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Prime Time with Ravish
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Prime Time with Ravish

Author: NDTV

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Research and Analysis of the day's top stories with Ravish Kumar.
479 Episodes
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कोरोनावायरस को लेकर पीएम मोदी ने चेताया, ''याद रखिए, जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं. एक कठिन समय से निकलकर हम आगे बढ़ रहे हैं, थोड़ी सी लापरवाही हमारी गति को रोक सकती है. हमारी खुशियों को धूमिल कर सकती है. जीवन की ज़िम्मेदारियों को निभाना और सतर्कता ये दोनो साथ-साथ चलेंगे तभी जीवन में ख़ुशियां बनी रहेंगी. दो गज की दूरी, समय-समय पर साबुन से हाथ धुलना और मास्क का ध्यान रखिए.'' देखिए प्राइम टाइम...
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (Yogi Adithyanath) ने कहा है कि हमने डेढ़ वर्ष में ही पांच वर्ष के काम को पूरा करते हुए हमने प्रदेश को खुले में शौच मुक्त कर दिया है. स्वच्छता की कीमत का महत्व हमारे पूर्व उत्तर प्रदेश से ज्यादा कोई नहीं समझ सकता. स्वच्छ भारत मिशन के कारण इंसेफ्लाइटिस से मौत के आंकड़ों को हमने 95 प्रतिशत कम किया है. मुख्यमंत्री दावा कर रहे हैं कि पांच वर्ष के कार्य को हमने डेढ़ वर्ष में ही पूरा कर लिया. इतनी सफाई और इतनी तत्परता के लिए सीएम और यूपी की जनता को बधाई. लेकिन पिछले कुछ दिनों को याद करें तो यूपी कभी हाथरस, कभी बलरामपुर, कभी लखीमपुर खीरी में हुए रेप के लिए घंटों बहस का मुद्दा बना रहा. एक नए कांड की वजह से यूपी फिर चर्चा में हैं. बात बलिया की है.
23 करोड़ की आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में अपराध की घटनाएं खत्म हो जाएगी ऐसा तो कभी नहीं हो सकता है. लेकिन अपराध की घटनाओं के सामने प्रशासन कमजोर नजर आती है तब वह भी एक कारण बन जाती है. जब तक व्यवस्था ठीक नहीं होगा अपराध के दरों में कमी नहीं आएगी. पिछले कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश अपराध को लेकर चर्चाओं में है. कानपुर में विकास दुबे ने पुलिस पर ही हमला कर दिया था. भारत में हर दिन 79 हत्याएं होती है. इनमें 13 प्रतिशत हत्याएं उत्तर प्रदेश में हो रही है.
आवश्यकता है एक नये आसमान कि जहां भारत के लोग नया शहर बसा सकें. धरती पर भारत के शहरों का हाल बहुत बुरा है. पिछले दो दिनों से लोग हैदराबाद शहर की हालत देखकर परेशान हैं. इससे पहले लोग गुरुग्राम और पटना जैसे शहरों को देखकर भी परेशान हो चुके हैं. आजकल वाईफाई से जोड़ देने से शहर हाई-फाई हो जाता है. शहरों के विकास के लिए कई योजना बनाए जाते हैं लेकिन क्या आपका शहर स्मार्ट बन गया है?
एक बारिश में आपने हैदराबाद शहर की हालत देख ली. हमारे शहरों की हालत ऐसी ही है. बस बारिश में पता चल जाता है कि उनकी इस हिसाब से देखभाल की गयी है. मैं स्मार्ट सिटी की बात कर आपको और अधिक निराश नहीं करना चाहता हूं. जम्मू कश्मीर की PDP पार्टी की महबूबा मुफ़्ती करीब एक साल के बाद रिहा कर दी गयी. 5 अगस्त 2019 को जब 370 खत्म किया गया था तब राज्य के कई नेताओं को हिरासत में लिया गया था.
