Discoverनारी शतक :- नारी के 100 अद्धभूत व रहस्यमय चरित्रों को उजागर करती काव्यात्मक संगीतमय कथा
नारी शतक :- नारी के 100 अद्धभूत व रहस्यमय चरित्रों को उजागर करती काव्यात्मक संगीतमय कथा
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नारी शतक :- नारी के 100 अद्धभूत व रहस्यमय चरित्रों को उजागर करती काव्यात्मक संगीतमय कथा

Author: Bhanunjai Dhawar & Dinesh Ojha

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Description

नारीनारी ईश्वर की एक ऐसी आद्धभूत,अनोखी,आश्चर्यजनक व सर्वोत्तम रचना है ।जिसे बनाकर ईश्वर खुद भी उसे नही समझ पाया कि आखिर नारी है क्या ? नारी जिसकी अच्छाई अगर मिले तो नर का जीवन स्वर्ग के समान हो जाता है और अगर बुराई मिल जाए तो जीवन नरक के समान हो जाता है।नारी स्वर्ग और नरक दोनों का प्रतिरूप है।कहा भी गया है कि ; यत्र पुजयते नारी, तत्र रम्यते देवता। अर्थात जहा नारी की पूजा होती हैं वहां देवताओं का निवास होता है।नारी की महिमा व गरिमा रहस्यमय है इसी महिमा मय नारी के गुण एवं अवगुण का बखान है हमारी यह रचना नारी शतक।
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हनुमंत सिद्ध चमत्कार माला, स्वयं महावीर हनुमानजी की ही प्रेरणा से लिखित एक ऐसी अद्भुत रचित रचना है जिसमें हनुमान जी के जन्म से लेकर वर्तमान समय तक की सभी घटनाओं की एक काव्यात्मक संगीबद्धअभिव्यक्ति है। यह रचना लिखे जाने के पीछे स्वयं हनुमान दादा का ही आशीर्वाद रहा है वरना इस तरह की रचना लिखा जाना शायद मेरे जैसे साधारण मनुष्य के बस की बात नहीं है। इस हनुमान सिद्ध चमत्कार माला में हनुमान दादा के चरित्र के साथ उनके विभिन्न चमत्कारों का वर्णन भी बड़े ही चाव से किया गया है ।इसमें हनुमान जी के मंत्र बीज भी है जिससे यह इसका पाठ करने वालो को स्वत सिद्ध होकर चमत्कारी अद्ध्यत्म शक्ति प्रदान करती है:- 1. हनुमंत गुरू ध्यान एवम् वंदना। 2. हनुमंत सिद्ध चमत्कार माला ध्यान एवम् समर्पण। 3. हनुमंत सिद्ध चमत्कार माला पाठ। 4. हनुमंत सिद्ध चमत्कार माला समर्पण। 5. हनुमान दादा आरती।
कोरोना के इस माहौल में जब पूरा विश्व संकट में है। इस संकट की घड़ी में कुछ पंक्तियां जो आत्म संतुष्टी दे व जीवन में कुछ नवीन प्रेरणा प्रदान करे, ये सोचते हुए हमने अपनी कलम से कुछ कविताएं रची है जो आपके लिए प्रस्तुत है ।
नारी ईश्वर की एक ऐसी आद्धभूत,अनोखी,आश्चर्यजनक व सर्वोत्तम रचना है ।जिसे बनाकर ईश्वर खुद भी उसे नही समझ पाया कि आखिर नारी है क्या ? नारी जिसकी अच्छाई अगर मिले तो नर का जीवन स्वर्ग के समान हो जाता है और अगर बुराई मिल जाए तो जीवन नरक के समान हो जाता है।नारी स्वर्ग और नरक दोनों का प्रतिरूप है।कहा भी गया है कि ; यत्र पुजयते नारी, तत्र रम्यते देवता। अर्थात जहा नारी की पूजा होती हैं वहां देवताओं का निवास होता है।नारी की महिमा व गरिमा रहस्यमय है इसी महिमा मय नारी के गुण एवं अवगुण का बखान है हमारी यह रचना नारी शतक।
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