिए जाते हैं. और जब जनता का सब्र टूट जाता है तो एक बीमा पॉलिसी लॉन्च कर दी जाती है, झांसा देने के लिए. जब अस्पताल ही नहीं होंगे तो इस बीमा पॉलिसी का क्या फायदा होगा? सैकड़ों करोड़ रुपये स्वच्छता अभियान के विज्ञापन पर खर्च कर दिए गए. लेकिन अगर आप सरकारी अस्पतालों में सफाई का हाल देखेंगे तो इलाज से विश्वास उठ जाएगा.
आज हम आपको फिर से देश की अर्थव्यवस्था का बाइस्कोप दिखाने जा रहे हैं. इस बाइस्कोप से फायदा यह है कि आप जान पाएंगे कि कौन झूठ और कौन सच बोल रहा है. फ्लैशबैक में देखने से बाते अधिक समझ में आती है. भारत में तरह-तरह के अर्थशास्त्री हुए हैं सब ने अपना-अपना मॉडल बनाया है. एक ऐसे ही मॉडल की याद दिलाना चाहता हूं. अगर इसे ध्यान में लाया जाए तो हम कई मूर्तियां बना कर कई लाख डॉलर की अर्थव्यवस्था बना सकते हैं.
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Comments (13)

Pratap Nair

This is really a superb episode. Not to be missed 👌👌 #NDTV #PrimeTime #podcasts

Sep 5th
Reply

Saroj Ghosh

Fabulous

Sep 5th
Reply

Pratap Nair

This is one of the best Prime Time shows done by Ravish till date

Sep 2nd
Reply (1)

Sahil Pal

Why so fast forwarded audii

Jul 22nd
Reply

Krushanu Das

please upload the latest episode

Jan 7th
Reply

anurag tiwari

insightful as always

Oct 18th
Reply

Saroj Ghosh

thanks Ravish Kumar Sir

Aug 14th
Reply

Abdul Moqtadir

H

Jun 16th
Reply

vivek tiwari

Supr se upar

Apr 5th
Reply

vivek tiwari

Supr se upar

Mar 18th
Reply

M0_ Shy

Ravish ji rocks!

Dec 2nd
Reply

Aveeta

best as always

Nov 25th
Reply
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