अर्थव्यवस्था के सवाल पर आने से पहले सिस्टम के सवाल से गुजरना जरूरी है. यूनिवर्सिटीज ग्रांट्स कमीशन राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा करवाती है इसमें जो पास होता है उसे ही छात्रवृत्ति दी जाती है. 10 से 14 महीने हो गए हैं छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिली है. कितनी बार खबर छपी होगी मगर 14 महीनों में किसी को फर्क नहीं पड़ा. सिस्टम को पता है कि लोग इसे एक दिन की खबर समझकर आगे बढ़ जाएंगे. नया देखने की यही आदत दर्शक और पत्रकारिता को एक ही स्तर पर ला चुकी है. सिस्टम की यही थ्योरी काम आ जाती है जब किसी को जांच और सुनवाई के नाम पर कई सालों के लिए जेल में डाल दिया जाता है. उन्हें पता है कि खबर कितने दिन चलेगी.
हमारे देश में सिस्टम कैसे काम करता है, उसके काम का क्या पैमाना है इसका समय-समय पर मूल्यांकन करते रहिए. देखिए कि एक सिस्टम बहुत बड़ी संख्या में लोगों को कैसे कुछ नहीं समझता है और वही सिस्टम किसी एक व्यक्ति को कैसे देश और समाज के लिए खतरा बता कर फर्ज़ी मुकदमे में बंद कर देता है. हज़ारों की संख्या में शोध छात्र हों या अकेले फादर स्टैन स्वामी हों. सिस्टम को कोई फर्क नहीं पड़ता है. फर्क यही है कि हज़ारों की संख्या में छात्र लाचार नज़र आते हैं. एक अकेले स्टैन स्वामी सिस्टम की नाइंसाफियों से लड़ने निकल पड़ते हैं. मगर होता क्या है.
दिल्ली शहर में बाड़ा हिन्दू राव अस्पताल के डॉक्टरों और स्वास्थ कर्मियों को चार महीने से सैलरी नहीं मिली है और वे हड़ताल पर जाना चाहते हैं। आख़िर बाड़ा हिन्दू राव के डॉक्टर अपनी सैलरी के लिए कितनी बार हड़ताल पर जाएंगे. उसी तरह से UGC के रिसर्च स्कालर पत्र लिख रहे हैं कि कई महीनों से छात्रवृत्ति का पैसा नहीं आया है. विश्व गुरु भारत में शोध छात्रों को कई महीने से छात्रवृत्ति न मिले वर्ना नॉन विश्व गुरु कंट्री में भी स्कालरशिप बंद हो जाएगी. जब विश्व गुरु के यहां ही नहीं मिल रहा है तो वो भी क्यों दें. प्राइम टाइम के साथ रवीश कुमार...
न्यूज़ चैनलों और मदारी के खेल में अंतर होता है. आप जानते हैं कि मदारी खेल दिखा रहा है और मदारी का खेल ख़त्म हो जाता है. न्यूज़ चैनलों का खेल ख़त्म नहीं होता है. न्यूज़ चैनलों को बहुत से लोग यह समझ कर देखते हैं कि वह ख़बर दिखा रहा है. कहीं ऐसा तो नहीं कि आज मदारी और न्यूज़ चैनलों के खेल का पर्दाफ़ाश हो गया है. मुंबई पुलिस ने आज टीआरपी के एक ऐसे खेल को उजागर किया है जिससे पता चलता है कि सिर्फ 500 रुपये देकर भारत की पत्रकारिता का सत्यानाश कर दिया. अगर पुलिस और रेटिंग एजेंसी की जांच अदालत तक जाकर साबित होती है तो इससे गोदी मीडिया का रहस्य बाहर आ जाएगा. इस मामले में चार लोग गिरफ्तार हुए हैं. देखें रवीश कुमार का प्राइम टाइम
शाहीन बाग का धरना 24 मार्च को हट गया था. 7 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है. जबकि इस धरने को हटाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं जनवरी और फरवरी के महीने में ही दी जा चुकी थीं. वकील अमित साहनी और बीजेपी के पूर्व विधायक नंद किशोर गर्ग की याचिका थी कि किसी सार्वजनिक सड़क पर अनिश्चितकाल के लिए धरना नहीं दिया जा सकता इससे नागरिकों को दिक्कत होती है. दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि व्यवस्था बनाए रखना दिल्ली पुलिस का काम है. अदालत आदेश नहीं दे सकती है कि पुलिस किसी आंदोलन को कैसे हैंडल करे. सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसा ही किया. आइए देखते हैं प्राइम टाइम, रवीश कुमार के साथ...
तालाबंदी के दौरान आम जनता पर करोड़ों रुपए का जुर्माना और हाथरस में प्रदर्शन करने वाले लोगों पर अंतर्राष्ट्रीय साजिश का हिस्सा होने का आरोप... ये दोनों घटनाएं हमारे समय को परिभाषित कर रही हैं कि जनता होना कितना मुश्किल हो गया है. दुनियाभर में आपदाओं का इतिहास यह गवाह दे रहा है कि मौके का फायदा उठाकर सत्ता में बैठे लोग निरंकुशवादी हो जाते हैं, बेलगाम हो जाते हैं. जनता पर तरह-तरह के जुर्माने लगाए लग जाते हैं. आइए रवीश कुमार के साथ देखें पूरा प्राइम टाइम...
