हर एक सांस का हिसाब थोड़ी मांग रहा हूं
एक प्यारी सी किताब है जिंदगी
उसी के कुछ मै से पन्नों का प्यार मांग रहा हूं
या खुदा मैं जिंदगी नहीं मै जीने की वजह मांग रहा हूं
ना मंजिल तू, ना सफर तू
ना मुसाफिर तू, ना चाहत तू
लकीरों मै नहीं तेरा जीकर
फिर भी है, दिल को तेरी फिकर
तू है हवा, तू है लहर
कुछ पल मेरे संग ठेहर
तुझसे नहीं मेरा वजूद
मै तेरी हो जाती हू इसके बावजूद
ना मेरा हिस्सा तू ना मीठा सा किस्सा तू
कुछ अपना सा है, फिर क्यों तू....?
एक अखरी बार इश्क़ कर लेना
एक अखरी बार फिर से मुझे
बाहों मै भर लेना
एक अखरी बार मुझे अपना लेना
बस एक अखरी बार
उन बेजान आंखो का प्यार समझ लेना
एक अखरी बार मेरे खत्म होते वजूद को
मुस्कुराकर विदा कर देना