DiscoverKhayalS2E14 | होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे - Mirza Ghalib
S2E14 | होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे - Mirza Ghalib

S2E14 | होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे - Mirza Ghalib

Update: 2021-08-20
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Description

आज का ख्याल शायर मिर्ज़ा ग़ालिब की कलम से। शायर कहते है - 'बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मेरे आगे, होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे'। मिर्ज़ा असदुल्लाह बेग ख़ान, जो अपने तख़ल्लुस ग़ालिब से जाने जाते हैं, उर्दू एवं फ़ारसी भाषा के एक महान शायर थे। इनको उर्दू भाषा का सर्वकालिक महान शायर माना जाता है और फ़ारसी कविता के प्रवाह को हिन्दुस्तानी जबान में लोकप्रिय करवाने का श्रेय भी इनको दिया जाता है।

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