हाथरस मामले में अभी तक इस बात का जवाब नहीं मिला है कि रात के अंधेरे में पीड़िता के शव को जलाने का फैसला किसका था? आदेश किसका था? दोनों दो बातें हैं फैसला कोई और ले सकता है आदेश जिलाधिकारी या पुलिस अधिक्षक दे सकते हैं. इसके जवाब के लिए सीबीआई की जरूरत नहीं है सरकार ही इसका जवाब दे सकती थी. 48 घंटे तक SIT गांव में रही लेकिन इसका जवाब नहीं दे सकी की फैसला किसका था? पांच दिन बाद भी जवाब नहीं दिया जा रहा है. कई अधिकारियों को निलंबित भी किया गया है लेकिन आप सार्वजनिक रूप से नहीं जान सकते हैं कि ये अधिकारी शव जलाने के लिए निलंबित हुए हैं या अन्य लापरवाही के लिए. हाथरस के प्रशासन की तरफ से दो तरह के बयान सामने आए थे.
राहुल गांधी और प्रिंयका गांधी हाथरस नहीं जा सके. पहले उनके काफिले को रोका गया तो दोनों ने पैदल 168 किलोमीटर जाने का फैसला लिया. राहुल गांधी और प्रियंका पीड़ित परिवार से मिलना चाहते थे. जब कानून व्यवस्था पर नियंत्रण का इतना दावा हो तब भी ऐसे हालत क्यों हैं कि विपक्ष के नेता हाथरस नहीं जा सके. शुरू से ही लग रहा था कि 158 किलोमीटर का मार्च पूरा नहीं होगा. राहुल और प्रियंका के पैदल चलते ही विपक्ष कहा है? को नहीं दिखाने वाला मीडिया विपक्ष को दिखाने लगा. कुछ ही देर में पुलिस मार्च को रोकने लगी. मार्च पूरी तरह से शांतिपूर्ण था. और ऐसा भी नहीं था कि पूरा उत्तर प्रदेश सड़कों पर आ गया हो. राहुल गांधी के साथ पुलिस की काफी बहस हुई. यहां जो भी हुआ वो शर्मनाक है. पुलिस ने धक्का दिया या राहुल ने सतुलन खो दिया कहना मुश्किल है. लेकिन विपक्ष के नेता को जमीन पर गिरते देखना असहज करता है. वैसे भी विपक्ष अकेला होता है इसलिए जमीन पर गिरा दिया जाता है या गिर जाता है.
मैं यह प्राइम टाइम कर रहा हूं, इस उम्मीद में कि कोई देख रहा होगा. इस उम्मीद में कि जो भी देख रहा होगा उसे दिख रहा होगा कि क्या हो रहा है. देखने की बात इसलिए कह रहा हूं कि इस वक्त अदालत से लेकर प्रशासन में बैठे लोग इसी सवाल से भाग रहे होंगे कि क्या आपने हाथरस की बेटी के अंतिम संस्कार का वीडियो देखा, अगर देखा तो आपका क्या कहना है? अब आप क्या कदम उठाएंगे? पूरी कवायद तो इस बात की ही थी कि कोई नहीं देखे. हाथरस की पीड़िता का अंतिम संस्कार पुलिस क्यों करवा रही थी. क्या इस मामले में इस तरह से अंतिम संस्कार करवाना इंसाफ है? क्या इस मामले में अपराधी लड़की थी?
विश्वगुरु भारत में कोई ऐसा घंटा नहीं गुजरता है जब भारत में किसी लड़की के साथ बलात्कार की घटना नहीं होती है. ऐसी घटनाओं की संख्या इतनी अधिक है कि तय करना मुश्किल है कि विश्वगुरु भारत के राजनीतिक दल बलात्कार की किस घटना को मुद्दा बनाएंगे और फिर उनके कार्यकर्ता और नेता गोली मार देने और ठोक देने की भाषा बोलने लगेंगे. 2017 में भारत में बलात्कार के 32 हजार मुकदमें दर्ज हुए थे. उत्तर प्रदेश की 20 साल की पीड़िता का आज दिल्ली में निधन हो गया. उसकी हत्या तो 14 सितंबर को ही कर दी गयी थी जब 4 लोगों ने उसके साथ बलात्कार किया था और उसकी जीभ काट दी गयी थी. हालांकि DM ने जीभ काटने की घटना का खंडन किया है.
न्यूयॉर्क टाइम्स के पहले पन्ने पर आज एक खबर छपी है. पूरे पेज पर राष्ट्रपति ट्रंप के कारनामे छपे हैं. राष्ट्रपति ट्रंप के 20 साल के टैक्स रिटर्न का विश्लेषण किया गया है. सुशेन क्रेग, रस ब्यूटनर ने लंबे समय तक रिसर्च करने के बाद यह खबर लिखी है. इस खबर के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप ने लंबे समय तक अपनी आमदनी को नहीं बताया और टैक्स बचा लिया. भारत के लिए यह खबर बहुत जरूरी है. क्योंकि यहां ट्रंप के लिए हवन किया जाता है. साथ ही उन्हें अपना दोस्त भी बताया जाता है. हर देश के नागरिकों को इस बात पर नजर रखना चाहिए कि मुल्कों के राष्ट्राध्यक्ष किसे अपना दोस्त बताते हैं.
