Yatra
Claim Ownership

Yatra

Author: Ankit Pandey

Subscribed: 1Played: 6
Share

Description

This podcast has some good content, some well written poetry and stories.
Here I'm reciting some old stuf I've written so far.
55 Episodes
Reverse
घर (Ghar)

घर (Ghar)

2024-04-0902:52

सवाल तो कई हैं पर अब घर तो घर है, जरूरतों को पूरा करने का घर, तन का घर-मन का घर, मेरा घर, उसका घर, छत वाला घर, खपरैलों में छुपा घर या फिर एक अपना घर यानि इश्क़। पर इस घर में हम जी तो सकते हैं, मर नहीं सकते। हमें मरने के लिए भी तो घर चाहिए...
________________________ पुराने वृक्षों की खाल की रन्ध्रों में उग आते हैं छोटे-बड़े छातेनुमा पीले, मटमैले मशरूम मेरी पुरानी स्मृतियों में जिस तरह तुम्हारा उग आना होता है मटमैली, पीली, धुँधली सी हो कर किसी विंटेज खिड़की से थोड़ी सुन्दर  लेकिन छू लेने महसूसने पकड़ने से बहुत दूर क्षणिकाओं की तरह।। ________________________ तारीख- २०-०१-२०२४ दो० १२:३६ बजे ________________________
Khayal hi nahi, ishq bhi hai intezaarnama.
केदारनाथ सिंह शायद हिन्दी के समकालीन काव्य परिदृश्य में अकेले ऐसे कवि हैं, जो एक ही साथ गाँव के भी कवि हैं और शहर के भी। उनकी यह कविता शायद ऊँघते काटे जा रहे जंगलों की कराह होगी जो मुझे पढ़ने मिली।
एक अहसास कि माँ अभी मेरी हथेली पर अपना हाथ मल कर गईं और छोड़ गईं खुद को शीशे में, मुझ में...
loading
Comments