तालाबंदी से बड़ा भारत बंद क्या हो सकता है जिसने करोड़ों लोगों की नौकरियां छीन लीं और जीडीपी को माइनस में पहुंचा दिया. कोरोना की लड़ाई भी हाथ से निकल गई और 6 महीने में 92 हजार से ज्यादा लोग मारे गए. किसान संगठनों ने आज भारत बंद किया था. इस भारत बंद में तमाम विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए. विरोध को देखकर लगता ही है कि इस विषय पर कितनी सलाह ली गई होगी. इस बिल को अध्यादेश के जरिए लाया गया. गौरतलब है कि विधेयक राज्यों से भी उनके कई अधिकार छीन लेता है.
25 सितंबर को किसान संगठनों ने कृषि के तीन नए बिलों के खिलाफ भारत बंद का ऐलान किया है. इसी दिन मुंबई में एनसीबी अभिनेत्री दीपिका पादुकोण से ड्रग्स मामले में पूछताछ भी करेगी. जून महीने में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद कथित इंसाफ के नाम पर गोदी मीडिया लगातार इसी मुद्दे पर कवरेज किए जा रहा है. इस कवरेज में अब दीपिका पादुकोण का नाम भी जुड़ने जा रहा है. अब इसके बीच किसान आ गए हैं तो गलती किसानों की है. किसानों की एक गलती यह भी है कि अपने खेतों में टिड्डी दलों को भगाने के लिए किसानों ने गोदी मीडिया की मदद नहीं ली.
एक ऐसे समय में जब देश की अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक गिरावट आई है. कोरोना संकट और लॉकडाउन की वजह से करोड़ों लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं. बेरोजगारी अपने चरम पर है. ऐसे में कृषि सुधार बिलों के बाद सरकार ने श्रम विधेयक भी संसद में पारित करा लिए हैं. जिन्हें लेकर मजदूरों से लेकर कामगारों के मन में असुरक्षा बढ़ गई है. विपक्ष की गैरमौजूदगी में सरकार ने 15 बिल पारित करा लिए.
मोदी सरकार ने विपक्ष के बहिष्कार के बीच कृषि से जुड़े तीसरे विधेयक को भी राज्यसभा से पारित करा लिया. इस तरह से कृषि को लेकर मोदी सरकार ने अपना एजेंडा पूरा कर लिया है. इस बीच इस कृषि विधेयक का विरोध जारी है. क्यों सरकार कृषि कानून बनाने पर अड़ी हुई है. देश में सबसे बड़ी आबादी खेती पर निर्भर करती है. किसानों की हालत किसी से छिपी नहीं है. कृषि सुधार पहले भी हुए हैं लेकिन किसानों की जरूरत के आगे नाकाफी साबित हुए हैं. मंडी में भी किसानों के लिए हमदर्द नहीं रही हैं. बहुत कम किसानों को अपनी फसल न्यूनतम सर्मथन मूल्य पर बेचने का मौका मिल पाता है.
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Comments (13)

Pratap Nair

This is really a superb episode. Not to be missed 👌👌 #NDTV #PrimeTime #podcasts

Sep 5th
Reply

Saroj Ghosh

Fabulous

Sep 5th
Reply

Pratap Nair

This is one of the best Prime Time shows done by Ravish till date

Sep 2nd
Reply (1)

Sahil Pal

Why so fast forwarded audii

Jul 22nd
Reply

Krushanu Das

please upload the latest episode

Jan 7th
Reply

anurag tiwari

insightful as always

Oct 18th
Reply

Saroj Ghosh

thanks Ravish Kumar Sir

Aug 14th
Reply

Abdul Moqtadir

H

Jun 16th
Reply

vivek tiwari

Supr se upar

Apr 5th
Reply

vivek tiwari

Supr se upar

Mar 18th
Reply

M0_ Shy

Ravish ji rocks!

Dec 2nd
Reply

Aveeta

best as always

Nov 25th
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